Old Testament
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सभोपदेशक 9:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
अपने मार्ग पर चला जा, अपनी रोटी आनन्द से खाया कर, और मन में सुख मानकर अपना दाखमधु पिया कर; क्योंकि परमेश्वर तेरे कामों से प्रसन्न हो चुका है।
सभोपदेशक 9:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
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सभोपदेशक 9:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
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सभोपदेशक 3:12 (HINIRV) »
मैंने जान लिया है कि मनुष्यों के लिये आनन्द करने और जीवन भर भलाई करने के सिवाए, और कुछ भी अच्छा नहीं;

सभोपदेशक 2:24 (HINIRV) »
मनुष्य के लिये खाने-पीने और परिश्रम करते हुए अपने जीव को सुखी रखने के सिवाय और कुछ भी अच्छा नहीं। मैंने देखा कि यह भी परमेश्वर की ओर से मिलता है।

व्यवस्थाविवरण 12:7 (HINIRV) »
और वहीं तुम अपने परमेश्वर यहोवा के सामने भोजन करना, और अपने-अपने घराने समेत उन सब कामों पर, जिनमें तुमने हाथ लगाया हो, और जिन पर तुम्हारे परमेश्वर यहोवा की आशीष मिली हो, आनन्द करना।
भाष्य का सीधा अर्थ
सभोपदेशक 9:7 कहता है कि जीवन के अवसरों में ईश्वर के साथ एक सहज, विश्वासपूर्ण आचरण अपनाओ: अवसर पर आनंदपूर्वक भोजन करो, खुशी के साथ जीवन के हर दिन को स्वीकार करो, और परमेश्वर की कृपा के साथ अपने कामों में संतोष पाओ। यह प्रेरणा बताती है कि जीवन के क्षणों में संतोष बनाए रखना और ईश्वर के अनुभव को दैनिक व्यवहार में दिखाना चाहिए।
संदर्भीय पृष्ठभूमि
सभोपदेशक का लेखक जीवन के मूल सत्य खोजने का प्रयास करता है: समय और अवसरों की सगाई, दुख-खुसी, और मानव सीमाओं का सामना। इस verse में लेखक जीवन के दैनिक सुखों को पवित्रता के साथ स्वीकारने का आह्वान करता है—भोजन,พัก, और प्रसन्नता में भी धर्म-संयम बनाए रखना जरूरी माना गया है। यह किसी असंगत सुख-त्याग का निर्देश नहीं, बल्कि परमेश्वर के उत्तरदायित्वों के साथ संतुलन बनाये रखने की बात है, ताकि कर्मशीलता और विश्वास दोनों क्रमशः जीवित रहें।
व्याख्यात्मक अवलोकन
संक्षिप्त थीमैटिक सूची
अनुषंगिक पाठ्य-पत्र और स्पष्टीकरण
अनुवृत्ति 8:10-12 (सम्बन्धित विचार): जब जीवन में सफलताएं मिलती हैं, तब भी विवेक और परमेश्वर-युगपत नियमों का पालन करना चाहिए—ताकि सुख अंधेरे न बन जाएं।
नीतिवचन 15:15 (सम्बन्ध): दुखी मन के व्यक्ति के लिए एक खुला हृदय और सरलतापूर्ण आस्था आवश्यक है।
निर्गमन 16:4 (सम्बन्ध): देवता के दिन-प्रतिदिन के चमत्कारों पर विश्वास और आशीष पन्नों में जीवन के दैनिक भोजन का महत्व बताता है।
संदर्भ-आंशिक टिप्पणी
इस पाठ के साथ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विचार भविष्य देते हैं:
Henry उद्धृत करते हैं कि परमेश्वर के साथ दैनिकता में आनंद लेना धार्मिक स्वतंत्रता की पहचान है—परन्तु यह विवेकपूर्वक हो। Barnes यह दर्शाते हैं कि स्वाद और आनंद सामान्य जीवन के भाग हैं किन्तु इन्हें लिप्तता और पाप में नहीं बदला जाना चाहिए। Clarke कहते हैं कि खुशी और परिश्रम एक साथ चलते हैं; ईश्वर के प्रति आस्था से ही सुख के मार्ग सुरक्षित रहते हैं।
यदि आप उनसे एक छोटे उद्धरण देखें तो Henry ने कहा है कि ईश्वर के साथ खुशी मनाने से जीवन की विविधता पर प्रकाश पड़ता है; Clarke ने इसे “जीवन के दिनों को उपयोगी बनाना” कहा है।
सीमित व्यावहारिक निष्कर्ष
आज के जीवन में इस वचन से सीख: अपने दिनचर्या में ईश्वर की उपस्थित को स्मरण रखें; भोजन-परिवार-कार्य के बीच संतोषभरी मुस्कान को बनाये रखें; और जहाँ भी आप सफलता पाएं, उसे देव-आशीष और जिम्मेदारी के साथ स्वीकार करें।