Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
एज्रा 10:1 एज्रा 10:2 एज्रा 10:3 एज्रा 10:4 एज्रा 10:5 एज्रा 10:6 एज्रा 10:7 एज्रा 10:8 एज्रा 10:9 एज्रा 10:10 एज्रा 10:11 एज्रा 10:12 एज्रा 10:13 एज्रा 10:14 एज्रा 10:15 एज्रा 10:16 एज्रा 10:17 एज्रा 10:18 एज्रा 10:19 एज्रा 10:20 एज्रा 10:21 एज्रा 10:22 एज्रा 10:23 एज्रा 10:24 एज्रा 10:25 एज्रा 10:26 एज्रा 10:27 एज्रा 10:28 एज्रा 10:29 एज्रा 10:30 एज्रा 10:31 एज्रा 10:32 एज्रा 10:33 एज्रा 10:34 एज्रा 10:35 एज्रा 10:36 एज्रा 10:37 एज्रा 10:38 एज्रा 10:39 एज्रा 10:40 एज्रा 10:41 एज्रा 10:42 एज्रा 10:43 एज्रा 10:44



एज्रा 10:26 का तात्पर्य: एलाम की सन्तान में से मत्तन्याह, जकर्याह, यहीएल अब्दी, यरेमोत और एलिय्याह
मुख्य interpretive point: यह वाक्य बंदी-युग में यहूदी समुदाय के भीतर पवित्रता की संकल्पना और बहिर्गमन के कारण उठे तलाक/वियोग के प्रश्न की दिशा दर्शाता है। यहाँ एज्रा कुछ व्यक्तियों के नाम लेकर स्पष्ट करता है कि किसके द्वारा एक-एक पीढ़ी के विरुद्ध यथार्थ सामाजिक–धार्मिक बंधन टूटने से बचना चाहिए था। इसका केंद्र यह है कि पत्नी-त्याग और सामाजिक दबाव के समय पवित्र वचन के अनुसार सत्य और पवित्रता बनाए रखना आवश्यक है।
साहित्यिक संदर्भ (Literary context)
इस अध्याय में यह्रूशालम के अधिकारी और यहूदी समुदाय के नेता यहूदियों के पारिवारिक रीति-रिवाजों के पालन को सुनिश्चित कर रहे हैं। पिता के घर से बाहर फंसी समस्या यह है कि तलाक और विवाह-न्वेषण की प्रवृत्ति से समुदाय में पवित्रता का पतन संभव है। सूचीबद्ध नामों के द्वारा लेखक ने हर संभावित दोषी या प्रभावित परिवार के सदस्य के योगदान को उजागर किया है; यह स्पष्ट करता है कि गलती से भी धार्मिक व्यवस्था को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
धर्मशास्त्रीय महत्व (Theological significance)
यह अंश सामाजिक-धार्मिक सीमाओं की पवित्रता को बनाए रखने की दिशा में सरकार और समाज के उत्तरदायित्व की चेतावनी देता है। यह दिखाता है कि नीति-निर्माण में धार्मिक कानूनों का स्थान है, ताकि समुदाय की आस्था और पवित्रता प्रभावित न हो। यह भी संकेत देता है कि व्यक्तिगत निर्णयों का सामूहिक असर पड़ता है; रहन-सहन और विवाह-बंधनों में विश्वसनीय ईमानदारी जरूरी है।
पवित्र शास्त्रों के साथ संबंध (Cross-references)
संकेत: यह passages पुराने नियम के सामाजिक-धार्मिक ढांचे को मजबूत बनाते हैं, जिसमें समुदाय अपने सदस्यों के आध्यात्मिक स्वास्थ्य के लिए कड़े मानदंड अपनाता है।
गंभीर प्रश्न (Questions for reflection)
संक्षिप्त निष्कर्ष
एज्रा 10:26 में मत्तन्याह, जकर्याह, यहीएल अब्दी, यरेमोत और एलिय्याह के नाम एक संरक्षित परिवार-धारणा के लिए दखल देते हैं। यह याद दिलाता है कि पवित्र समुदाय बनाने में व्यक्तिगत विकल्पों के साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी बढ़ती है, और विश्वास के नियमों को स्थिर रखने के लिए समुदाय का संकल्प आवश्यक है।
प्रेरित उद्धरण (historical quotes, if cited)
इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के हल्के-फुल्के शब्दों के शाब्दिक उद्धरण को केवल तभी दर्ज किया गया है जब उपलब्ध हो और आवश्यक हो।
नोट: यदि एतिहासिक टिप्पणीकारों के प्रत्यक्ष उद्धरण उपलब्ध हों, वे नीचे दिए जा सकते हैं, अन्यथा सारगर्भित सार निष्कर्ष ही दिए जाते हैं।