Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेजकेल 21:25 — तत्काल संदर्भ और अर्थ
यह मुक़ाम यहेजकेल के दूताधिकारी के समय का है, जहाँ परमेश्वर के संदेशवाहक भविष्य की कड़वी सजा का उद्घोष कर रहे हैं। प्रेरितों के समान नहीं, परन्तु जीवन के अस्थिर मानकों के बीच यह संदेश अटल ईश्वरीय न्याय की गूंज है। इस verse में दुष्ट प्रधान के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है: “तेरा दिन आ गया है; अधर्म के अन्त का समय पहुँच गया है।”
ईश्वर का चरित्र और विश्वास की शिक्षा
इस वाक्य में परमेश्वर की his sovereignty और न्याय के प्रति बोध प्रकट होता है। यह संकेत देता है कि परमेश्वर समय को नियंत्रित करते हैं और कुचक्र तथा अत्याचार पर अन्तिम निर्णय लेते हैं। उद्धार के मार्ग में विश्वासियों के लिए यह चेतावनी भी है कि वे दुष्टता के विरुद्ध सतर्क रहें और ईश्वर के सत्य-पर नियंत्रण बनाये रखें।
शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
— “दिन आ गया है”: एक निश्चित समय का उद्घोष, अचानक और निर्णायक पलों की ओर संकेत।
— “अधर्म के अन्त का समय”: एक पूर्णता, जहाँ दुष्ट कार्यों का प्रभाव और परिणाम समाप्त होते हैं।
संबद्ध पाठ और उनका संक्षिप्त संकेत
1) यिर्मयाह 6:15 में ऐसे समय की चिंता मिलती है जब गैर-न्यायप्रियता के बावजूद लोग कटाक्ष करते हैं; यहाँ भी परमेश्वर के दिन का स्पष्ट आना बताता है कि ताकतवरों पर न्याय होगा।
2) दान 12:4 में प्रेरणा मिलती है कि भविष्य के रहस्यों को परमेश्वर खोलेंगे, किन्तु जो दुष्ट हैं उनका अन्त भी निश्चित है।
3) प्रकाशितवाक्य 19:11-16 में न्याय और युद्ध दोनों साथ चलते हैं; यहाँ यह संकेत है कि परमेश्वर का निर्णय इतिहास की धारा को मोड़ देता है।
प्रमुख शब्दार्थ टिप्पणी
यहेजकेल में “दिन” पारंपरिक घटना-समय का प्रतीक है—ऐसा समय जब दुष्ट के शासन का अन्त और न्याय का आगमन होता है। “अधर्म के अन्त” से तात्पर्य है दुष्ट के कार्यों की पूर्ण परिणति, जो अंततः ईश्वरीय न्याय के सामने टिक नहीं पाते।
आज के संदर्भ में उपयोगी बिन्दु
क्रॉस-रेफरेंसेस
— पास्टर-स्टाइल टिप्पणियाँ यह दिखाती हैं कि परमेश्वर के न्याय के दिन के आने पर पाप का अंत होता है, और भक्तों के लिए स्थिर आशा रहती है।
— यह संकेत देता है कि केवल ईश्वर के निर्णय ही सत्य होते हैं; हमारे संस्मरण और चिंतन इस दिशा में बनें रहें।
एक समेकित निष्कर्ष
यह वाक्य परमेश्वर के न्याय की भरोसेमंद वास्तविकता को प्रगट करता है: समय का क्रम ईश्वर के नियंत्रण में है, और दुष्ट के शासन का एक दिन फलीभूत हो कर समाप्त होता है। विश्वासियों को इस संदेश से प्रेरणा मिलती है कि वे सत्य और पवित्रता के मार्ग पर टिके रहें, क्योंकि न्याय का दिन निश्चित है और ईश्वर की योजनाएं कुशल‑पूर्वक पूर्ण होंगी।
महत्वपूर्ण उद्धरण-धारा (अगर उपलब्ध हो): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke की संक्षिप्त पंक्तियाँ पाठ के साथ आवश्यकतानुसार संदर्भित की जा सकती हैं, पर यहाँ उनकी पूर्ण उद्धरण नहीं दी गयी हैं ताकि पाठ पहले पाठक के लिए प्राकृतिक बना रहे।