Old Testament
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एस्तेर 5:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तो भी जब-जब मुझे वह यहूदी मोर्दकै राजभवन के फाटक में बैठा हुआ दिखाई पड़ता है, तब-तब यह सब मेरी दृष्टि में व्यर्थ लगता है।”
एस्तेर 5:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एस्तेर 5:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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फिलिप्पियों 4:11 (HINIRV) »
यह नहीं कि मैं अपनी घटी के कारण यह कहता हूँ; क्योंकि मैंने यह सीखा है कि जिस दशा में हूँ, उसी में सन्तोष करुँ।

1 राजाओं 21:4 (HINIRV) »
यिज्रेली नाबोत के इस वचन के कारण “मैं तुझे अपने पुरखाओं का निज भाग न दूँगा, अहाब उदास और अप्रसन्न होकर अपने घर गया, और बिछौने पर लेट गया और मुँह फेर लिया, और कुछ भोजन न किया।

एस्तेर 5:9 (HINIRV) »
उस दिन हामान आनन्दित और मन में प्रसन्न होकर बाहर गया। परन्तु जब उसने मोर्दकै को राजभवन के फाटक में देखा, कि वह उसके सामने न तो खड़ा हुआ, और न हटा*, तब वह मोर्दकै के विरुद्ध क्रोध से भर गया।
एस्तेर 5:13 पर यह भाव: व्याक्य और अर्थ
सीधे शब्दों में कहें तो यह वाक्य यह बताता है कि महारानी एस्तेर की उपलब्धि-केवल यह नहीं कि उसने राजदरबार में प्रवेश पाया, बल्कि मोर्देखै के जोखिमभरे उद्धारकारी कदमों के कारण वह अपने मान-सम्मान, ख्याति और सुख-शांति को भी देखते-देखते व्यर्थ समझने लगती है। वह यह कहती है कि उसका सब कुछ मोर्दकै की उपस्थिति के कारण व्यर्थ प्रतीत होता है—यानी उसकी सत्ता, प्रसन्नता और सुरक्षा की परवाह अब एक ही व्यक्ति की देन लगती है।
संदर्भ पृष्ठभूमि
एस्तेर पुस्तक में यह समय मोर्दकै की प्रतिज्ञा और विष्णु-युक्तावधि के बीच के तनाव का है। मोर्दकै की मान्यता, शत्रु हैंडिम-हामन के विरुद्ध बचाव, और एस्तेर की राजदरबार में रहने की विषम स्थिति—ये सब एक साथ कथा को कस कर पकड़ते हैं। यह वाक्य बताता है कि एस्तेर अपने व्यक्तिगत सम्मान और राजसी सुरक्षा के साथ-साथ बहिन-भाई-समुदाय की भयावह स्थिति को लेकर असहज हो उठती है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
संदर्भ पंक्तियाँ (क्रॉस-रेफरेंसे)
1) नीतिसूत्र 3:5-6 की तरह, जहाँ राजा की प्रतिष्ठा और सुरक्षा लोग-समुदाय की स्थिति के साथ जुड़ी होती है; 2) दाऊद की सोच में “क्या मैं इस मोड़ पर हार मान लूंगा?” जैसी चिंता, जो एक स्वतंत्र निर्णय के बजाय भय से जुड़ जाती है; 3) प्रेरित-शास्त्रों में यह विचार आता है कि विश्व-राज्य और परमेश्वर की योजना के बीच संतुलन बनाये रखना चाहिए।
इन क्रॉस-रेफरेंसेस का उद्देश्य यह है कि पाठक देख सके कि भलाई और सुरक्षा के लिए बाहरी सत्ता कितनी निर्णायक बन सकती है, और कब आंतरिक विश्वास अधिक महत्त्वपूर्ण होता है।
संक्षिप्त थीम-सूची
व्यावहारिक निष्कर्ष
जो लोग सत्ता के खेल में फंसे हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि परमेश्वर की दृष्टि से सुरक्षा और सफलता का असली माप उनके विश्वास और धैर्य से जुड़ा है। समय-समय पर हमें यह पूछना चाहिए: क्या मैं अपने समुदाय के लिए सही कदम उठा रहा हूँ, या अपने स्वयं के सम्मान के लिए फंसा हुआ हूँ? यह वचन याद दिलाता है कि भय के कारण निर्णय लेने से बेहतर है कि हम परमेश्वर की दिशा में स्थिर रहें और समुदाय के लिए सही रास्ता चुनें।
तकनीकी नोट
यह टिप्पणी HINIRV अनुवाद के भाव से जुड़ी है और शाब्दिक दायरे में राजा-महिमा और मोर्दकै के बीच की गतिशीलता को ध्यान में रखकर प्रस्तुत है।
पाठ का संक्षिप्त सार: एस्तेर का यह कथन सुंदर ढंग से बताता है कि राजसी आहातियाँ भी एक व्यक्ति की उपस्थिति और बहादुरी से प्रभावित होती हैं, और इस पर विचार करने से पाठक यह समझते हैं कि सचमुच किसके लिए और कैसे जीना है—प्रभु की मार्गदर्शक योजना के अनुसार।