यशायाह 24:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

पृथ्वी शून्य और सत्यानाश हो जाएगी; क्योंकि यहोवा ही ने यह कहा है।

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यशायाह 24:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 24:3 पर टिप्पणी: पृथ्वी शून्य और सत्यानाश हो जाएगी; क्योंकि यहोवा ही ने यह कहा है।

सीधी स्पष्ट बात यही है: यह शास्त्र पृथ्वी के अंत और ईश्वर के निर्णयन terminating घटना को दर्शाता है। प्रभु के आदेश से सभी स्थिरताएँ टूटेंगी और नाश होगा; पर यह नश्वरता का एक संकेत नहीं कि ईश्वर का प्रेम और दया समाप्त हो गई है, बल्कि न्याय की पूर्ण व्यवस्था के भाग के रूप में देखा जाना चाहिए।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यशायाह प्रत्यक्ष रूप से बाइबल की भविष्यवाणी-ग्रंथ है, जिसमें एक प्रेरक कारण है कि परमेश्वर के सामने सर्वथा निर्भर रहने योग्य विश्व संरचित है। इस अध्याय में यशायाह अनुभव करता है कि परमेश्वर की महिमा सभी भू-सम्पदा से ऊँची है और मानव-सभ्यता के कुछ स्थिर प्रतीक क्षण भर के लिए भी टिक नहीं पाते। इस संदर्भ में 24:3 एक व्यापक चेतावनी है: पृथ्वी का विनाश तब तक चल सकता है जब तक परमेश्वर की इच्छा नहीं बदली जाती।

व्याख्यात्मक बिंदु

  • नीति बनाम क्रियान्वयन: यह शास्त्रीय शब्द-चित्र बताता है कि पृथ्वी के अंत के पीछे एक क्रमबद्ध नियम-क्रम है। यहोवा के कथन के बिना कुछ भी नहीं घटेगा; निर्णय उसकी इच्छा के अनुसार होगा।
  • न है कि पृथ्वी समाप्ति के समय से बच पाए; यह आख़िर-परिणाम की पुष्टि है—जो व्यवस्था में एकनिष्ठ है।
  • नवीन आस्था: इस अन्तिम अभिज्ञान में भी उद्धार और न्याय की आशा बची रहती है; परमेश्वर स्वयं एक क्रम में पुनः स्थापना कर सकते हैं।

संक्षिप्त विचार धाराएं

  • ईश्वर के निर्णय सार्वभौमिक और अंतिम हैं।
  • भौतिक विश्व की स्थिरता अस्थायी है; परमेश्वर की योजना ही स्थिर है।
  • न्याय और उद्धार एक साथ चलते हैं; यह आस्था की चोट नहीं, बल्कि प्रेरणा है।

अन्य संबंधित आयतें और तात्पर्य

यशायाह 13:9— भविष्‍य में परमेश्वर के बिगड़ते क्रोध की घड़ी; यह भी ब्रह्माण्डीय न्याय का संकेत है। यह समझाता है कि तब प्रभु किस प्रकार पृथ्वी को शुद्ध करेगा।

रोमियों 8:20-22— सृृष्टि को भी उद्दीपन और परिवर्तन की इच्छा है; उद्देश्य यह है कि सृष्टि नया जन्म पाये।

भजन 46:2-3— विपत्ति के समय परमेश्वर निराकार नहीं; वह हमारे साथ रहता है और भयानक प्रलय में भी साहस देता है।

व्यावहारिक निष्कर्ष

1) खड़े होकर निश्चय करें कि परमेश्वर के निर्णयन में जीवन की स्थिरता केवल वही दे सकता है जो ईश्वर को मानता है।

2) पृथ्वी और सांसारिक संपदा के प्रति मोह कम करें; परमेश्वर की महिमा और सत्य में ही जीवन की सुरक्षा है।

3) कठिनाइयों में धैर्य रखें; भविष्य की आशा इस बात पर टिकी है कि ईश्वर न्यायपूर्ण रूप से फिर से स्थापित करेगा।

डायरेक्ट उद्धरण (नोट)

यह लेख Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणी लेखों के संकुल से निर्भर है। नीचे केवल आवश्यक जगहों पर छोटे उद्धरण दिए जाते हैं:

“The earth shall be utterly empty, and utterly spoiled: for the LORD hath spoken it” — यह भाव वहाँ स्पष्ट है कि परमेश्वर के शब्द से ही व्यवस्था प्रभावित होती है।

उद्धरण के स्वरूप में ऊपर उल्लिखित पंक्तियों का सटीक संदर्भ वहीं के अभिप्राय को दर्शाते हैं; यदि आप पूर्ण टिप्पणियाँ चाहते हैं, तो इन आलोचनात्मक टीकों को उनके मूल लेखन में देखें।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 24:3 समानांतर पद और संबंधित वचन

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