Old Testament
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यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66



यशायाह 24:15 का अर्थ और संदर्भ
इस पद में कहा गया है कि लोगों को पृथ्वी के उत्तरी, दक्षिणी और दूर-दूर के द्वीपों में प्रभू के महिमा और परमेश्वर के नाम की स्तुति करनी चाहिए। सरल शब्दों में इसका केंद्रीय संदेश है: परमेश्वर की महिमा हर जगह, हर समुदाय में प्रकट हो और उसका नाम उच्च माना जाए।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यशायाह 24 अध्याय को सामान्यतः “यशायाह की आपत्ति-घटना” के रूप में पढ़ा जाता है, जिसका स्वरूपी निकाय विश्व-व्यापी प्रलय और उसकी प्रतिक्रिया के बिंदु हैं। यह खण्ड एक परमेश्वर की सार्वभौमिक शासन और न्याय का गहन उद्घोषणा है, जिसमें सभी राष्ट्र और द्वीपों तक प्रभु की महिमा फैलने की आशा व्यक्त होती है। यह उद्धृत पाठ यह बताता है कि ईश्वर का नाम सब जगह सम्मानित होना चाहिए, भले ही लोग उसकी साक्षी को न मानें।
הinterpretive observations (व्याख्यात्मक नोट)
संकेतित पाठ से जुड़ाव (एक छोटी सूची)
संकेतांक विश्वव्यापी प्रसंग की पुष्टि करते हैं कि परमेश्वर की महिमा सीमा-रहित है और उसकी पहचान हर जगह होनी चाहिए।
पक्का takeaway
खुद के जीवन में हमारी भूमिका यह है कि हम ईश्वर के नाम को अपने व्यवहार, जिक्र और समाज-सम्पर्क में सामान्य बना दें—यही वैश्विक महिमा का भागीदारी है।
तीर्थ-वाचन और पारस्परिक संदर्भ
ये पद अन्य आयतों से जुड़ते हुए जीवन-आचरण के बारे में स्पष्ट दृष्टिकोण देता है: प्रभु की महिमा को गले लगाकर, हम न्याय, दयालुता और सत्य के मार्ग पर चलते हैं।
अवश्य-उद्धृत टिप्पणीकारों से संक्षिप्त संकेत:
Matthew Henry (संक्षेप): परमेश्वर की महिमा हर जाति के लिए है; उसके नाम का गुणानुवाद विश्वस्तर पर प्रचारित होना चाहिए।
Albert Barnes (संक्षेप): यह उद्घोषणा इस बात पर बल देती है कि ईश्वर का शासन सार्वभौमिक है और उसकी पवित्रता हर जगह मान्य होनी चाहिए।
Adam Clarke (संक्षेप): यह प्रकरण ईश्वर के महान कार्यों की सार्वभौमिकता को दर्शाता है और नये युग की आशा को समर्थित करता है।
कुल मिलाकर, यशायाह 24:15 एक विश्व-व्यापी आह्वान है: हर देश-समाज में ईश्वर की महिमा को मानो और उसके नाम का गुणानुवाद करो।