Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीयोएल 1:10 बाइबल पद की व्याख्या
योएल 1:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
खेती मारी गई, भूमि विलाप करती है; क्योंकि अन्न नाश हो गया, नया दाखमधु सूख गया, तेल भी सूख गया है।
योएल 1:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
योएल 1:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

होशे 4:3 (HINIRV) »
इस कारण यह देश विलाप करेगा, और मैदान के जीव-जन्तुओं, और आकाश के पक्षियों समेत उसके सब निवासी कुम्हला जाएँगे; और समुद्र की मछलियाँ भी नाश हो जाएँगी।

यिर्मयाह 12:11 (HINIRV) »
उन्होंने उसको उजाड़ दिया; वह उजड़कर मेरे सामने विलाप कर रहा है। सारा देश उजड़ गया है*, तो भी कोई नहीं सोचता।

होशे 9:2 (HINIRV) »
वे न तो खलिहान के अन्न से तृप्त होंगे, और न कुण्ड के दाखमधु से; और नये दाखमधु के घटने से वे धोखा खाएँगे।
योएल 1:10 का विस्तृत धार्मिक टिप्पणी
पद के अनुसार खेत-खलिहान और दाखमधु-तेल सब सूख जाने से भूमि पर एक गहरी चीत्कार फैली है। योएल नबी के समय छाए आंधी-सी बंधी भयानक विपत्ति के प्रकाश में यह चेतावनी देता है कि परमेश्वर के रोष और राज्य के विनाश के कारण उपज-जनित संसाधन खत्म हो गये हैं। यह एक सतर्क संदेश है कि भौतिक संपदा के नाश के पीछे आत्मिक रिक्तता, पाप की गंभीरता और परमेश्वर के समक्ष उद्धार की आवश्यकता मूक नहीं रहती।
मुख्य अर्थ
यह verse दिखाती है कि किस प्रकार पृथ्वी की फसलें, पेय पदार्थ, और तेल—जो जीवन के स्थायीत्व के संकेत हैं—एक साथ मरणमार्ग में चले जाते हैं जब देश परमेश्वर की अनुमति से बुलाए संकेतों का सामना करता है। न केवल कृषि संसाधन हारे हैं, बल्कि यह एक आध्यात्मिक संकेत भी है कि समाज ने परमेश्वर के साथ अपने संबंधों में कमी कर दी है।
दो-तीन प्रमुख विषय
संबंधित पाठ
— अन्य नबी संदेशों में खेती और संसाधन की कमी के संकेत प्रकट होते हैं, जो क्षमा और उद्धार के लिए परमेश्वर की बुलाहट को और स्पष्ट करते हैं। उदाहरण के लिए, जलनी और भूमि-उद्धार की तस्वीरें अन्य ग्रंथों में भी आती हैं, जहाँ आत्मिक पुनर्स्थापना से समझौता नहीं किया जा सकता।
व्यावहारिक विचार
1) अपने जीवन में परमेश्वर के साथ संबंधों की गहराई को जाँचें—क्या प्रभु को अपना भाग्यशाली केंद्र मानते हैं या भ्रमित स्वार्थों के कारण संरक्षण खो रहा है? 2) समुदायिक स्तर पर क्या ऐसी अड़चनों को दूर किया गया है जो न्याय, समुदायिक सहायता, और आध्यात्मिक रीति-रिवाज़ों के बीच फासला पैदा करते हैं? 3) व्यक्तिगत आशीष और सरकारों की व्यवस्थाओं में संतोष के साथ उदारता और सेवा के गुण कैसे उभरते हैं?
क्रॉस-रेफरेंसेस
- अन्य संकेतों में कृषि-संरचना के नुकसान का संदेश यह बताता है कि भौतिक संकट समाज के नैतिक स्वास्थ्य से जुड़ा है। - परमेश्वर के दया-न्याय के संतुलन की ज़रूरत बताने वाले पाठ: विपत्ति के समय भी आशा और पश्चाताप की राह खुली रहती है। - उद्धार और पुनर्निर्माण के संकेत: भेदभाव और पाप-आघात के बाद नई शुरुआत संभव है जब समुदाय सचेत होकर लौटे।
संक्षेप
योएल 1:10 एक स्पष्ट चेतावनी है कि जब भूमि की उपज और दैनिक अन्न सूख जाते हैं, तब स्थान-स्थान पर आत्मा-स्तर पर पुल टूटने के संकेत मिलते हैं। यह हमारे लिए एक अवसर है कि हम अपने संबंध परमेश्वर के साथ मजबूत करें, पश्चाताप करें और सहायता के लिए उन्नत समाज बनाएं।