Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीयोएल 1:5 बाइबल पद की व्याख्या
योएल 1:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
हे मतवालों, जाग उठो*, और रोओ; और हे सब दाखमधु पीनेवालों, नये दाखमधु के कारण हाय, हाय, करो; क्योंकि वह तुम को अब न मिलेगा।
योएल 1:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
योएल 1:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

यशायाह 24:7 (HINIRV) »
नया दाखमधु जाता रहेगा, दाखलता मुर्झा जाएगी, और जितने मन में आनन्द करते हैं सब लम्बी-लम्बी साँस लेंगे।

यशायाह 32:10 (HINIRV) »
हे निश्चिन्त स्त्रियों, वर्ष भर से कुछ ही अधिक समय में तुम विकल हो जाओगी; क्योंकि तोड़ने को दाखें न होंगी और न किसी भाँति के फल हाथ लगेंगे।

क्यों यह पद महत्वपूर्ण है
योएल 1:5 एक तीव्र चेतावनी और शोक का आह्वान है। यह वचन समाज के उन वर्गों से बोलता है जो सौहार्द, आनंद और सामान्य जीवन-आयामों से जुड़े थे—शराबी, मटमैले जश्न करने वाले—और बताता है कि असाधारण विपत्ति के कारण उनके आनन्द का स्रोत अब सूख गया है। यह पाठ व्यक्तिगत और राष्ट्रीय दोनों तरह के संकट में जीवन के विनाशकारी प्रभावों पर ध्यान केन्द्रित कराता है।
मूल संदर्भ
योएल एक आपत्कालीन उपदेशक है, जो सूखा और नेमबत के संग्रामी त्रास के समय यह संदेश देता है। चैप्टर 1 में सूखे के कारण किसानों का कार्य, पशुधन और अनाज सब प्रभावित हुए हैं। 1:5 में जो पुकार सुनायी देती है वह विशेषकर वे लोग हैं जो पहले आनंद-र जनजीवन का भाग रहे—मतवाले और दाखमधु पीने वाले—कहने का आशय यह है कि विपत्ति ने समाज के प्रत्येक हिस्से को छू लिया है।
मुख्य संदेश
वचन का केंद्र यह है कि जब परमेश्वर की दण्ड या प्राकृतिक आपदा आती है तो सुख के साधन क्षीण हो जाते हैं और मानव आत्मा को जागरण, पश्चाताप और शोक के लिए बुलाया जाता है। यह न केवल बाह्य क्षति का वर्णन है बल्कि यह आध्यात्मिक हत्यात्मकता का भी संकेत है—सुरक्षित समझे जाने वाले आनंद भी खो सकते हैं। इसलिए यह आह्वान है कि लोग सतर्क हों, आत्मनिरीक्षण करें और परमेश्वर की ओर लौटें।
समर्थक बाइबिलीय विषय
यह पद कई बड़े बाइबिलीय विषयों से जुड़ता है:
प्रासंगिक पारस्परिक सन्दर्भ
कुछ अन्य शास्त्रीय पद जहां समान विचार मिलते हैं:
मेट्थ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क से छोटा उद्धरण
मेट्थ्यू हेनरी का संक्षिप्त टिप्पणीगत भाव प्रासंगिक है: "A time of mourning must be observed when the comforts of life are taken away." (संक्षिप्त उद्धरण)।
अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के शब्दों का अधिकरण करना उपयोगी रहा है, पर उनके सटीक शब्दांश यहाँ आवश्यकता अनुसार संग्रहीत रहे।
व्यावहारिक अनुप्रयोग और प्रतिबिंब
योएल 1:5 हमें सिखाता है कि संकट के समय आनंद के साधनों का क्षय आत्मा को झकझोरता है और हमें अपनी प्राथमिकता पर पुनर्विचार करने के लिए उकसाता है। यह व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर निम्नलिखित प्रतिक्रियाएँ सुझाता है:
अंतिम आध्यात्मिक चिंतन
योएल की पुकार केवल शोक नहीं है, बल्कि जागने और लौटने की दिमागी और आत्मिक तैयारी है। जब जीवन के सामान्य स्रोत छिनते हैं, तो वह मौका बन जाता है—ईश्वर की ओर लौटने, प्राथमिकताओं को सुलझाने और सच्ची खुशी की खोज करने का। पाठक को यह सोचने का आह्वान है: क्या मेरे जीवन के "दाखमधु" ऐसे हैं जिन पर मैं निर्भर कर रहा हूँ? और क्या मैं विपत्ति में परमेश्वर को अपनी आशा मानता हूँ?