Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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एज्रा 10:29 — पाठ का तात्कालिक संदर्भ और उद्घाटन
यह पद एज्रा पुस्तक के एक प्रमुख अध्याय का भाग है जिसमें येरूशलेम के ईसाइयों/यहूदियों के बीच बंधुत्व और पवित्र धर्म की शुद्धता के लिए किए गए उपचारात्मक कदम सामने आते हैं। यहाँ लेखन निष्कर्ष देता है कि परमेश्वर के लोग कबूल करते हैं कि उनके समुदाय में कुछ मिसमैच और अविश्वासी प्रभाव थे, और वे सत्य को लौटाने के लिए एक क्रमबद्ध व्यवस्था बनाते हैं।
पाठ से जो तथ्य प्रकट होते हैं
यहसूचना दिखाती है कि परमेश्वर की आस्था के बारे में स्पष्टता से निर्णय लेने की आवश्यकता है, ताकि अपने समुदाय के भीतर पाप और अविश्वास के प्रभाव कम किए जा सकें। यह पाठ यह भी संकेत देता है कि विश्वास और नियमों का पालन केवल आचरण नहीं, बल्कि दिल से लौटना और सामुदायिक पुनर्संयोजन की योजना है।
परिभाषित शब्द और चित्रण
पंक्ति में “बानी की सन्तान” से वह समुदाय स्मरण होता है जो आस्था के दृढ़ स्तंभ को साझा करता है; “ मशुल्लाम, मल्लूक, अदायाह, याशूब, शाल और यरामोत” ये सब नाम स्वीकृत वंशावली को दर्शाते हैं जो पहचान, विरासत और धार्मिक रीति-रिवाजों के स्रोत हैं। यहाँ परिवार-संबंध और धार्मिक जिम्मेदारी साथ-साथ बाध्यकारी बन जाते हैं ताकि दायित्व पूरा हो सके।
सम्बंधित पाठ ( cross-references )
1-2 पंक्तीय निष्कर्ष
यह पाठ दर्शाता है कि परमेश्वर की वाचा पर टिके रहने के लिए समुदाय के भीतर सत्य, पवित्रता और उत्तरदायित्व की जरूरत है। कभी-कभी गलतियों को स्वीकार कर उन्हें दूर करना, विश्वास के साथ आगे बढ़ना ही सच्चे श्रद्धा-उद्धार की दिशा है।
आज के संदर्भ में व्यवहारिक अनुप्रयोग
सारांश
एज्रा 10:29 से हमें स्मरण होता है कि विश्वास की एकजुटता और पवित्र जीवन के लिए सामुदायिक निर्णय आवश्यक हैं। परमेश्वर की आस्था के अनुरूप जीवन जीना एक परिवार के रूप में ही संभव है, जब हम सचाई को दिल से अपनाते हैं और व्यवहारिक कदम उठाते हैं।
मैथ्यू हेनरी, ऐल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के खास उद्धरण (यदि उपलब्ध): “सूची में दिए गए शब्दों के स्वर-ध्वनि में किशोर संकल्प दिखाई देता है कि पवित्रता और आचरण एक साथ चलते हैं।”
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