Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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हेमनुष्य के सन्तान चिल्लाओ: यहेजकेल 21:12 का एक गहन अभिशंषा-आधारित संदेश
इस पद में यहोवा यह स्पष्ट करता है कि यह्रेल के प्रधानों पर आए संकट के समय उनके आक्रांतियों के विरुद्ध सजग होकर चिल्लाने की आवश्यकता है। यह कहावत नहीं, बल्कि एक आह्वान है कि नीति-निर्देशन के अभाव में युद्ध और तलवार का शासन टूटेगा। चिल्लाहट और हाय-हाय से यह प्रकट होता है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए न्याय और शासन के सही मानकों की मांग कर रहा है।
पाठिकीय संदर्भ के भीतर उसका अर्थ
यहहेजकेल 21:12 में "चिल्ला, और हाय, हाय" एक विधानात्मक भाव है जो घोर संकट के क्षणों में घेरे हुए समुदाय के लिए प्रार्थना-आभासी पुकार को दर्शाता है। यह बताता है कि तलवार के आक्रमण का समय आने पर आंतरिक दोष, नेतृत्व-घटकता और राजनीतिक अस्थिरता का प्रत्यक्ष प्रभाव झेलना पड़ेगा। साथ ही, "मेरी प्रजा" और "मेरे सारे प्रधान" के बीच के विभाजन से संकेत मिलता है—यद्यपि लोग एक साथ नहीं चले, पर परमेश्वर के न्याय के समक्ष सबको वही निर्णय मानना होगा।
धार्मिक-केन्द्रीय विचार
इस संदेश में दो प्रमुख बिंदु उभरते हैं: पहली, प्रभु के न्याय के दिन आ रहा है जिसमें मनुष्यों के नीति-निर्माण के मानक कमजोर पड़ते हैं; दूसरी, परमेश्वर के हित के लिए जागरूक रहना और अपने नेतृत्व के गलत रास्तों पर परखना। यह संदेश केवल राजनीतिक अस्थिरता पर नहीं, बल्कि प्रधानों की पथभ्रष्टता पर भी टिप्पणी करता है, ताकि ईश्वर के काम में पवित्रता और एकता बनी रहे।
पवित्रशास्त्रीय संबद्धता
- एकतानंदित चित्त के बारे में इशारा: यहेजकेल में भविष्यद्वक्ताओं का आह्वान समुदाय को उनके दोषों के प्रति सचेत करने के लिए होता है।
- न्याय और शास्त्रियों के कर्तव्य के बारे में शिक्षा: नेताओं के पथ पर न्याय की दृष्टि रखना अनिवार्य है, ताकि समाज में सही शासन संभव हो।
- परमेश्वर की प्रजा के लिए दशा-निर्णय: दिव्य निर्णय के समय एकता और परमेश्वर-आडंबर से दूर रहते हुए उसके मार्ग पर चलना अनिवार्य है।
आध्यात्मिक परावर्तन के प्रश्न
दृष्टांत-निष्कर्ष
यहेजकेल 21:12 हमें याद दिलाता है कि प्रजा और प्रधानों के बीच ना तो शक्ति-शांति की जगह रहती है, न ही नीति-निर्माण के मानक से परे रहना सुरक्षित है। परमेश्वर न्यायी है; दुख की घड़ी में भी वह पथ-निर्देशन देता है और अपने लोगों को सचेत रहने की सीख देता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त संकेत और अर्थ)
- यहेजकेल के अन्य भागों में विक्षोभ और न्याय का भाव बारंबार आता है; यह जोखिम बताने के साथ प्रार्थना-आह्वान भी बढ़ाता है।
- परमेश्वर के शासन के विरुद्ध ताकतों के प्रतिरोध और अंत में उसकी योजना का पूर्ण मिलन होने के संकेत दिखते हैं।
- न्याय के दिन सच्चे नेतृत्व के मानक स्पष्ट होंगे, और दुष्ट शासन का विच्छेद होगा।
महत्वपूर्ण उद्धरण चेतावनी
इस commentary में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विशिष्ट उद्धरणों के हिस्से सीधे उद्धृत नहीं हैं; आवश्यकता पड़ने पर उनके विचारों से संक्षेप में प्रेरणा ली गई है (जिनमें उनके प्रसिद्ध शब्द सीधे शामिल नहीं हैं)।