Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीयोएल 1:14 बाइबल पद की व्याख्या
योएल 1:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उपवास का दिन ठहराओ, महासभा का प्रचार करो। पुरनियों को, वरन् देश के सब रहनेवालों को भी अपने परमेश्वर यहोवा के भवन में इकट्ठा करके उसकी दुहाई दो।
योएल 1:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
योएल 1:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

2 इतिहास 20:3 (HINIRV) »
तब यहोशापात डर गया और यहोवा की खोज में लग गया, और पूरे यहूदा में उपवास का प्रचार करवाया।

2 इतिहास 20:13 (HINIRV) »
और सब यहूदी अपने-अपने बाल-बच्चों, स्त्रियों और पुत्रों समेत यहोवा के सम्मुख खड़े रहे।

योएल 1:14 का स्पष्ट अर्थ
यह घोषणा कहती है कि परमेश्वर के सामने एक सामूहिक प्रार्थना और कृपणता की अग्नि जलाई जाए: उपवास करो, महासभा को बुलाओ, बुजुर्ग से लेकर देश के सभी निवासी तक सभी एक जगह आकर दया और पुकार के साथ उसकी यहोवा के भवन में जमा हों। यह एक संयुक्त पुकार है जो व्यक्तिगत लगाव से अधिक समुदायिक विश्वास और आस्था की जरूरत को दर्शाती है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
योहान्न-नक़ल नहीं, बल्कि यहोएल का साहित्यिक संदर्भ एक आपदा के समय आया है। यहाँ आग और कीड़ों के साथ एक वर्षा-हीन, फसल-चक्र पर चोट पहुँचाने वाले संकट का उल्लेख है, ताकि लोग परमेश्वर की करुणा और अनुग्रह की seeking में जुटें। यह उपवास, दया और दुआ की राष्ट्रीय पहल के तौर पर प्रस्तुत है, जिसे समाज के हर वर्ग तक पहुँचना है—पुरनियों से लेकर देश के सभी निवासियों तक।
interpretive observations
2–3 उपयोगी क्रॉस-रेफरेंसेस और उनका संक्षेप स्पष्टीकरण
हत्या-आह्वान और दया: योएल के पाठ से मिलती-जुलती चेतावनी यह है कि पाप के कारण आने वाला विपत्ति समाज के हर सदस्य को विवेक और पश्चाताप की ओर लाता है; उपवास और दुआ उस दया-संस्थान का मार्ग बनते हैं।
जोश-त्याग और पुर्नस्थापना: पुराने दायित्वों को छोड़कर परमेश्वर के साथ निष्ठा की पुनर्स्थापना एक साथ संभव बनती है, जैसा कि अन्याने पुरखों के समय में भी हुआ।
आत्मिक सामूहिकता: यह संदेश समुदाय के भीतर एकता और साझा आस्था के महत्व को रेखांकित करता है; एक-एक व्यक्ति का योगदान समग्रता को मजबूत बनाता है।
चिन्तनशील अवलोकन (संक्षिप्त सूची)
उद्धरण-आधारित सूक्ष्म विचार
मथ्यू हेन्री, अलेक्ज़ेंडर बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरी-ईतिहासिक टिप्पणीकारों के विचार में यह संदेश यह दर्शाता है कि दया, पश्चाताप और एकता परमेश्वर के निकटता को बढ़ाते हैं। उनके देखते-देखते उपवास का वास्तविक लक्ष्य है हृदय परिवर्तन और समुदाय की सामर्थ्य। (कृपया यह नोट करें कि नीचे सीधे उद्धरण केवल उनके सार्वजनिक-डोमेन विचारों से हैं, यदि उपलब्ध हों।)
कथनात्मक निष्कर्ष
यहां दर्शाया गया है कि संकट के समय एक साथ आना—उपवास, दुआ और हर व्यक्ति की सहभागिता—परमेश्वर की दया को प्राप्त करने का मार्ग है। सामाजिक-आर्थिक विभाजन भुलाकर एकता की ओर बढ़ना, और भवन-पूजा के बजाय परमेश्वर के सन्निकट रहने की इच्छा को प्रकट करना प्रमुख संदेश है।
संक्षेपित अनुप्रयोग
आज भी समुदायिक स्तर पर संकट के समय एकजुट प्रार्थना और सेवाभाव आवश्यक है। हर सदस्य, चाहे वह वृद्ध हो या युवा, किसान हो या शिक्षित, परमेश्वर के चिरस्तंभ के सामने आकर आत्म-निरीक्षण और पश्चाताप की गति बढ़ाए।