Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेजकेल 12:9 पर टिप्प्णी (HINIRV अनुवाद)
यह अध्याय यहेजकेल की एक कठोर समयावधि के भीतर का हिस्सा है जब राज्य-व्यवस्था में अस्थिरता और असफलताओं के बारे में परमेश्वर अदालत की तटस्थ चेतावनियाँ दी जा रही थीं। यहाँ यह प्रश्न उठता है कि इस्राएल के घराने के विरुद्ध होने वाले आक्रमण, भ्रमण या बलवा के समय वे क्यों नहीं पूछते कि “यह तू क्या करता है?” यह वचन परमेश्वर की ओर से शासन-व्यवस्था और नियुक्त संदेश का आह्वान है: परमेश्वर के दायित्व और भविष्यसूचना को समझना चाहिए न कि मानव-व्यवस्था के अनुसार आत्म-नियमन से बचना।
पद की लंबी धारणा और अध्याय पर संदर्भ
पद 9 एक ऐसी स्थिति को उजागर करता है जहाँ ईश्वरीय निर्देशों से विचलित होकर लोगों ने परिस्थितियों को समझने या समाधान ढूंढ़ने के बजाय शरारतपूर्ण या अविचारपूर्ण व्यवहार अपनाया। यह तेज़ी से गिरती सामाजिक-धार्मिक संरचना के बीच एक पुकार है कि वह जो कुछ किया जा रहा है उसे सही तरीके से पूछे और जान सके कि परमेश्वर क्या कह रहा है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अनुसंधानात्मक तुलनात्मक संदर्भ
– उदाहरण के तौर पर, योशुआ 7 में एहति के प्रकार के बारे में विचार—जहाँ लोगों ने भीड़ के दबाव में परमेश्वर के निर्देशो के प्रति अस्पष्टता दिखायी।
– प्रमुख प्रेरणा के रूप में दानत-उद्धार की अपेक्षा: इतिहास में जब लोग “यह तू क्या करता है” पूछते हैं, तब उद्धार के मार्ग स्पष्ट होते हैं।
– भविष्य संदेश का प्रमाण: यहोवा के संदेशों के साथ कोर लय बार-बार दिखाई देती है कि क्या किया जाए और कब।
कठोर आवेदन
1) आलोचनात्मक आत्म-मालिक को याद रखें: आप जो करते हैं, उसके पीछे उद्देश्य क्या है और क्या यह परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप है? 2) परिस्थिति-वार जाँच: कठिन समय में भी पूछना न भूलें—“यह मैं क्यों कर रहा हूँ? क्या यह विश्वास-भंग नहीं है?” 3) समुदाय के लिए उत्तरदायित्व: अपने作 से समुदाय को संकेत दें कि परमेश्वर की योजना क्या है, न कि केवल परिस्थिति के कारण भागने का प्रयास करें।
छोटे cross-references
– यहेजकेल 3:17: परमेश्वर के संदेशवाहक की जिम्मेदारी को याद दिलाता है कि विरोधी स्थितियों में भी सत्य बोलना।
– इब्रानियों 3:7-8: आज यदि आप सुनें तो नरम बनें; विश्वास में डगमगाने से बचें।
– यशायाह 6:8-9: यह भी एक आह्वान है कि ईश्वर की बात सुनने के बावजूद लोग न समझ पाएं।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यहेजकेल 12:9 एक आंतरिक प्रश्न है जो यह दर्शाता है कि संकटों के बीच भी ईश्वर के मार्ग पर चलना है या नहीं—“यह तू क्या करता है?” इस प्रश्न से प्रेरित होकर पाठक अपने आचरण और उद्देश्य का पुनः मूल्यांकन करें, ताकि परमेश्वर की योजना के अनुसार जिन्दा जीवन जिया जा सके।
नोट: नीचे दिये गए तीन प्रसिद्ध सार्वजनिक-उद्धरणकर्ता (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke) के स्पर्श-उद्धरण विशिष्ट रूप से उद्धृत हैं जब उपयुक्त हों।