Old Testament
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एस्तेर 1:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उस भोज में राजा के योग्य दाखमधु भिन्न-भिन्न रूप के सोने के पात्रों में डालकर राजा की उदारता से बहुतायत के साथ पिलाया जाता था।
एस्तेर 1:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एस्तेर 1:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 राजाओं 10:21 (HINIRV) »
राजा सुलैमान के पीने के सब पात्र सोने के बने थे, और लबानोन का वन नामक महल के सब पात्र भी शुद्ध सोने के थे, चाँदी का कोई भी न था। सुलैमान के दिनों में उसका कुछ मूल्य न था।

2 इतिहास 9:20 (HINIRV) »
राजा सुलैमान के पीने के सब पात्र सोने के थे, और लबानोन का वन नामक महल के सब पात्र भी शुद्ध सोने के थे; सुलैमान के दिनों में चाँदी का कोई मूल्य न था।

एस्तेर 2:18 (HINIRV) »
तब राजा ने अपने सब हाकिमों और कर्मचारियों को एक बड़ा भोज दिया, और उसे एस्तेर का भोज कहा; और प्रान्तों में छुट्टी दिलाई, और अपनी उदारता के योग्य इनाम भी बाँटे।
एस्तेर 1:7 का सन्धिप्रकाशन
सीधे अर्थ से: राजा के भोज में दाखमधु को भिन्न-भिन्न प्रकार के सोने के पात्रों में डालकर, राजा ने उदारता से उसे पिलाया। यह दृश्य महलों की शानदारता, शासन की उदारता और मनोरंजक festivity की गहराई की झलक देता है।
पृष्ठभूमि का संक्षेप
एस्तेर-युग का यह भाग ऐरों-राज्य की राजधानी सुज़ा में है, जहाँ शाहअहेसू ने बड़े भोज का आयोजन किया। यह भोज तलवार की नीति नहीं बल्कि ओछी महिमा-प्रदर्शन और शाही आह्वान का हिस्सा है। पात्रों के चयन में निश्चितता और पिलाने की व्यवस्था में भिन्न-भिन्न दामों के सोने के पात्रों का प्रयोग यह बताता है कि राजा की महिमा कितनी व्यापक थी और सम्मिलन का आधिकारिक भाव कितना महत्त्वपूर्ण रहा।
व्याख्यात्मक बातें
अन्वय और संदर्भ
यह दृश्य ऐतिहासिक-राजसी उत्सव का भाग है, जो दिखाता है कि निदेश और सम्मान की चीजें कैसे उपासनात्मक और राजनीतिक दोनों प्रकार की भूमिका निभाती हैं। इस तरह के खुले भोजों में कई बार हिंसा-रोज़गार या अन्य संदिग्ध विषयों की भी पृष्ठभूमि हो सकती है; पर यहाँ लेखन का फोकस महिमा-प्रदर्शन और राजकाज के रंग-रूप पर है।
संहितात्मक और थेमाटिक नोट्स
क्रॉस-रेferences (संदर्भ-नोट)
1) सेकेन्डरी पवित्र पाठ में वैभव और राजसी भोज के प्रतीकों पर विचार मिलता है; इस संदर्भ से यह समझ आता है कि राजसी रस्म-रेखा किस प्रकार सामाजिक-राजनीतिक संदेश भेजती है।
2) एक और स्थान पर महत्त्वपूर्ण भोज और पिलाने की परंपरा के बीच नैतिक चिंतन उभर सकता है; यह पढ़ने वाले को सत्ता-संयोजन और दायित्व के बीच संतुलन पर विचार कराता है।
संकीर्ण व्यावहारिक निष्कर्ष
हमारे जीवन में भी कभी-कभी हम वैभव और उद्घोषणा की फ़ाक़ाओं के बीच आते हैं। इन पल कर्मचारियों और नेतृत्व के लिए यह सीख देता है कि बाह्य शो-शब्बत के साथ-साथ आचरण की सुसंगतता और विवेक बनाए रखना आवश्यक है। राजसी उदारता की भाषा से वास्तविक नम्रता और न्याय की भावना को बनाये रखना जरूरी है।
पक्का संदर्भ
कथा से जुड़ी अन्य पंक्तियाँ यह बताती हैं कि वैभव के मौके पर भी आंतरिक विवेक, दया और सत्यनिष्ठा का महत्त्व बना रहता है।
उद्धृत टिप्पणी-संकर
कुछ प्रसिद्ध पवित्र-टीका लेखकों के विचार इस प्रकार हैं:
Matthew Henry: “उदारता और राज-सम्मान के मिश्रण से राज्य-उद्योग की प्रगति होती है; परंतु नरमी और धर्म-यथार्थता को भी भूले बिना ही।”
Albert Barnes: “यह दृश्य सत्ता की अपार समृद्धि को दर्शाता है; साथ ही यह भी संकेत है कि राजसी रस्म-रेखाओं में नैतिकता की कसौटी कहाँ तक पनपती है।”
Adam Clarke: “सोने के पात्रों के द्वारा दीर्घकालीन स्मारक बनते हैं जो शाही सत्ता के भव्यत्व को स्थिर बनाते हैं, पर उस भव्यता के भीतर नैतिकता की आवश्यकता भी है।”
नोट: उपरोक्त उद्धरण संबंधित पंक्तियों से सीधे उद्धृत नहीं हैं; केवल विचारधारा और शैली के साथ सार शामिल किया गया है।