Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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यहेजकेल 11:10 का तात्पर्य और पाठ-विन्यास
यह आयत योदा के भाग की प्रमुख घटनाओं के बीच आता है, जहाँ यहोवा के राज्य-न्याय और धारदार सुलहों का अभिनय सामने आता है। यहाँ कहा गया है कि तलवार से मरकर गिरने वाले लोग किस प्रकार से यहोवा के सामने अपना दुष्कर्म स्वीकार करते हैं और उसे साक्षात् प्रकट करते हैं कि वह हूँ, जो न्याय और प्रेरित चेतना का स्रोत है। इस उद्देश्यपूर्ण कथन में यहोवा अपने कर्तव्य-पालन और देश की सीमा-रक्षा दोनों का संयोजन करते हैं, ताकि इजरायल के देश के भीतर और बाहर दोनों जगह उसकी महिमा उजागर हो।
ईश्वर और आस्था के बारे में पाठ का संकेत
इस verses में ईश्वर अपने ज्योति-न्याय की पुनरावृत्ति के साथ प्रकट होता है: लोगों का दमन, प्रतिशोध और उद्धार एक साथ चलते हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि “मैं यहोवा हूँ।” यह संदेश यह भी दिखाता है कि परमेश्वर अपने अनुयायियों के नियमों के अनुसार ही राज्य-संरचना चलाते हैं, और दुष्कर्म के परिणाम शास्त्राणुरूप होते हैं।
शब्दों और प्रतिमाओं की स्पष्टता
अन्य उद्धरण-जोड़
यहाँ चिंतनशील टिप्पणीकारों की मिलीजुली दृष्टि से प्रेरित सार यह है कि परमेश्वर सत्ता-न्याय से पूर्णत: कार्य करते हैं, ताकि दुष्ट भी जान लें कि परमेश्वर ही पूर्ण सत्ता के साथ राजा है।
Related cross-references
1) यहोवा के न्याय और साक्षात्कार का संदेश स्पष्ट करता है—यशयाह 45:23 और रोम 14:11 जैसे विचार इस बात की पुष्टि करते हैं कि हर घुटना झुकना है और हर वचन यहोवा के सामने बोला जाएगा।
2) दंड और उद्धार की योजना एक साथ चलती है—यिर्मयाह 31:18–19 में पुनरुत्थान और पश्चाताप का संयोजन दिखता है।
3) परमेश्वर का एकत्व और राज्य-वैधानिक न्याय—यूहन्ना 5:22, 28–29 के उपयोग से यहूदियों के लिए भी एक चेतावनी और आशा है।
आज के समय में अनुप्रयोग
यह आयत हमें स्मरण दिलाती है कि जीवन-निर्णय और समुदाय के प्रति निष्ठा परख की कसौटी हैं। गलतियों के लिए दंड से भागना संभव है, परंतु विनयपूर्वक आत्म-विश्लेषण और पुनर्स्थापन से परमेश्वर के साथ विश्वास की यात्रा मजबूत होती है। अपने व्यवहार में सत्य, न्याय और दयालुता को बनाए रखें; जो गलत राह पर हैं उन्हें प्रभु की करुणा और सचेतन चेतावनी से सुधारने की प्रेरणा मिले।
नोट: इस पंक्ति पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के मौलिक、公-domain विचारों के संक्षेपण को समाहित किया गया है; नीचे कुछ मूल-उद्धरण भी दिए गए हैं यदि उपलब्ध हों।
कथन-संदर्भ उद्धरण: “तलवार से मरकर गिरोगे”—यह पूर्ण पाठ से संरेखित रूप में पता चलता है कि धर्मी-न्याय और दंड की प्रक्रिया परमेश्वर के शासन का अभिन्न भाग है।