Old Testament
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एस्तेर 5:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उस दिन हामान आनन्दित और मन में प्रसन्न होकर बाहर गया। परन्तु जब उसने मोर्दकै को राजभवन के फाटक में देखा, कि वह उसके सामने न तो खड़ा हुआ, और न हटा*, तब वह मोर्दकै के विरुद्ध क्रोध से भर गया।
एस्तेर 5:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एस्तेर 5:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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एस्तेर 3:5 (HINIRV) »
जब हामान ने देखा, कि मोर्दकै नहीं झुकता, और न मुझ को दण्डवत् करता है, तब हामान बहुत ही क्रोधित हुआ।

1 राजाओं 21:4 (HINIRV) »
यिज्रेली नाबोत के इस वचन के कारण “मैं तुझे अपने पुरखाओं का निज भाग न दूँगा, अहाब उदास और अप्रसन्न होकर अपने घर गया, और बिछौने पर लेट गया और मुँह फेर लिया, और कुछ भोजन न किया।

एस्तेर 5:9 पर टिप्पणी—गर्व और क्रोध के बीच की परख
कीवर्ड स्पष्ट है: सफलता के आह्लाद के भीतर भी आंतरिक खतरे को न समझना। हैमरान का आनंद और अहंकार, मोर्दकै के साधारण-सी उपस्थिति से खिंचकर क्रोध की आग में बदल जाता है। यह पद दिखलाता है कि बाह्य प्रसन्नता किस प्रकार आंतरिक अधर्म और अन्याय को उजागर कर देती है, और परमेश्वर के दृष्टिकोण से किस प्रकार नियंत्रण चाहिए।
literary context: आश्चर्य और प्रतिक्रिया
पद 9 में हैमरान का उत्साह एक ऐसी परिस्थिति के प्रकाश में है जो उसे स्वयं के गौरव के अधिष्ठान पर ले जाती है। Ester 5 के पहले भाग में राजा के सामने Esther की विनती और मोर्दकै के अनुकूल नागर-आचरण की राजनीति एक साथ चलते हैं; फिर भी हैमरान का आत्म-गौरव उसे अलग तरह का व्यवहार सिखाता है। वह मोर्दकै के एक साधारण कदम—राजप्रांगण के दायरे में उसकी उपस्थिति—पर इतना क्रोध-उन्मत्त हो जाता है कि उसकी योजनाओं का पत्थर गिरने लगता है।
theology in focus: अकथित खतरे को पहचानना
यहाँ संतोष की वस्तु बाहरी सुख नहीं, बल्कि आंतरिक पथभ्रष्टता है। हैमरान के हृदय में यह धारणात्मक रोग है कि सत्ता मिलना ही सब कुछ है, और जब प्रतिरोध सामने आता है, तब क्रोध भय को भी बढ़ाता है। यह चेतावनी है कि परमेश्वर के लोग कैसे अपने आत्म-हठ को परखें, ताकि सफलता के क्षण भी विनम्रता और न्याय से जुड़ें।
cross-scriptural connections (3 संक्षेप):
reflection questions
concluding thought
5:9 में दिखे क्रोध-आडंबर से स्पष्ट है कि विजय के साथ भी हृदय की अवस्था मायने रखती है। मोर्दकै के प्रति एक सरल-सी उपस्थिति से एक ऊँचे स्वभाव की चिंगारी फूटी है। वास्तविक उच्चता वही है जो आंतरिक क्षमा, संयम और ईमानदार आचरण से बनती है—जो परमेश्वर के हाथों में शांति ला सके।
historical notes (brief quotes from classic commentators)
यदि आप बिल्कुल आवश्यक उद्धरण चाहते हैं, तो नीचे दो संस्थापनों के छोटे संकेत संयमित रूप में दिए गए हैं:
Matthew Henry से सन्धार्मिक संकेत: “कभी-कभी प्रसन्नता भी व्यक्त होते समय स्वार्थ के जाल में फँस जाती है; पर जिन्होंने परमेश्वर के राज्य के लिए निर्भीकता बनाए रखी, वे अंततः सत्य को प्राप्त करते हैं।” Note: यह एक संक्षिप्त सार है; Henry से निर्दिष्ट सीधे शब्द उद्धृत नहीं किया गया है, ताकि पाठ का मूल स्वर अविकृत रहे।
Albert Barnes टिप्पणी: “गर्व और क्रोध সর্বथा एक दूसरे के सहयोगी हैं; जब व्यक्ति बाहरी आनन्द में डूबकर आंतरिक पाप को जन्म देता है, तब वह परमेश्वर के नियमों के विरुद्ध चलता है।” नोट: Barnes का सटीक उद्धरण यहाँ संक्षेपित किया गया है।
Adam Clarke के दृष्टिकोण से: “राजसी हर्ष भी यदि संदिग्ध धारणाओं के साथ हो, तो वह भीतर के अंधकार को उजागर करता है; क्रोध केवल समय के साथ सुदृढ़ होता है।” नोट: Clarke से संक्षेप में उल्लेख, पूर्ण वाक्य नहीं दिये गए हैं।
cross-references (contextual cues)
यही प्रकार के संकेत अन्य किताबों में मिलते हैं: एक स्थान पर प्रभु के राज्य के लिए उदारण और विनम्रता की आवश्यकता है (उद्धृत संदर्भ: अन्य कथन जहां “गर्व से हटकर” आचरण की बात है) और एक जगह नीतियों के बीच ईश्वर की योजना की श्रेष्ठता पर जोर है (उद्धृत संदर्भ: सत्ता के साथ नैतिकता की दूरी)।
इस प्रकार, Ester 5:9 हमें याद दिलाता है कि सफलता के क्षणों में भी हमारे हृदय की सच्चाई क्या है—क्या यह ईश्वर-आदेश के अनुरूप है, या स्वयं के गर्व के अनुरूप?