Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीएस्तेर 1:21 बाइबल पद की व्याख्या
एस्तेर 1:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यह बात राजा और हाकिमों को पसन्द आई और राजा ने ममूकान की सम्मति मान ली और अपने राज्य में,
एस्तेर 1:21 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एस्तेर 1:21 समानांतर पद और संबंधित वचन
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एस्तेर 2:4 (HINIRV) »
तब उनमें से जो कुँवारी राजा की दृष्टि में उत्तम ठहरे, वह रानी वशती के स्थान पर पटरानी बनाई जाए।” यह बात राजा को पसन्द आई और उसने ऐसा ही किया।

एस्तेर 1:19 (HINIRV) »
यदि राजा को स्वीकार हो, तो यह आज्ञा निकाले, और फारसियों और मादियों के कानून में लिखी भी जाए, जिससे कभी बदल न सके, कि रानी वशती राजा क्षयर्ष के सम्मुख फिर कभी आने न पाए, और राजा पटरानी का पद किसी दूसरी को दे दे जो उससे अच्छी हो।

एस्तेर शीर्षक में एक संकेत: राज़ी की स्वीकृति और उसके कारण
आयत 1:21 में बताया गया है कि राजा ने ममूकान (हाकिम) की सम्मति को मान लिया और अपने राज्य में व्यवस्था उसी के अनुरूप चली। यह छोटा वाक्य बताता है कि सत्ता की निर्णय प्रक्रिया में सम्मानित सलाहकारों की संगति कितनी निर्णायक होती है। यहाँ समीक्षा एक राज्य-नीति की दिशा-निर्देशन के पीछे के धार्मिक-आचारिक आयाम को उद्घाटित करती है: सत्ता और सच्चे मार्गदर्शन का संतुलन।
परिवेशन के अवसर के भीतर यह आयत (चर्चित संदर्भ के साथ)
1:21 में दुहराई गई बात यह है कि राजा ने अपने नियम और राज्य-व्यवस्था की अनुशंसा मान ली। यह दर्शाता है कि सत्ता के निर्णयों में सलाहकारों का प्रभाव कितना प्रबल होता है, और यह भी कि राजा के अंतःकरण में न्याय और विवेचना कहाँ तक शामिल है। यह प्रेरित पाठเมือง-निर्णय के समय में नेतृत्व के लिए एक चेतावनी भी है कि वे अपने निर्णयों में कर्तव्य-परमिश्वर और कानून की धारा को नहीं भूलें।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
राजा-नैतिकता में यह दर्शाता है कि उच्च पदस्थ व्यक्ति को भी सही मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। सही सलाह मिलना, और उसकी मान्यता, एक मजबूत व्यवस्था के निर्माण का आधार बनते हैं। ईश्वर के कारण-निर्देशन की आवश्यकता यहाँ संकेतित है: भरोसा केवल अपनी शक्ति पर नहीं, बल्कि विवेकपूर्ण मार्गदर्शन पर है।
अन्य बाइबिल पाठों से संयोग
- नीति और परामर्श की महत्ता पर उसी प्रकार का संकेत ज्यादातर पदों में मिलता है जहाँ राजा या नेता निर्णय लेते समय विद्वानों की सलाह लेते हैं (उदा. नीति-निर्णय, न्याय-निर्णय के समय परामर्श)।
- प्रेरित लेखन में नेतृत्व और परामर्श के संतुलन का विचार: सत्ता के पथ पर सत्य और न्याय का अनुसरण।
- आस्था-केन्द्रित अनुशासन: नेतृत्व में परमेश्वर की इच्छानुसार कदम उठाने की प्रेरणा।
पसंद और निर्णय का व्यावहारिक अनुप्रयोग
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षिप्त टिप्पणी)
- इतिहास में rulers और सलाहकारों के बीच संतुलन का उदाहरण, जहाँ परामर्श की मान्यता ने नीति-निर्णयों में स्थायित्व दिया।
- प्रेरित लेखन में नेता की आस्था और निर्णय-निर्धारण के बीच समन्वय का संदेश।
व्याख्या: इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि सत्ता के परीक्षण में परामर्श और नीति-धारा को मिलाकर चलना चाहिए, ताकि परिणाम नैतिक और स्थिर रहें।
लघु निष्कर्ष
एस्तेर 1:21 एक सूचक है कि राजसी निर्णयों की सफलता में सामंजस्य और विवेकपूर्ण सलाह कितनी आवश्यक है। लेखन बताता है कि निर्माण-स्तर की व्यवस्था, जब परामर्श सम्मानित और कानून के अनुरूप हो, तब स्थायित्व पाती है।
संक्षिप्त उद्धरण (आधारभूत टिप्पणीकारों से)
यदि उपलब्ध हो, तो नीचे प्रकार दिए गए प्रमुख विचार समूह के भीतर पुरानी प्रस्तुतियाँ से उद्धरण मिलेंगे: “जिनके पास नेतृत्व की कुंजी है, उन्हें विवेक की भाषा बोलनी चाहिए” ((Mathew Henry/Albert Barnes/Adam Clarke से शैलीगत समानता के आधार पर सार-वाक्य))।
संक्षेपण व समाप्ति
यह आयत यह याद दिलाती है कि राज्य-प्रवर्तन और निर्णय लेने में परामर्श की अहमियत बनी रहती है, और परमेश्वर की परख से प्रेरित मार्गदर्शन के साथ ही वास्तविक न्याय संभव है।