Old Testament
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यूहन्ना 11:1 यूहन्ना 11:2 यूहन्ना 11:3 यूहन्ना 11:4 यूहन्ना 11:5 यूहन्ना 11:6 यूहन्ना 11:7 यूहन्ना 11:8 यूहन्ना 11:9 यूहन्ना 11:10 यूहन्ना 11:11 यूहन्ना 11:12 यूहन्ना 11:13 यूहन्ना 11:14 यूहन्ना 11:15 यूहन्ना 11:16 यूहन्ना 11:17 यूहन्ना 11:18 यूहन्ना 11:19 यूहन्ना 11:20 यूहन्ना 11:21 यूहन्ना 11:22 यूहन्ना 11:23 यूहन्ना 11:24 यूहन्ना 11:25 यूहन्ना 11:26 यूहन्ना 11:27 यूहन्ना 11:28 यूहन्ना 11:29 यूहन्ना 11:30 यूहन्ना 11:31 यूहन्ना 11:32 यूहन्ना 11:33 यूहन्ना 11:34 यूहन्ना 11:35 यूहन्ना 11:36 यूहन्ना 11:37 यूहन्ना 11:38 यूहन्ना 11:39 यूहन्ना 11:40 यूहन्ना 11:41 यूहन्ना 11:42 यूहन्ना 11:43 यूहन्ना 11:44 यूहन्ना 11:45 यूहन्ना 11:46 यूहन्ना 11:47 यूहन्ना 11:48 यूहन्ना 11:49 यूहन्ना 11:50 यूहन्ना 11:51 यूहन्ना 11:52 यूहन्ना 11:53 यूहन्ना 11:54 यूहन्ना 11:55 यूहन्ना 11:56 यूहन्ना 11:57



यूहन्ना 11:3 पर टिप्पणी: पयासेमुख स्थिति और प्रभु की नज़दीकी
मुख्य बिंदु: यहाँ मर्यादा से भरे सरल संदेश में भी प्रेम और विश्वास की कसौटी छिपी है—यह नहीं कि मसीह तुरंत हर चीज़ को ठीक कर दें, बल्कि वह दिखाते हैं कि कैसे विश्वास, प्रेम और उपस्थिति एक साथ चलकर परमेश्वर के उद्देश्य को पूरा करते हैं.
पाठ का साहित्यिक संदर्भ
यूहन्ना 11 अध्याय में लज़रु की बीमारी का समाचार उनके प्रेम-पत्यों को मिला। verse 3 में उनकी बहनें यह संदेश लाकर यीशु को बताते हैं: "हे प्रभु, देख, जिससे तू प्यार करता है, वह बीमार है"। यह वक्तव्य दो चीज़ों पर प्रकाश डालता है: पहले, मित्रता और आत्मीय संबंध; द्वितीय, प्रभु की पहचान—वह है जो प्रेम का स्रोत है और जिसे बीमारी की स्थिति स्पष्ट रूप से बताई गई है। लेखक यूहन्ना ने इसे एक नाटक के रूप में रखा है ताकि पाठक यह समझ सकें कि वास्तविक संकट में भी प्रभु के प्रेम की पहचान कैसे होती है।
थीमेटिक संकेत और theological significance
धर्मशास्त्रीय आयाम
प्लग-इन विचारों के अनुसार, यह पाठ हमें स्मरण कराता है कि रोग और संकट के बीच भी प्रभु का प्रेम विश्वस्त है। कुछ पुरानी टिप्पणी कारों के अनुसार, यह घटना एक चिह्न है कि मृत्यु पर विजय वही अनुभव कराया जाएगा जो मरियम और मาร์था के बाद लज़र के पुनरुत्थान में प्रकट होगा। इसलिए यह पाठ विश्वास को स्थिर रखने का आह्वान है—कि हम संकट के समय भी प्रभु के प्रेम पर निर्भर रहें।
अन्य-पवित्र सन्दर्भों के साथ संबंध
- प्रेरित पथ पर ऐसे अवसर मिलते हैं जहां प्रभु की उपस्थिति परीक्षण-समय में विश्वास को प्रकट करती है (यूहन्ना 11:4, 11-14 में यीशु की शिक्षाएँ और शब्द)।
- यीशु के चमत्कारिक उपचारों की श्रृंखला में यह घटना बताती है कि मृत्यु से जीवन की ओर मार्ग प्रभु के शब्दों से होता है (यूहन्ना 11:25-26)।
- उद्धार की आशा का संकेत भी मिलता है कि प्रेम के साथ आने वाला प्रभाव अनंत जीवन के लिए पुनःजीवित करता है (यूहन्ना 11:26)।
आत्म-चिंतन के लिए प्रश्न
संक्षेप निष्कर्ष
यूहन्ना 11:3 हमें यह सिखाता है कि प्रेम का परिचय संकट के समय और प्रभु की पहचान—दोनों एक साथ मिलकर संकेत बनते हैं कि विश्वसनीय मित्र यीशु हमारे साथ है। यह न सिर्फ बीमारी की स्थिति से निपटने के बारे में है, बल्कि यह बताने वाला है कि परमेश्वर की योजना में प्रेम और विश्वास कैसे साथ चलकर महान चमत्कार की राह बनाते हैं।
पवित्र-ग्रंथ से क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके विचार
- प्रेरित लेखन में विश्वास और प्रेम के साथ प्रभु के आशीष मिलते हैं; यह कहानी लज़र के बारे में है, परन्तु हमारे जीवन के रोग-भाव के साथ भी प्रासंगिक है।
- मत्ती 11:28-30 के साथ तुलना में, क्रोध-नहीं, विश्वास-भारी आराम है जो यीशु देता है।
- रोम 8:28 के संदर्भ में, यह समझना संभव है कि संकट भी भगवान के उद्देश्य के लिए मार्गदर्शक हो सकता है, देखने के तरीके से नहीं।
कृपया ध्यान दें: नीचे उद्धृत सटीक टिप्पणी-उद्धरण केवल Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के उपलब्ध सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियों से हैं, यदि उपलब्ध हो:
— "The sickness is known to be unto death" (यदि उपलब्ध हो) आदि; अन्यथा संक्षेप सामान्य सार है।