Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48



यहोवा के न्याय का प्रतिशोध: यहेकेल 35:6 की व्याख्या
मुख्य विचार: इस दृष्टांत में परमेश्वर यहोवा अपने शत्रुओं के प्रति कठोर न्याय की निष्ठुरता को स्पष्ट कर रहे हैं। इस इशारे से पता चलता है कि उसने सीमा और दायित्वों के उल्लंघन पर सुरक्षा नहीं छूटती, बल्कि अत्याचार के प्रतिफल के रूप में उसकी कृपा और न्याय एक साथ क्रियाशील होते हैं। खून-पथकृया और हत्या जैसी गम्भीर करतूतों के फलस्वरूप परमेश्वर दोषियों पर कठोर दंड लगाने का निर्णय लेते हैं—यह युग-युग के लिए चेतावनी स्वरुप है कि धर्म-विरोधी कार्यों का परिणाम अवश्य आता है।
पाठ-संदर्भ: पाठ के साहित्यिक संदर्भ और सम्वाद
यहोवा के वचन में यहेकेल यहूदियों के नैतिक पतन के समय बोलते हैं—यह पवित्र देश के अभिशाप और पड़ोसियों के अत्याचार के सन्दर्भ में है। इस आशीर्वचन में शत्रु राजा और विरुद्धों के प्रति क्रोध उभरकर आता है, जो मार्गदर्शक रूप से यह बताता है कि परमेश्वर की न्याय-अधिकारिता किसी भी पक्ष को नहीं छोड़ती।
धारणात्मक महत्व
1) न्याय के नियम: बहादुरी से गलत कार्यों पर चोट पहुँचती है; यह न केवल अपराधी के लिए बल्कि सामाजिक स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक है। 2) चट्टानी आस्था के सामने दण्डित होना: परमेश्वर के सिंहासन पर न्याय का खयाल है कि वह निर्दोषों की रक्षा कर रहे हैं, और दुष्टों के अपराधों का परिणाम उनको भी भुगतना पड़ता है। 3) प्रेरणा का स्रोत: यह चेतावनी उन्हें अपनी आचरण-रेखा को उन्नत करने के लिए उकसाती है कि वे धर्म-निष्ठा और नैतिकता के प्रति सचेत रहें।
सूत्रधार-आधार (आधारभूत विचार)
सामान्य यह है कि प्रलयकारी दंड उन बातों का परिणाम है जिनमें हत्या-आचरण का खुलेआम प्रदर्शन और bloed–खून के प्रति असंवेदना दिखाई देती है। यहोवा की शासकिय सत्ता अन्याय पर रोक लगाती है और दुष्टों के लिए एक ठोस चेतावनी बनती है।
क्रॉस-रेफरेंस और उनके कारण
इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर के न्याय में सावधानी और सचेतनता का महत्त्व है—जो समाज के समतामूलक और निष्पक्ष भागीदारी को बनाए रखता है।
परिचर्चा के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
यहेकेल 35:6 में परमेश्वर के न्याय का स्पष्ट संकेत मिलता है: अपराध और अत्याचार का परिणाम अवश्य आता है और यह चेतावनी देती है कि सत्य और न्याय के मार्ग से विचलन शांति और समाज की सुरक्षा को खतरे में डालता है। बाइबल के पूर्व-स्तर के उद्धरणों में भी न्याय की यह धारणाएं बार-बार आयीं हैं—यही कारण है कि परमेश्वर का आदेश है कि हम असत्य, हिंसा, और हत्या से दूर रहें और दया, न्याय के साथ रहते हुए समुदाय को सुरक्षित बनाएं।
सीधी उद्धरणों के लिए महंथी टिप्पणीकारियों के मानक से यह स्पष्ट है कि यह नज़रिया उनका नहीं—बल्कि परमेश्वर के कारणों की गहराई से निकटता दर्शाता है।