Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 11:1 यूहन्ना 11:2 यूहन्ना 11:3 यूहन्ना 11:4 यूहन्ना 11:5 यूहन्ना 11:6 यूहन्ना 11:7 यूहन्ना 11:8 यूहन्ना 11:9 यूहन्ना 11:10 यूहन्ना 11:11 यूहन्ना 11:12 यूहन्ना 11:13 यूहन्ना 11:14 यूहन्ना 11:15 यूहन्ना 11:16 यूहन्ना 11:17 यूहन्ना 11:18 यूहन्ना 11:19 यूहन्ना 11:20 यूहन्ना 11:21 यूहन्ना 11:22 यूहन्ना 11:23 यूहन्ना 11:24 यूहन्ना 11:25 यूहन्ना 11:26 यूहन्ना 11:27 यूहन्ना 11:28 यूहन्ना 11:29 यूहन्ना 11:30 यूहन्ना 11:31 यूहन्ना 11:32 यूहन्ना 11:33 यूहन्ना 11:34 यूहन्ना 11:35 यूहन्ना 11:36 यूहन्ना 11:37 यूहन्ना 11:38 यूहन्ना 11:39 यूहन्ना 11:40 यूहन्ना 11:41 यूहन्ना 11:42 यूहन्ना 11:43 यूहन्ना 11:44 यूहन्ना 11:45 यूहन्ना 11:46 यूहन्ना 11:47 यूहन्ना 11:48 यूहन्ना 11:49 यूहन्ना 11:50 यूहन्ना 11:51 यूहन्ना 11:52 यूहन्ना 11:53 यूहन्ना 11:54 यूहन्ना 11:55 यूहन्ना 11:56 यूहन्ना 11:57



यूहन्ना 11:17 — तत्काल प्रकरण का आरम्भण
यीशु का आगमन यहूदियों की घड़ी में एक विलंबित दुखद घटना के बीच हुआ: लार😀ट्ठुस की मृत्यु के चार दिन बीत चुके थे और कब्र की स्थिति स्पष्ट करती है कि मृतक अब शुद्ध देहभाव से मुक्त हो चुका है। पाठ यह बताता है कि यीशु तब पहुँचे जब लोगों के मन में आशंका और निराशा से भरा अंधकार था, पर उनके शब्द और कर्म जीवन की आशा का प्रकट उजाला बनकर सामने आते हैं।
कथन से जो ज्ञान मिलता है: परमेश्वर के ऊपर विश्वास और उद्धार की योजना
इस वाक्य में दिखता है कि ईश्वर का मनुष्य के जीवन में समय की कसौटियाँ नहीं रोकतीं। चार दिनों का अवकाश यह दर्शाता है कि मरने के बाद की स्थिति स्थिर है और लोग उसे सामान्य समझते हैं, पर प्रभु की शक्ति उन सीमाओं को भी तोड़ देती है। यह घटनाक्रम विश्वास की कसौटी है: क्या हम उस ईश्वर के लिए अपने दुख और कठिनाई को भी खोलकर रखते हैं, जो दे सकता है और दे सकता है।
महत्वपूर्ण शब्दों और तस्वीरों की स्पष्टता
अनुसंगित विवरण और अन्य संदर्भ
यह ఘటన संस्कारिक भावनाओं के बजाय विश्वास के प्रयोग को प्रेरित करती है, जैसे कुलीन परिवार के बीच भी यीशु की उपस्थिति विशाल परिवर्तन की राह खोलती है। अन्य जगहों पर भी यीशु के विश्वासयोग्यों के साथ संघर्ष, शोक और जीवित रहने के चमत्कार मिलते हैं—जो यह दिखाते हैं कि ईश्वर की शक्ति जीवित रूप से प्रभाव डालती है।
संबद्ध आयतें—समझ की गहराई के लिए
1) प्रेरितों के बीच विश्वास बनाम संदेह: जब यीशु मयके से लौटे, उनके अनुयायियों के मन में संदेह था, पर यीशु ने जीवन को स्थिति के साथ बाँधकर दिखाया।
2) जीवन की अंतर्निहित शक्ति: उद्धारकर्ता आत्म-विश्वास के साथ कहते हैं कि मैं जीवन और मृत्यु का प्रभु हूँ, जिससे मरने वाले भी लौट सकते हैं।
3) पुनर्जीवन और नया जीवन: यह चमत्कार भविष्य के पुनर्जीवन की पूर्वरूपरेखा बनती है, जिसमें विश्वास से जीवन का नया अर्थ मिलता है।
आज के पाठक के लिए सीखा-उपयोगी निष्कर्ष
- कठिन समय में भी ईश्वर की समय-सारिणी पर भरोसा रखें। यह घड़ी विपरीत दिख सकती है, पर प्रभु के उद्घोष से जीवन की दिशा बदली जा सकती है।
- मरन के बाद की उम्मीद किस प्रकार वास्तविक जीवन की सुरक्षा बनती है—आस्था के केंद्र में यही है कि ईश्वर हमारे साथ है और सीमाओं को भी पार कर सकता है।
सार-संयोजन
फिर यीशु को आकर यह मालूम हुआ कि उसे कब्र में रखे चार दिन हो चुके हैं। इस क्षण में प्रभु की महिमा और विश्वास की आवश्यकता स्पष्ट होती है: परमेश्वर की शक्ति समय-सीमा से मुक्त है और जीवन को नया रूप दे सकती है।
क्रॉस-रेफरेंसेज और उनके तात्पर्य
– अन्य घटना-स्थलों में भी यीशु का चमत्कार और जीवन-शक्ति के संकेत मिलते हैं; विश्वास की परीक्षा कर जीवन को उद्धार की रोशनी देता है।
– पुनर्जीवन के संदेश से जुड़ी बातें: मरघट के पास भी आशा की किरण दिखती है, जो जीवन के स्रोत के रूप में मसीह को प्रस्तुत करती है।
नोट: नीचे उद्धृत प्रेरित-व्याख्यानों से किसी भी सटीक वाक्यांश को क्लिप किया गया है, ताकि पाठक मूल भाव और संदर्भ को समझ सकें।