Old Testament
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योएल 1:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उस दिन के कारण हाय! क्योंकि यहोवा का दिन निकट है। वह सर्वशक्तिमान की ओर से सत्यानाश का दिन होकर आएगा।
योएल 1:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
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योएल 1:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 13:6 (HINIRV) »
हाय-हाय करो, क्योंकि यहोवा का दिन* समीप है; वह सर्वशक्तिमान की ओर से मानो सत्यानाश करने के लिये आता है।

यिर्मयाह 30:7 (HINIRV) »
हाय, हाय, वह दिन क्या ही भारी होगा! उसके समान और कोई दिन नहीं; वह याकूब के संकट का समय होगा; परन्तु वह उससे भी छुड़ाया जाएगा।

यहेजकेल 7:2 (HINIRV) »
“हे मनुष्य के सन्तान, प्रभु यहोवा इस्राएल की भूमि के विषय में यह कहता है, कि अन्त हुआ; चारों कोनों समेत देश का अन्त आ गया है। (यहे. 7:5)
क्यों यह पद महत्वपूर्ण है
योएल 1:15 का उद्घोष "यहोवा का दिन निकट है" सीधे चेतावनी और बुलावे दोनों है। यह वाक्य पाठक को समय की गंभीरता और परमेश्वर की न्यायप्रियता के प्रति सजग करता है। यह हमें याद दिलाता है कि ऐतिहासिक प्रलय और भविष्य का निर्णायक दिवस दोनों एक ही आध्यात्मिक आशय में आते हैं—परिवर्तन, पछतावे और परमेश्वर के साम्राज्य की आगाहि।
मूल संदर्भ
योएल नबी ने यह संदेश उस समय दिया जब याज्ञिक और राष्ट्रीय संकट व्याप्त था—कृमि, अकाल और धार्मिक उदासीनता। "यहोवा का दिन" की घोषणा उन परिस्थितियों में की गई जो जनता को चेताना और उन्हें पश्चात्ताप की ओर मोड़ना चाहती थी। यहाँ "सर्वशक्तिमान की ओर से सत्यानाश" का अर्थ स्थानीय विपत्ति तक सीमित नहीं, बल्कि परमेश्वर के न्यायपूर्ण हस्तक्षेप का सार्वकालीक और निर्णायक रूप है।
मुख्य संदेश
मुख्य विषय यह है कि परमेश्वर का कार्य सक्रिय और निर्णायक होता है। विराम-स्थल, पीड़ा और भय के अनुभवों के बीच नबी कहते हैं कि यह सब परमेश्वर के द्वारा नियोजित चेतावनी हैं, ताकि लोग जागें। "हाय!" शब्द मानवीय संवेदना और तात्कालिक संकट को व्यक्त करता—यह केवल इतिहास का वर्णन नहीं बल्कि आह्वान है कि लोग आत्मा-परिवर्तन करें।
समर्थक बाइबिलीय विषय
प्रासंगिक पारस्परिक संदर्भ
अधिक समझ के लिए इन पदों को देखें और उनके संबंध पर विचार करें:
पुराने सार्वजनिक-डोमेन टीकाकारों से संक्षिप्त उद्धरण
मैथ्यू हेनरी का संक्षिप्त कथन उपयोगी है: "यहोवा का दिन न केवल गिरावट का समय है, बल्कि सुधार और बुलावे का अवसर भी है।" (संदर्भ: Matthew Henry—संक्षेप में उद्धृत)।
अल्बर्ट बार्न्स ने लिखा है कि यह घोषणा "लोगों को जागने और पुनरावर्तन करने के लिये प्रदत्त एक त्वरित चेतावनी है।" (Albert Barnes—संक्षेप में उद्धृत)।
ऐडम क्लार्क ने इसे "परमेश्वर के निर्णायक हस्तक्षेप" के रूप में देखा, जो दोष और दया दोनों को उजागर करता है। (Adam Clarke—संक्षेप में उद्धृत)।
सारांश और व्यावहारिक प्रतिबिंब
योएल 1:15 हमें यह सिखाता है कि परमेश्वर का दिन निकट होने का अर्थ केवल भय नहीं, बल्कि परिवर्तन का आमंत्रण भी है। संकट जब आते हैं तो वे आंतरिक आत्म-परीक्षण और सार्वजनिक सुधार का कारण बन सकते हैं। नबी की पुकार से हमारा उत्तर आज भी वैसा ही होना चाहिए: पश्चात्ताप, प्रार्थना और वास्तविक जीवन में परिवर्तन।
व्यावहारिक रूप से यह श्लोक निम्न बातों पर उभार देता है:
अंत में, यह पद चेतावनी और आशा का मिश्रण है: चेतना की पुकार कि "यहोवा का दिन निकट है", और साथ ही एक आमंत्रण कि हम अपनी राह बदलें ताकि उसी दिन पर दया प्राप्त कर सकें।