Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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यहेजकेल 11:24 के संदर्भ में अद्यतन टिप्पणी
यहेजकेल 11:24 में लेखक को एक बार फिर आत्मा द्वारा उठाए जाने और परमेश्वर की शक्ति के साथ दर्शन में कसदियों के देश के बन्दियों के पास पहुँचाने का अनुभव मिलता है। यह दर्शन एक विशेष प्रकार का průvas है: यह भविष्य-उद्घाटन नहीं, बल्कि सेवक-आस्था के क्षेत्र में एक परिवर्तनकारी दृष्टि है जो परमेश्वर के उद्देश्यों को उद्घाटित करती है। संदेश यह है कि परमेश्वर अपने सेवकों को समय-समय पर ऐसी स्थितियों में ले जाते हैं जहाँ वे अपनी अवस्था, विलास या राजनीतिक स्थिति से ऊपर उठकर अपने कर्तव्य को समझ सकें।
पाठ में परमेश्वर या विश्वास के बारे में जो खुलासा होता है
इस आयत से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर का सार है—क्योंकि आत्मा की शक्ति से प्रेरित दर्शन नीचे की भ्रांतियों को दूर करती है और उद्देश्य-पूर्ण स्थानांतरित करती है। भौतिक दूरी या कैद की वास्तविकता परिवर्तन नहीं करती कि परमेश्वर का उद्देश्य कठिनाई के बीच भी अपना वचन पहुँचाता है। यहूदियों के दमन के समय भी परमेश्वर की योजना चलती है और उसकी सत्ता वहन करती रहती है।
प्रमुख शब्दों या चित्रों की स्पष्ट व्याख्या
संबद्ध साइटों के बिंदु और संक्षिप्त प्रभाव
यह दृश्य व्याख्या तीन प्रमुख अंशों से जुड़ती है: 1) उद्धार के संदेश के लिए प्रेरणा—जहाँ भी परमेश्वर भेजता है, वहाँ उसकी योजना स्पष्ट होती है; 2) कैद में भी नयी स्थिति और आशा संभव—विपत्ति के बीच भी जीवन-संवेदना जागृत होती है; 3) दर्शन का क्षणिकपन—सीख महत्वपूर्ण है, भले ही दृश्य स्थायी न हो।
क्रॉस-रेफरेंस और उनके अर्थात्मक संबंध
1) निर्गमन 3:12 के संदर्भ में प्रभु का आश्वासन—यद्यपि वह स्वयं के निकट है और शक्ति देता है, किन्तु उसकी महिमा समय-समय पर विशिष्ट बुलाहट के साथ प्रकट होती है।
2) इफिसियों 1:17-19—आत्मा की प्रबल कृपा से ज्ञान और गोलाई के साथ ईश्वर की महिमा को पहचानना।
3) दानियेल 10:8-9—आत्मा-साक्षात्कार के बीच संघर्ष और फिर दर्शन का उद्घाटन, जो विश्वासियों को धैर्य और प्रतीक्षा सिखाता है।
आज के जीवन पर अनुप्रयोग
- कठिन परिस्थितियाँ आते समय भी भरोसा बनाए रखें कि परमेश्वर की आत्मा उद्धार और मार्गदर्शक बनकर हमें सही दिशा दिखाती है।
- दृष्टि क्षुद्र स्थितियों के कारण लोप हो जाए, फिर भी सीख और उद्देश्य स्मरण रखें; ईश्वर के समय पर विश्वास रखें।
- दूसरों के कैद-घर में भी कार्य करें: दया, सहायता और प्रेरणा के साथ उन्हें नई उम्मीद दें।
नोट: इस पाठ पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke की प्रसिद्ध टिप्पणियों से सम्मिलित संक्षिप्त विचार नीचे उद्धृत हैं:
“The Spirit lifted me up”—Henry कहते हैं कि यह दिव्य प्रेरणा का आह्वान है जो भविष्यवक्ता की स्थिति को पवित्र दायरे में ले जाता है।
“By the Spirit’s power”—Barnes यह संकेत करते हैं कि वास्तविक ज्ञान परमेश्वर की शक्ति से आता है, न कि मानवीय कल्पनाओं से।
“And the vision so seen departed”—Clarke इस विभाजन को देखने पर यह उद्घाटन करते हैं कि दर्शन स्थायित्व नहीं बनाता; परन्तु शिक्षा और उद्देश्य वही रहते हैं।