Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेजकेल 12:19 — इस verse का महत्व
यह पाठ हमें बताता है कि परमेश्वर के संदेश का प्रभाव कैसे सत्ता और शांति से विर्न हो सकता है जब लोग अपनी सुरक्षा-चिन्ताओं में उलझ जाते हैं। इस वचन में देश के निवासियों को उनके भाग्य के बारे में स्पष्ट चेतावनी दी जाती है: वे अकाल-घटाओं के कारण खाने-पीने की असुरक्षितता अनुभव करेंगे, क्योंकि उनकी भूमि अस्वस्थ होकर सभी प्रकार के उपद्रवों से खाली हो जाएगी। यह हिदायत यह दिखाती है कि परमेश्वर के इरादे के बिना भूख, पानी और जीवन की बुनियादी जरूरतें भी दूसरों के लिए ही नहीं बल्कि अपने लिए भी चिंता का कारण बन जाती हैं।
पार्श्व संदर्भ और मूल संदर्भ
यहेजकेल के समय यरूशलेम और इस्राइल के देश के भीतर अत्यधिक अस्थिरता और आक्रामक व्यवहार के कारण परमेश्वर ने नापसंद घटनाओं का संकेत दिया था। नबी यहेजकेल के द्वारा दिये गये दुष्कृत्यों और आत्मकेन्द्रित जीवनशैली के चलते परमेश्वर की उपस्थिति से देश मुँह मोड़ चुका था; परिणामस्वरूप भूखे-पीले और भयभीत निवासी दिखाई दे रहे थे। इस संदर्भ में यह verse एक विशिष्ट चरित्री चेतावनी है कि यदि लोग दुष्कर्मों से पलट नहीं पाए तो वे अपने ही अस्तित्व के लिए खतरा उठा बैठेंगे।
मुख्य संदेश
सार यह है: परमेश्वर की शिकायतें और चेतावनियाँ ध्यानपूर्वक सुनने पर भी पालन नहीं किए जाते तो देश उस परिस्थितियों में फंस जाएगा जिसमें उनकी रोटी और पानी भी असुरक्षित हो जाएँ। यह दायित्व है कि लोग परमेश्वर के निर्देशों के अनुसार न चलकर अपने तात्कालिक स्वार्थ और सामाजिक-आर्थिक दबावों में फँस जाते हैं, जिसका परिणाम व्यापक उपद्रवों के रूप में निकलता है।
धर्मग्रंथीय ठहराव और प्रेरणा
यह verse उन प्रमुख थीं जहाँ न्याय के साथ दया और चेतावनी एक साथ चलती हैं। यह दिखाता है कि परमेश्वर न केवल निर्णय सुनाता है बल्कि वह अपने लोगों के लिए मार्ग भी बनाता है—यदि वे उसे समझेंगे। भूख-पीड़ा के माध्यम से—एक बार फिर—आत्म-नियंत्रण और विश्वास की परीक्षा होती है।
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप में) और उनके अर्थ
इन क्रॉस-रेफरेंसों से स्पष्ट होता है कि भूख की चिन्ता केवल शारीरिक अर्थ में नहीं, बल्कि परमेश्वर की उपस्थिति से ही सत्यान्वेषण और जीवन के स्रोतों की समझ में है।
आध्यात्मिक छोटे-से-व्यवहारिक निष्कर्ष
यात्रा के कठिन समय में हमारा पहला भरोसा परमेश्वर पर होना चाहिए। अगर हम अपनी जरूरतों को परमेश्वर की आज्ञाओं के अनुकूल ढालते हैं, तब भी कठिन परिस्थितियाँ आयें, पर परमेश्वर की कृपा बनी रहती है। यह verse एक ईमानदार आत्म-समीक्षा का अवसर है: क्या हम अपनी सुरक्षा-चिंताओं के सामने परमेश्वर के निर्देशों को प्राथमिका देते हैं, या मानव सहायता की ठहराव में खो जाते हैं?
छोटा-सा डिवोश्नल विचार
आज आप जिस देश-समुदाय या परिवार के भीतर हैं, वहाँ से यह संदेश लें: परizस्थ स्थिति में भी परमेश्वर की रज़ा के अनुसार व्यवहार करें; भोजन और पानी जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए विश्वस्त स्रोतों के साथ-साथ प्रार्थना और भरोसे को भी बनाये रखें। आपातकाल के दिन भी ईमानदारी, साहस और एक-दूसरे की सहायता से जीवन को संजो सकते हैं।
संक्षिप्त उद्धरण प्रविष्टियाँ
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक डोमेन टिप्पणीकारों के कुछ स्पष्ट शब्द सीधे उद्धृत नहीं किये गए हैं, पर उनके विचारों के समेकन से ऊपर दिए सार को विकसित किया गया है।