Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीयोएल 1:2 बाइबल पद की व्याख्या
योएल 1:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
हे पुरनियों, सुनो, हे देश के सब रहनेवालों, कान लगाकर सुनो! क्या ऐसी बात तुम्हारे दिनों में, या तुम्हारे पुरखाओं के दिनों में कभी हुई है?
योएल 1:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
योएल 1:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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होशे 5:1 (HINIRV) »
हे याजकों, यह बात सुनो! हे इस्राएल के घराने, ध्यान देकर सुनो! हे राजा के घराने, तुम भी कान लगाओ! क्योंकि तुम्हारा न्याय किया जाएगा; क्योंकि तुम मिस्पा में फंदा, और ताबोर पर लगाया हुआ जाल बन गए हो।

योएल 2:2 (HINIRV) »
वह अंधकार और अंधेरे का दिन है, वह बादलों का दिन है और अंधियारे के समान फैलता है। जैसे भोर का प्रकाश पहाड़ों पर फैलता है, वैसे ही एक बड़ी और सामर्थी जाति आएगी; प्राचीनकाल में वैसी कभी न हुई, और न उसके बाद भी फिर किसी पीढ़ी में होगी। (मत्ती 24:21)

अय्यूब 8:8 (HINIRV) »
“पिछली पीढ़ी के लोगों से तो पूछ, और जो कुछ उनके पुरखाओं ने जाँच पड़ताल की है उस पर ध्यान दे।
योएल 1:2 का बोध और संदर्भ
यहोवा के संदेशवाहक योएल ने उस समय के लोगों से पूछा कि क्या ऐसी विपत्ति और दृष्टांत पहले कभी उनके इतिहास में घटित हुए हैं? यह पद यहरहा करता है कि परमेश्वर का पृथ्वी पर क्रोध और दारुण हाहाकार न केवल वर्तमान पीढ़ी पर है, बल्कि यह संदेश पुरखाओं के समय से जुड़ा है। यहोवा के दिन के संकटों के लिए संदर्भ प्रस्तुत करते हुए यह आयत समुदाय को चेतावनी देती है कि इतिहास से सबक लेकर आत्म-विनय और पश्चाताप आवश्यक है।
मुख्य संदेश
इस वाक्य का केंद्र बिंदु है: ऐसे समय में जब प्रजा कठिनाई में है, तब इतिहास के संदर्भ में यह प्रश्न उभरता है—क्या यह घटना पहले भी कभी घटित हुई है? उत्तर नकारात्मक या सकारात्मक की नहीं, बल्कि यह चेतावनी है कि आज की विपत्ति का कारण और समाधान दोनों मिलकर एक जागृति का अवसर हैं। यह कहती है कि परमेश्वर की योजना और न्याय उन चीजों से परे है जिन्हें लोग उम्र के साथ याद करते हैं; यह एक आह्वान है कि आंतरिक आत्म-परिवर्तन अभी और तुरंत होना चाहिए।
2–3 प्रमुख विषय
अन्य उद्धरणीय संकेत और क्रॉस-रेफरेंसेज
क्रॉस-रेफरेंसेज के साथ संरेखित विचार:
इन संदर्भों से समझना स्पष्ट होता है कि संकट वह अवसर है जब सच्चे परिवर्तन की आवश्यकता सामने आती है—भावना नहीं, बल्कि दिल की उलटफेर और परमेश्वर के साथ सत्यापन।
व्यावहारिक विचार
आज के संदर्भ में यह आयत समुदायों को प्रेरित करती है कि वे अपने समुदाय, परिवार और व्यक्तिगत जीवन में कठिन हालात के बीच भी ईश्वर के आदेशों पर ईमानदारी से ध्यान दें। संकट के समय दया,समर्पण और नैतिक सुधार को प्राथमिकता दें; धार्मिक और सामाजिक बदलाव एक साथ आने चाहिए।
संक्षिप्त सार
योएल 1:2 हमें याद दिलाता है कि इतिहास से सीखे बिना वर्तमान संकट का समाधान नहीं मिल सकता। यह परमेश्वर के न्याय के प्रति सजग रहने, पूजात्मक पश्चाताप और आंतरिक परिवर्तन की पुकार है—ताकि देश और उसकी प्रजा पुनः भगवान के मार्ग पर लौटें।
सूक्ष्म उद्धरण (public-domain commentary से, संक्षेप)
मार्थर हेनरी, अॅलबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणियों के अनुरूप, यह आयत चेतावनी और जागृति का मिश्रण प्रस्तुत करती है: इतिहास में नज़र डालकर वर्तमान की कमजोरियों को दूर करना, और दिल से विनम्र होकर परमेश्वर के पास लौटना आवश्यक है।