Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 20:1 यूहन्ना 20:2 यूहन्ना 20:3 यूहन्ना 20:4 यूहन्ना 20:5 यूहन्ना 20:6 यूहन्ना 20:7 यूहन्ना 20:8 यूहन्ना 20:9 यूहन्ना 20:10 यूहन्ना 20:11 यूहन्ना 20:12 यूहन्ना 20:13 यूहन्ना 20:14 यूहन्ना 20:15 यूहन्ना 20:16 यूहन्ना 20:17 यूहन्ना 20:18 यूहन्ना 20:19 यूहन्ना 20:20 यूहन्ना 20:21 यूहन्ना 20:22 यूहन्ना 20:23 यूहन्ना 20:24 यूहन्ना 20:25 यूहन्ना 20:26 यूहन्ना 20:27 यूहन्ना 20:28 यूहन्ना 20:29 यूहन्ना 20:30 यूहन्ना 20:31



यूहन्ना 20:13 पर टिप्पणी: क्यों यह क्षण है, क्यों मायने रखता है
यह अंश पवित्र सृष्टि की नई आशा का आरंभ दिखाता है। यीशु की क्रूसीय मृत्यु के पश्चात माईया मगदली और दूसरे स्त्रियाँ प्रभु के कब्र से लौट कर शांति की उम्मीद लेकर आती हैं, और वे एक नया संदेश पाती हैं: मृत्युभय से मुक्त हो जाने के बाद भी यीशु अभी जीवित हैं। यह वाक्य उन दो प्राकृतिक भावनाओं को उजागर करता है— दुख और भ्रम बनाम विश्वास की पहली स्थिरता— कि प्रभु किन रास्तों से अपने अनुयायियों तक पहुँचे।
परिप्रेक्ष्य का संक्षेप
शास्त्र के अनुसार हाल का दृश्य मुक्ति-संदेश का आरम्भ है। मरियम मगदली ने कब्र से आते ही देखा कि पत्थर हटाया गया है, और वह विचलित होकर भगवान के स्थान पर रोती है। उनके प्रश्न में कैसी प्यास है— प्रभु कहाँ गए? यह दृश्य दिखाता है कि यीशु की उपस्थिति पहले मानवीय स्मृतियों एवं आँसू के बीच कैसे प्रकट होती है, और कैसे ईश्वर स्वयं अपने बच्चों के दुख की दिशा बदल देते हैं।
मुख्य संदेश
1) ईश्वर हमारी पीड़ा के बीच भी सक्रिय रहता है: कब्र से उठना और फिर बताना कि “उसे उठा ले गए हैं”—यह पक्का संकेत है कि प्रभु का पुनर्जीवन और कब्र की खोज एक नया सत्य है जो शोक को भी आशा में बदल देता है।
2) यीशु के साथ व्यक्तिगत संबंध की पुनः स्थापना: महिलाएँ見 दिखाती हैं कि मसीह के साथ नज़दीकी कभी-भी समाप्त नहीं होती; वह पहचान के मार्ग खोलता है और उद्धार की दिशा दिखाता है।
3) पहले कदम पर तीर्थयात्रा में विश्वास की वृद्धि: सूचना की पहली प्रतिक्रिया जैसे- “उन्होंने मुझे राजा नहीं पहचाना”—परन्तु तथ्य यह है कि प्रभु ने अपने आप को प्रकट करके शांति और विश्वास का संदेश दिया।
नींवभूत विषय और अनुशंसा
इस वाक्य में दो प्रचलित थीम दिखती हैं: पहली— स्त्री-गवाहों के माध्यम से निर्गमन का संदेश; दूसरी— यीशु की व्यक्तिगत उपस्थिति और आशीर्वाद का पुनःप्रकट होना। Matthew Henry और Albert Barnes जैसे पुरानी-प्रचलित टिप्पणीकार इसे गहराई से देखते हैं: एक ओर वे कहने से संदेश देते हैं कि भ्रम के समय भी परम-प्रभु की योजना चलती है, दूसरी ओर वे यह दिखाते हैं कि आराधना और पहचान के लिए क्रमवार स्पष्टीकरण जरूरी है। Adam Clarke भी यह मानते हैं कि कब्र की खोज में यह घटनाक्रम यह दिखाता है कि मसीह की सत्ता मृत्यु पर भी है और वह जीवित हैं।
क्रॉस-रेफरेंसेज (Cross-References) और उनका छोटा सार
इन संदर्भों के माध्यम से स्पष्ट होता है कि उद्धार का संदेश मात्र शब्दों से नहीं, बल्कि जीवित अनुभवों और प्रभु की व्यक्तिगत उपस्थिति से चलता है।
मनन और मार्गदर्शन
हमारे आत्मिक जीवन में यह घटना याद दिलाती है कि झटके, दुख और भ्रम के बीच भी परमेश्वर की योजना और उपस्थित हैं। अगर किसी समय हमारी आँखें खुलनी कम हों, तो भी प्रभु हमसे संबोधित करते हैं—जैसे उन्होंने मगदली माँ से पहचाने बिना नहीं गए। यह पाठ हमें सिखाता है कि ईमानदारी और रोना-धोना के बीच भी परमेश्वर के आशीर्वचन पर भरोसा रखें और प्रार्थना के साथ अपनी दृष्टि को नयी रोशनी में ले आएं।
संक्षिप्त वास्तविकता-नोट
“हे नारी, तू क्यों रोती है?” प्रभु की कोमल आवाज़ यहाँ भी है—जो हमें बताती है कि दया से भरा उत्तर निराशाजनक समय में भी मिलता है।