यहेजकेल 35:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तुमने अपने मुँह से मेरे विरुद्ध बड़ाई मारी, और मेरे विरुद्ध बहुत बातें कही हैं; इसे मैंने सुना है।

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यहेजकेल 35:13 पद-दर-पद बाइबल टीका

यहेजकेल 35:13 — अपनी जुबान से यीशु-प्रकृत विरुद्ध बड़ाई

इस पद में ईश्वर यहूदियों के स्थान-धर्मी उग्रता और पड़ोसी देशों के दुष्प्रचार के बीच एक कड़ा उद्घोष है। माऊसी तौर पर कहते हैं: तुमने अपने मुँह से मेरे विरुद्ध बड़ाई मारी, और मेरे विरुद्ध बहुत बातें कही हैं; इसे मैंने सुना है। यहाँ परमेश्वर यह बताता है कि अत्याचार, ईर्ष्या और हेरफेर से भरे शब्द कान के भीतर पहुँचे हैं और उनके कारण तौहीन का दायरा व्यापक है। परिणामस्वरूप एदल-नुकसानों के बजाय खुद अमेरिका-नुकसान नहीं, बल्कि उनके अपने हृदय की आवाज की भारी जिम्मेदारी है। यहधर्म के विरुद्ध आरोप-प्रचार, राष्ट्र-नीति या युद्ध-चक्र के पीछे छिपे अहंकार को उजागर करता है और यह संकेत देता है कि परमेश्वर अत्यंत संज्ञानशील हैं और अपने लोगों के बोल-चाल पर भी दृष्टि रखते हैं।

साहित्यिक संदर्भ (संदर्भ-संयोजन)

येशायाह और अन्य नबी-कथा में भाषण की शक्ति का संकेत है कि शब्द एक बार फूटने के बाद लौटकर उसी स्रोत की ओर लौटते हैं। यह akụkọ यहूदा-फरीसियों के समय से मिलता-जुलता है, जहां विरोधी शक्तियाँ अपने मुँह से विष-वचन चिपकाती थीं, परन्तु ईश्वर विश्वास के विरुद्ध नहीं। इस विभाग में इस वचन के आसपास यहोवा के न्याय और पवित्र दया के बीच संतुलन स्पष्ट है: पाप की बड़ाई पर कठोरता है, परन्तु संशोधन और उद्धार की संभावना भी बनी रहती है।

शास्त्रीय महत्व

यह अध्याय यहूदियों के लिए चेतावनी संदेश है कि शब्द-चिह्न और कथन की शक्ति कितनी बड़ी होती है। मुँह से निकलने वाला वाक्य हमें यह सिखाता है कि विचार-चेतना और बोली के प्रति सावधानी आवश्यक है। परमेश्वर शब्द के प्रति अटल हैं और वह उन लोगों के शब्दों को सुनते हैं जो उसके विरुद्ध ऊँचे शब्द बोलते हैं; परन्तु वही यह भी दिखाता है कि परमेश्वर सत्य के साथ है और वह अपने नाम के सम्मान के लिए कदम उठाते हैं।

पवित्र शास्त्र के साथ संबंध

- पवित्र शास्त्र के दूसरे भागों में भी शब्द की अहमियत का संदेश है: मुँह से निकला अदृश्य असर डालता है, समाज-नियमन बनता है, और कभी-कभी कृपापात्रता के साथ नहीं बल्कि न्याय के साथ।

धार्मिक-संबद्ध प्रश्न

  • आपके शब्द किस प्रकार ईश्वर के सम्मान या अपमान को दर्शाते हैं? क्या आप अपने बोलने में सदा सत्य और निष्कपटता चुनते हैं?
  • कौन से उदाहरण आपके जीवन में शब्दों के परिणामों के बारे में उदाहरण हैं जिनसे आपने सीखा है कि बोली कैसे आशीष या शाप बन सकती है?

cross-references (संक्षेप)

- याकूब 3:5-6: वाणी की छोटी ज्वाला कितनी बड़ी सभ्यता जला देती है; यह संदेश इसी धारा को पुष्ट करता है कि बोल-चाल की कुछ चेष्टाएं सीधे तौर पर जीवन-यात्रा को प्रभावित करती हैं।
- रोम 12:14: विपत्ति में भी आशीर्वाद की कामना रखना सीखना; यह सिद्धांत यह दिखाता है कि कैसे एक संतुलन बनाकर बोलने की कला विकसित की जा सकती है।
- मत्ती 12:36-37: हर बिना-सोचे समझे शब्द का लेखा-जोखा ईश्वर के सामने प्रस्तुत होता है; यह पद इस चेतावनी को समाहित करता है कि शब्दों के उत्तरदायित्व को कबूलना होता है।

संक्षिप्त उपसार

यहजोकेल 35:13 यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर के विरुद्ध बड़ाई और शब्दों के दुष्प्रचार का जोखिम कितना गहरा है।_WORDS_ के परिणाम जीवन-भर के लिए संकेत छोड़ते हैं। ईश्वर की नज़र शब्दों पर है और वह उन सभी को उभारते हैं जो उसे सम्मान देते हैं और दूसरों को सचेत करते हैं कि बोली में शांति, सत्य और नम्रता दिखे।

आंतरिक नोट्स (प्रासंगिक उद्धरणों के लिए)

यदि आवश्यक हो, तो अध्यात्मिक दिशा के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेखित विचारों से संक्षिप्त वाक्यों का चयन किया जा सकता है; किन्तु पूरा पाठ उनके उद्धरणों को दोहराए बिना, नए हिन्दी शब्दों में समाहित किया गया है।

नोट: इस प्रविष्टि में विशिष्ट वाक्यों के पूर्ण उद्धरण नहीं दिए गए हैं; केवल आवश्यक संगत विचारों का समन्वय किया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यहेजकेल 35:13 समानांतर पद और संबंधित वचन

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“तब वह राजा अपनी इच्छा के अनुसार काम करेगा, और अपने आप को सारे देवताओं से ऊँचा और बड़ा ठहराएगा; वरन् सब देवताओं के परमेश्‍वर के विरुद्ध भी अनोखी बातें कहेगा। और जब तक परमेश्‍वर का क्रोध न हो जाए तब तक उस राजा का कार्य सफल होता रहेगा; क्योंकि जो कुछ निश्चय करके ठना हुआ है वह अवश्य ही पूरा होनेवाला है।

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फूलकर अहंकार की ओर बातें मत करो, और अंधेर की बातें तुम्हारे मुँह से न निकलें; क्योंकि यहोवा ज्ञानी परमेश्‍वर है, और कामों को तौलनेवाला है।

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देश-देश के सब देवतओं में से ऐसा कौन है जिसने अपने देश को मेरे हाथ से बचाया हो? फिर क्या यहोवा यरूशलेम को मेरे हाथ से बचाएगा?'”

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