यशायाह 24:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

नया दाखमधु जाता रहेगा, दाखलता मुर्झा जाएगी, और जितने मन में आनन्द करते हैं सब लम्बी-लम्बी साँस लेंगे।

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यशायाह 24:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

अर्थ (सीधा कथन)

यशायाह 24:7 का शाब्दिक अर्थ है कि खुशियों और आनंद का स्रोत — दाख का रस और जिन लोगों के मन में आनंद था — अब सूखे या वीरान हो रहे हैं; जीवन का उत्साह घट रहा है और जो आनंदित थे वे गहरी निराशा या शोक में बदल जाते हैं। संक्षेप में: जुड़ा हुआ जीवन-उत्सव बाधित हो गया है और मानव आनन्द का स्रोत क्षीण हो गया है।

परिप्रेक्ष्य (संदर्भ)

यह पद पूरे अध्याय 24 के व्यापक दृश्य का हिस्सा है, जहाँ भविष्यवक्ता समग्र रूप से पृथ्वी पर नैतिक और धार्मिक पतन के कारण व्यापक संकट का वर्णन कर रहा है। पूरा अध्याय वैश्विक व्यवधान और परमेश्वर की न्यायपूर्ण न्याय-व्यवस्था का चित्र प्रस्तुत करता है — न केवल जगहों का विनाश, बल्कि सभ्य जीवन के साधनों का क्षरण भी। इस छवि में दाख-मधु और आनंद प्रतीक हैं जो पहले सुख-समृद्धि और स्थिरता दर्शाते थे।

व्याख्यात्मक निरीक्षण

1) दाख और मधु के सूखने का आयाम: दाख-रस और मधु बडी खुशी और विवाह या उत्सवों के साथ जुड़े प्रतीक हैं। उनका जाना सामाजिक और आर्थिक जीवन की गिरावट बताता है।

2) “दाखलता मुर्झा जाएगी” — यह शब्द अर्थ में तारतम्य व्यक्त करता है: जो कभी पक्का जीवन-आधार था, वह अब फलहीन या निर्जीव हो जाएगा।

3) “सब लम्बी-लम्बी साँस लेंगे” — यह निराशा और दमन का संकेत है। श्लेष की तरह, यह साँस घुटन या गहरी दु:ख-नाउम्मीदी को व्यक्त करती है, न कि केवल शारीरिक थकान।

4) नैतिक कारण-वास्तविकता: कवि यहाँ प्राकृतिक स्रोतों के सूखने को दैवीय न्याय व मानवीय पाप के परिणाम के रूप में जोड़ता है — सामाजिक दुराचार और ईश्वर के विधान से दूर होना इस दैन्य का कारण है।

थीमैटिक सूची (संक्षेप)

  • उत्सव का समाप्त होना — सामजिक व आध्यात्मिक उथल-पुथल
  • जीवन-आधार का क्षय — आर्थिक व प्राकृतिक प्रभाव
  • मानसिक कष्ट — आनंद से शोक तक का परिवर्तन

संबंधित पद और संक्षिप्त व्याख्या

● पालन 1:21 (यिर्मया/अन्य) — समान रूप से न्याय के अभाव के कारण भूमि की वीरानता का चित्र मिलता है; कारण और परिणाम के रूप में अधर्म और प्रकृति का क्षरण।

● यूहन्ना 16:20–22 — यीशु के शब्द जहाँ शोक के बाद आनन्द की बात है; यशायाह का चित्र अस्थायी सामाजिक विनाश दिखाता है, जबकि यूहन्ना व्यक्तिगत उद्धार के तौर-तरीके की आशा जोड़ता है।

● भजन 107:34–38 — प्राकृतिक स्रोतों के सूखने और जीवन-यापन के साधनों के बदलने का पारस्परिक विवरण; यहाँ भी परमेश्वर की व्यवस्था से जुड़ा प्रभाव दिखता है।

पब्लिक-डोमेन टिप्पणीकारों से नोट (संक्षेप)

मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क की विचारधाराओं को समग्र रूप में मिलाकर कहा जा सकता है कि यह पद दैवीय अनुशासन और उसके सामाजिक परिणामों पर प्रकाश डालता है। (यहाँ किसी से उद्धरण शामिल नहीं किया गया है।)

व्यवहारिक उपसंहार

यह पद पाठक को याद दिलाता है कि व्यक्तिगत और सामाजिक अनदेखी व पाप का प्रभाव केवल आध्यात्मिक नहीं रहता—उसका असर जीवन के साधनों और खुशी पर भी पड़ता है। इसलिए आत्मनिरीक्षण, सार्वजनिक नैतिकता और ईश्वर की ओर पलटना आवश्यक है। आशा यह है कि यद्यपि भूमि और आनन्द क्षीण होते हैं, भविष्य में पुनर्स्थापना की संभावना भी बाइबिल की व्यापक कथावली में मौजूद है; इसलिए श्रद्धाभरित परिवर्तन और सामूहिक सुधार का आह्वान मजबूत है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 24:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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फलदाई बारियों में से आनन्द और मगनता जाती रही; दाख की बारियों में गीत न गाया जाएगा, न हर्ष का शब्द सुनाई देगा; और दाखरस के कुण्डों में कोई दाख न रौंदेगा, क्योंकि मैं उनके हर्ष के शब्द को बन्द करूँगा।

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क्योंकि हेशबोन के खेत और सिबमा की दाख लताएँ मुर्झा गईं; जाति-जाति के अधिकारियों ने उनकी उत्तम-उत्तम लताओं को काट-काटकर गिरा दिया है, वे याजेर तक पहुँची और जंगल में भी फैलती गईं; और बढ़ते-बढ़ते ताल के पार दूर तक बढ़ गई थीं।

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खेती मारी गई, भूमि विलाप करती है; क्योंकि अन्न नाश हो गया, नया दाखमधु सूख गया, तेल भी सूख गया है।

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