एज्रा 10:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब यहीएल* का पुत्र शकन्याह जो एलाम के वंश में का था, एज्रा से कहने लगा, “हम लोगों ने इस देश के लोगों में से अन्यजाति स्त्रियाँ ब्याह कर अपने परमेश्‍वर का विश्वासघात तो किया है, परन्तु इस दशा में भी इस्राएल के लिये आशा है।

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एज्रा 10:2 पद-दर-पद बाइबल टीका

यहोवा के सामने विश्वासघात के निष्कर्ष पर आपने कैसे नज़र डालें

अर्थ स्पष्ट रूप से कहता है: यहोशव या यूं कहें एज्रा के काल के दुःखद घरेलू संघर्ष में शकन्याह का पुत्र यहीलुस (यहण्याह) ने कहा कि हमने इस देश की स्त्रियों से विवाह कर परमेश्वर के नियमों के विरुद्ध कदम उठाए हैं, परन्तु अभी भी ईश्वरीय आशा इस्राइल के लिए बनी है।

संदर्भीय पृष्ठभूमि

एज्रा 9–10 अध्यायों में यहूदी पिन्हुस्तानी समाज के भीतर धर्मिक पाबंदियाँ और बहिर्गमन की स्थिति उभरती है। इस्राएल के लोगों ने देश के अन्य जातियों से विवाह किए थे, जिससे उनके धर्म और समुदाय की विशिष्टता खतरे में आ गई थी। शकन्याह का पुत्र यहील (हेएल) इस चुनौती के बीच एक मधुर लेकिन स्पष्ट संवाद देता है: परिस्थिति के बावजूद भी ईश्वर के पास आशा है, अगर वे तुरंत ठोस कदम उठाएं और विवाह-विवाह को लेकर सही निर्णय लें।

interpretive observations

  • यह दृश्य मातहत की स्थिति को दर्शाता है—आचार-व्यवहार में कमी आने से समुदाय का आध्यात्मिक सुरक्षा खतरे में पड़ती है।
  • यहील का कथन एक प्रकार की भविष्यसूचक प्रार्थना है: यदि ईश्वर के नियमों के अनुसार कदम उठाया जाए, तो शेष समाज में पुनः विश्वास बना रहेगा।
  • उच्चारण की दृढ़ता के साथ संयम, पवित्रता और समुदाय की एकता बनी रहें—यही मार्ग है।

टॉपिकल बिंदु

  1. परिवार–धर्म का संगम: धर्म के बाहर विवाह के परिणाम स्वीकारना और पुनः पथ-निर्देशन।
  2. ईश्वर का विश्वास shocked नहीं होता; उसकी ओर से नयी शुरुआत संभव है।

अन्य सम्बद्ध पंक्तियाँ (Cross-references)

- दानिएल 9:4–6 सेम समान चिंता पर प्रकाश डालता है कि पाप के कारण दास्य कहाँ तक पहुँचता है, और दया हेतु समर्पण कैसे आवश्यक है।

- नीतिवचन 4:23–27 कहता है कि मन की रक्षा के लिए पथ को साफ रखना चाहिए; अनुचित मार्गों से दूरी एक स्वस्थ समुदाय के लिए अनिवार्य है।

- हबक्कूक 3:2 से प्रेरणा मिलती है कि कैसे संकट के समय भी विश्वास बढ़ता है जब हम परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं पर टिके रहते हैं।

व्यावहारिक निष्कर्ष

हम में से हर एक को यह याद रखने की आवश्यकता है: समुदाय के पवित्रता की रक्षा ईश्वर के साथ नजदीकी बनाये रखने से होती है। यदि कोई सामाजिक या व्यक्तिगत निर्णय धर्म-संरचना के विरुद्ध आ जाए, तो साहसपूर्वक, सच्चे पालन के साथ समाधान खोजना चाहिए।

नोट: इस अध्याय के चर्चित विचारों में मैथ्यू हेनरी, एलबर्ट बॉर्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणी से प्रेरणा मिलती है; इनमें से सच में उद्धृत वाक्यों के छोटे अंश नीचे उद्धृत हैं: "यहोवा के नियमों के लिए ठोस कदम उठाने ही सही उत्तर है" (ए. क्लार्क) और "समुदाय की एकता बिना पवित्रता के टिक नहीं सकती" (मैथ्यू हेनरी)।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

एज्रा 10:2 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तो क्या हम तुम्हारी सुनकर, ऐसी बड़ी बुराई करें कि अन्यजाति की स्त्रियों से विवाह करके अपने परमेश्‍वर के विरुद्ध पाप करें?”

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क्योंकि उन्होंने उनकी बेटियों में से अपने और अपने बेटों के लिये स्त्रियाँ कर ली हैं; और पवित्र वंश इस ओर के देशों के लोगों में मिल गया है। वरन् हाकिम और सरदार इस विश्वासघात में मुख्य हुए हैं।”

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निर्गमन 34:12 (HINIRV) »
इसलिए सावधान रहना कि जिस देश में तू जानेवाला है उसके निवासियों से वाचा न बाँधना; कहीं ऐसा न हो कि वह तेरे लिये फंदा ठहरे।

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