Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेजकेल 21:28 का सरल और संपूर्ण अर्थ
इस पद का मूल संदेश है: प्रभु यहोवा यह कहता है कि अम्मोनियोँ के विरुद्ध एक निर्णायक आक्रमण और न्याय का संकेत है—तलवार जैसे तेज, घात के लिए उभरी, प्रकाश की तरह चमकने वाली एक तलवार जो नष्ट करने के लिए है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह यहेजकेल की पुस्तक की एक भागीदारी भाषा के साथ आता है जो महाद्वीप के मानवीय आचरणों और समुदायों के बीच सत्ता-चक्र के कारण होने वाले बंधन-नाश को दर्शाता है। परमेश्वर का संदेश ऐसे समय में आता है जब इज़राइल और उसके पड़ोसी राष्ट्रों के बीच संघर्ष तेज था, और नापसंद व्यवहार, बदनामी और बलपूर्वक आक्रमण का कारण बन रहा था। यह उद्धारक-उद्धार की आशा पर केन्द्रित न होकर एक न्यायपूर्ण निर्णय की भूमिका दिखाता है: एक ऐसी ताकत जो अत्याचार और दुष्कर्म के परिणामस्वरूप उठती है।
interpretive observations
थीमैटिक संकेत
अन्य संदर्भ और उनका संक्षेप
यहोवा के न्याय की प्रतीकात्मक भाषा यह दिखाती है कि शत्रुओं के विरुद्ध प्रभु निर्णायक कदम उठाते हैं। उदाहरणार्थ अन्य संस्थित शब्दों में भी तलवारें और जलते हुए प्रकाश का चित्रण न्यायपूर्ण शासन के संकेत माने गये हैं। यह प्रत्यक्ष संदेशन धारणा इस बात को भी पुष्ट करती है कि परमेश्वर अन्याय को अनदेखा नहीं करता; वह उसे पहचानता है और समय पर निर्णय लेता है।
गूढ़ उद्धरण (शास्त्रीय टिप्पणीकारों से संक्षेप)
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke आदि के प्रभावी दार्शनिक-टीका से मिलते-जुलते निष्कर्ष इस प्रकार हैं: यह संदेश यह दर्शाता है कि दुष्ट आक्रमणकारियों के विरुद्ध परमेश्वर की तलवार एक न्यायपूर्ण हाथ है जिसे वह अपनी योजना के अनुसार चलाता है; न्याय के साथ दया और सुधार के अवसर भी रहते हैं। (मर्यादित उद्धरणों के अनुसार)
संक्षिप्त क्रॉस-रेफरंस
1) पूर्व के न्याय के संकेत—क्रोध और उद्धार का दोनों पहलू साथ चलते हैं; 2) भविष्य की प्रतिज्ञा: परमेश्वर की योजना में न्याय के साथ आशा का संदेश भी है; 3) पथ-चयन: भय के स्थान पर परमेश्वर के साथ संयम और अनुरोध की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
यह यूं संकेत करता है कि खतरे और अत्याचार के समय विश्वासियों को साहस और न्याय के पक्ष में स्थिर रहना चाहिए। परमेश्वर की चिताओं से डरना व धोखाधड़ी से दूर रहना सीखना आवश्यक है। न्याय का कार्य होने पर भी ईश्वर की करुणा और सुधार का अवसर बना रहता है, इसलिए मातृ-प्रकृति में परिवर्तन की दिशा में आह्वान को स्वीकारना चाहिए।