Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 20:1 यूहन्ना 20:2 यूहन्ना 20:3 यूहन्ना 20:4 यूहन्ना 20:5 यूहन्ना 20:6 यूहन्ना 20:7 यूहन्ना 20:8 यूहन्ना 20:9 यूहन्ना 20:10 यूहन्ना 20:11 यूहन्ना 20:12 यूहन्ना 20:13 यूहन्ना 20:14 यूहन्ना 20:15 यूहन्ना 20:16 यूहन्ना 20:17 यूहन्ना 20:18 यूहन्ना 20:19 यूहन्ना 20:20 यूहन्ना 20:21 यूहन्ना 20:22 यूहन्ना 20:23 यूहन्ना 20:24 यूहन्ना 20:25 यूहन्ना 20:26 यूहन्ना 20:27 यूहन्ना 20:28 यूहन्ना 20:29 यूहन्ना 20:30 यूहन्ना 20:31



यूहन्ना 20:25 का अर्थ और प्रेरणा
इस आयत में यीशु के मरे हुओं से लौट आने के बाद की हालत को सामने रखा गया है: शिष्य कहते हैं कि हमने प्रभु को देखा है; परThomas कहता है कि जब तक मैं उसकी कीलों के छेद देख नहीं लूँगा और वहाँ उँगली डालकर परीक्षण नहीं करूँगा, तब तक विश्वासी नहीं बनूँगा। यह घटनाक्रम विश्वास और प्रमाण के बीच एक संतुलन दिखाता है—विश्वास की निर्भरता कैसे आस्था से जुड़ती है और प्रमाण मिलने पर सुदृढ़ होती है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
योहन्ना 20 में प्रभु मरे हुए के बाद फिर जीवित हुए दिखते हैं, पर शिष्य एक प्रकार से आंखों से ही परीक्षण चाहते हैं। यीशु के पुनर् जन्म के बाद की यह चर्चा प्रकट करती है कि विश्वास कभी-कभी प्रमाण की कमी में भी जीवित रहता है; पर प्रमाण मिलने पर उसका टिकाव और बढ़ता है। Thomas, जिसे अक्सर "द्वेषी" कहा गया है, ने स्पष्ट प्रमाण चाहा—कीलों के छेद और शरीर पर उनका अनुभव—ताकि विश्वास बुद्धिमानी से समृद्ध हो सके।
interpretive observations
कथा से निकले बिंदु (थे़मेटिक लिस्ट)
अन्य संबंधित आयतें (संक्षेपित संदर्भ)
प्रत्येक संदर्भ में संक्षेप विश्लेषण:
व्यावहारिक निष्कर्ष
हम क्या सीखें? विश्वास के लिए अग्रसर रहने के बावजूद, परमेश्वर उन प्रमाणों को भी मानते हैं जो हमारे दिल से आते हैं। यदि आप भी परिस्थितियों में परेशान हों, तो परमेश्वर में विश्वास बनाए रखें; वह हमें सही समय पर स्पष्टता दे सकते हैं। वही जीवित संबंध जो शिष्य हिते हैं, वह आज भी हमारा मार्गदर्शन करते हैं।
टेक्स्ट-टू-क्रॉस रिफरेंस
यूहन्ना 20:29 (शिष्यत्व की पुष्टि), लूका 24:39-40 (प्रमाण और पहचान), मत्यु 28:16-20 (आज्ञा और शकील अनंत विश्वास) — इन क्रॉस-रेफरेंसों से यह स्पष्ट होता है कि विश्वास प्रमाण के साथ संतुलित और गहरी होती है; प्रभु के पुनर्जीवन का वास्तविक प्रभाव आज भी जीवन में प्रमाण की अपेक्षा के साथ सहर्ष जुड़ता है।
उद्धरण संकेत
यहां पर लेखन में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के कोई प्रत्यक्ष पूर्ण उद्धरण नहीं दिए गए हैं; केवल उन की ध्वनियाँ और विचारों के अनुरूप संकल्पनाओं का संकलन किया गया है।