Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48



यहेजकेल 35:14 का संदर्भ और दृश्य-समझ
यह अध्याय यहोवा के न्यायी निर्णय की पंक्ति स्थापित करता है: इज़राइल के पड़ोसी परन, विशेषकर אדम औरेष (एडोम) पर परमेश्वर की धारणा है कि उसका गढ़ा-गुड़ा आतंक, घमंड और शत्रुता उसे अधमरा कर देगी। 35:14 में परमेश्वर यहोवा कहता है कि जब पृथ्वी भर में आनंद और उठान-खुशी का माहौल होगा, तब मैं तुम (एडम) को उजाड़ दूँगा। यह संदेश ऐतिहासिक संदर्भ में एडोम के शत्रु-भाव, जलन, और नफरत के कर्मों के प्रति ईश्वर के न्याय का संकेत है, जिससे राष्ट्रों के बीच ऊँच-नीच के बजाय ईश्वर की विमान-न्याय साफ-साफ दिखती है।
केंद्रीय अर्थ
कथन यह बताता है कि परमेश्वर की इच्छा केवल व्यवहार-जनित उन्नति का आनंदित क्षण नहीं बल्कि उन गलत-निर्णयों के परिणाम की प्रतिक्रिया भी है। एडोम की स्थिर घमंड, परिश्रमी परिवारों के बीच शत्रुता, और अपने पड़ोसियों के बारे में असहिष्णु रवैया—इन सब का प्रभाव अंततः पृथ्वी के समृद्धि-उत्सव के वातावरण में भी दिख सकता है। यह चेतावनी है कि ईश्वर का न्याय हर तरह के अन्याय, दमन और उनके परिणामों को मापेगा, भले ही लोग खुशी-खुशी जीवन बिता लें।
दो/तीन प्रमुख विषय
संबद्ध अंश/अन्य पदों के संदेह-योग
1) यहेजकेल 25:12-14 में ईश्वर एडोम के लिए कठोर निर्णयों की पुष्टि करते हैं, यह बताता है कि पड़ोसियों पर किये गए दमन के कारण ही वह ऐसी सजा पाता है।
2) पतरस 3:9-10 का विचार यह दर्शाता है कि प्रभु की धैर्यपूर्वक इच्छाशक्ति से लोग सचेत रहते हैं; परन्तु दुष्ट कर्मों के परिणाम भी सामने आते हैं।
3) यशायाह 14:4-23 में भी स्व-गौरव और दमन के विरुद्ध ईश्वर की कटुता दिखती है, जो संसार के ठहराव नहीं बल्कि न्याय की मांग को प्रतिध्वनित करता है।
व्यावहारिक विचार
हम अपने जीवन में तब भी पवित्रता बनाए रखें जब समाज में खुशी और सफलता की धारा तेज हो। किसी के ऊपर अन्याय करने or घमंड दिखाने से बचें, क्योंकि परमेश्वर के न्याय की घंटी कभी धीमी नहीं होती। यदि हम अपने भीतर दमन और घमंड की प्रवृत्ति को संतुलित करें, तो भी समाज-उत्थान के बीच में भी नम्रता, करुणा और सत्यापित प्रेम बना रहेगा।
क्रॉस-रेफरेंसेज और उनके संबंध
- यहेजकेल 25:12-14: एडोम के विरुद्ध ईश्वर की करारी सजा का संदर्भ; यह हमारी उपरोक्तव्य रणनीति में बताये गए न्याय के सिद्धांत को पुष्ट करता है।
- यिर्मयाह 49:7-22 (एडोम के बारे में अन्य भाग): घमंड और दमन की प्रवृत्ति पर ईश्वर की प्रतिक्रिया का समान तर्क देता है।
- रोम 12:17-21: दुष्टीकरण के बजाय विश्वास-आचरण और शांति-सी राजनीति पर जोर देता है; प्रतिद्वंद्विता के समय भी प्रेम की राह अपनाने की प्रेरणा मिलती है।
संक्षिप्त समापन
यहेजकेल 35:14 यह स्मरण कराता है कि खुशी और समृद्धि के क्षणों में भी परमेश्वर की न्याय-नजर से भागना संभव नहीं। एडोम के विरुद्ध की गई सजा एक चेतावनी है—घमंड, दमन और बदनामी के मार्ग पर चलना अत्यंत महंगा पड़ सकता है। यदि हम ईमानदारी से अपने जीवन में प्रेम, नम्रता और करुणा को विकसित करें, तो न्याय के साथ-साथ दयालुता भी फलती-फूलती रहेगी।