Old Testament
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योएल 1:20 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वन-पशु भी तेरे लिये हाँफते हैं, क्योंकि जल के सोते सूख गए, और जंगल की चराइयाँ आग का कौर हो गईं।
योएल 1:20 पद-दर-पद बाइबल टीका
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योएल 1:20 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 104:21 (HINIRV) »
जवान सिंह अहेर के लिये गर्जते हैं, और परमेश्वर से अपना आहार माँगते हैं।

1 राजाओं 18:5 (HINIRV) »
और अहाब ने ओबद्याह से कहा, “देश में जल के सब सोतों और सब नदियों के पास जा, कदाचित् इतनी घास मिले कि हम घोड़ों और खच्चरों को जीवित बचा सके, और हमारे सब पशु न मर जाएँ।”

यहोएल 1:20 पर व्याख्या—सीधा सार मतलब
यह वचन कहता है कि वन-पशु भी तेरे लिये हाँफते हैं, क्योंकि जल के सोते सूख गए, और जंगल की चराइयाँ आग का कौर हो गईं। निष्कर्षतः यह पर्यावरणीय विपत्ति नहीं केवल पशुओं तक सीमित है, बल्कि परमेश्वर की इच्छा से पुकार की गई चेतावनी है कि पाप के कारण प्रकृति भी असंतुलित हो उठी है। तब उपयुक्त प्रतिक्रिया है—भक्ति, पश्चाताप, और परमेश्वर के अद्भुत न्याय के प्रति सचेतता।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यहोएल का मिनाकारी एक प्रकोप-विशेष कथा है जिसमें आपदा, जलभराव और आग जैसी आपदाओं के माध्यम से इजरायल के लोगों को पुकार किया गया है कि वे एकात्म होकर परमेश्वर की ओर लौटें। यहाँ की आग और सूखा स्पष्ट संकेत देते हैं कि दया और किनारा-तोड़ने वाले प्रलोभनों के बीच परमेश्वर की चेतावनी का समय है। वन-पशुओं की तकलीफें सामाजिक और आर्थिक असंतुलन के साथ जुड़ी हैं—कृषि, पानी की उपलब्धता और सुरक्षा के लिए एक संकेत।
व्याख्यात्मक विचार
1–दो ठंडी विचारधारा से जुड़ी छोटी सूची
अनुशीलित क्रॉस-रेफरेंस और उनके अर्थपूर्ण सम्बन्ध
यहोएल 2:12–13 में repent और rending of heart पर बल है—यह दर्शाता है कि आर्तनाद का आंतरिक स्रोत है, न कि केवल बाहरी आडंबर।
योह 1:14 में शास्त्र कहता है कि भव्य उपवास और प्रार्थना से परमेश्वर के दयालु स्वभाव की ओर लौटना चाहिए।
यशाय 24:4–6 प्रकृति का संपूर्ण परिवर्तन भी परमेश्वर के न्याय और उद्धार के कार्यक्रम का हिस्सा है।
सारगर्भित दार्शनिक निष्कर्ष
यह पद हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर के हाथ से निकली विपत्ति भी पहुंचती है ताकि हमारी आंतरिक स्थिति सुधरे। पश्चाताप के बिना केवल बाहरी उपायों से उद्धार नहीं मिलता; भक्ति और समाज-सेवा के साथ प्रकृति के साथ संतुलन बनाना भी आवश्यक है।
कैनवास-प्रयोगात्मक takeaway
आज के संदर्भ में: अपने जीवन के क्षेत्र—परिवार, समुदाय, और पर्यावरण—में सचेतनाएँ बढ़ाएं। पाप के हर प्रकार पर आत्म-चिंतन करें, प्रार्थना करें, और प्रकृति के प्रति दायित्व निभाएं ताकि परमेश्वर की करुणा फिर प्रकट हो सके।
दृष्टि-समाप्त
यहोएल का यह हिस्सा एक तरह से चेतावनी-आह्वान है: जहाँ जल और जंगल का संतुलन बिगड़ता है, वहाँ आध्यात्मिक पुनर्गठन का अवसर निकलता है।
उद्धरण के लिए प्रयुक्त भाग: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डायम स्रोतों से संक्षेप एवं सार-सूचनाओं को समन्वित किया गया है। अगर किसी विशेष वाक्य के निकट-उद्धरण मिलते हैं, वे पाठ में तात्पर्यपूर्ण उद्धरण के रूप में संकेतित हैं।