यशायाह 24:20 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वह मतवाले के समान बहुत डगमगाएगी और मचान के समान डोलेगी; वह अपने पाप के बोझ से दबकर गिरेगी और फिर न उठेगी।

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यशायाह 24:20 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 24:20 का संदर्भ और अर्थ

यशायाह 24 पूरी तरह विश्व के अंत-काल के क्रिया-कलापों और परमेश्वर के सिंहासन के लिए एक व्यापक आपदा-वर्णन है। इस अध्याय में पृथ्वी के समस्त हिस्सों की अशांति, जड़-चूर होकर गिरना, और मानव-पूर्वक दुष्कर्मों का परिणाम उद्घाटित होता है। इस पंक्ति में कथन है किignation, वह मतवाले के समान बहुत डगमगाएगी और मचान के समान डोलेगी; वह अपने पाप के बोझ से दबकर गिरेगी और फिर न उठेगी। यह एक संकेत है कि परमेश्वर का न्याय पाप के ऊपर स्थायी असर डालता है और मानव-प्रयास कितने भी मजबूत क्यों न हों, अंततः निर्बल और आत्म-विश्वासहीन हो जाते हैं।

मुख्य अर्थ

यह वाक्य बताता है कि पाप और दुष्कर्मों के कारण विश्व-व्यवस्था अस्थिर हो जाएगी। “मतवाला” और “मचान” जैसे रूपक बताते हैं कि सामान्य स्थिरता और सत्ता-सम्भावना क्षणभर में टूट जाते हैं। परमेश्वर के निर्णय में स्थिरता की कमी नहीं है; पाप के बोझ से दबे मानव-समुदाय का गिरना दिखाता है कि न्याय के दिन सारी सुरक्षा नष्ट हो जाएगी और उठना संभव नहीं रहेगा।

तीन प्रमुख थीम

  • निष्कासन और अस्थिरता: समाज, सत्ता और शक्तियाँ एक-एक कर डगमगेंगी और अंततः ढह जाएँगी।
  • पाप का भार: बुराई का वास्तविक वजन सिर उठाकर परिणाम देता है; नाते-रिश्ते और संस्थाएं भी इससे प्रभावित होंगी।
  • निराशाजनक निर्भरता बनाम ईश्वर-विश्वास: मनुष्य की शक्तियाँ भले क्यों न हों, परमेश्वर के न्याय के सामने सब कुछ क्षीण पड़ जाता है।

अनुशासन और क्रिया-कलाप (Cross-references)

1) यशायाह 13:11 — परमेश्वर अपने न्याय के भय से पृथ्वी-राज्यों को क्रमबद्ध रूप से चिह्नित करता है; यह verse उसी विषय को पुष्ट करती है कि सत्ता और सुरक्षा केवल परमेश्वर के निर्णय से संचालित होती है।

2) दानिय्येल 2:34–35 — एक विशाल संरचना ढह जाने की imagery में मानव-राज्य और जेल-राज्य की अस्थिरता दिखती है, जिस प्रकार यहाँ है।

3) 1 कुरिन्थian 1:27 — परमेश्वर वे चीजें चुनते हैं जो विश्व को नीचा दिखाती हैं, ताकि न भूषणा मानव-विश्वास में ईश्वर पर निर्भर रहे।

व्यावहारिक विचार

हम इस अंश से यह सीखते हैं कि संसार के बाहरी ठहराव और शक्तियाँ क्षण-भर के लिए टिक सकती हैं, परन्तु परमेश्वर के न्याय के समय में केवल वही स्थायित्व रहता है जो 그의 वचन के अनुसार चलता है। इसलिए हमारे भरोसे का आधार आत्म-प्रशंसा या सांसारिक सफलता पर नहीं, बल्कि ईश्वर के सच्चे मार्ग पर होना चाहिए। अगर हम पाप के बोझ से दबना महसूस करें, तो कुशलता से लौटना और परमेश्वर की कृपा में आश्रय पाना ही सुरक्षित मार्ग है।

संक्षिप्त समेकन

यशायाह 24:20 एक दृढ़ निष्कर्ष देता है— जब कुरीतियाँ अपने चरम पर पहुँचती हैं, तब मानव व्यवस्था डगमगाती है और गिर पड़ती है, क्योंकि यह सब पाप के कारण है। परन्तु परमेश्वर का न्यायप्रिय मूर्तिमान होना ही विश्व के उद्धार की आशा का स्रोत है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 24:20 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यशायाह 19:14 (HINIRV) »
यहोवा ने उसमें भ्रमता उत्‍पन्‍न की है*; उन्होंने मिस्र को उसके सारे कामों में उस मतवाले के समान कर दिया है जो वमन करते हुए डगमगाता है।

दानिय्येल 11:19 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
दानिय्येल 11:19 (HINIRV) »
तब वह अपने देश के गढ़ों की ओर मुँह फेरेगा, और वह ठोकर खाकर गिरेगा, और कहीं उसका पता न रहेगा।

यशायाह 29:9 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 29:9 (HINIRV) »
ठहर जाओ और चकित हो! भोग विलास करो और अंधे हो जाओ! वे मतवाले तो हैं, परन्तु दाखमधु से नहीं*, वे डगमगाते तो हैं, परन्तु मदिरा पीने से नहीं!

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