Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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पदार्थ: यूहन्ना 20:21
यीशु ने फिर उनसे कहा, “तुम्हें शान्ति मिले; जैसे पिता ने मुझे भेजा है, वैसे ही मैं भी तुम्हें भेजता हूँ।”
तत्काल संदर्भ और घटना का सेटिंग
यह उद्धरण पवित्र दिन के बाद का है—मृत्यु पर विजय के बाद यीशु ने अपने शिष्यों के बीच फिर से प्रकट होकर उनका मनोबल बढ़ाया। दो बार इन शब्दों के साथ—“तुम्हें शान्ति मिले” और “तुम्हें भेजता हूँ”—कह कर यीशु शिष्यों के लिए एक नई भूमिका निर्धारित करते हैं: सुरक्षा और मिशन, एक-दूसरे के बीच भरोसा और कार्य की दृष्टि।
ईश्वर, विश्वास और उद्धार की दृष्टि
यह वाक्य दिखाता है कि शान्ति उन लोगों के लिए है जो परमेश्वर के भेजे हुए हैं। पिता द्वारा भेजे जाने की संकल्पना यह बताती है कि उद्धार और रचना का क्रम परमेश्वर की योजनाओं से संचालित है। यीशु अपने आशीर्वाद-भरे शब्दों के साथ एक दिव्यता-सम्बन्धी भेजावन की पुष्टि करते हैं: विश्वासियों को शत्रु-जनित भय से मुक्त कर, ईश्वर की सच्ची शान्ति के साथ उनके जीवन को आगे बढ़ाने का दायित्व दिया गया है।
शब्दों और छवियों की सरल व्याख्या
संबंधित पद और उनके संदर्भ
प्रेरणा के लिए नीचे दिए गए पाठ—
2–3 मिनी Cross-References और व्याख्या
1) युह 14:27 में यीशु शांति के स्रोत और उसका निवास बताते हैं—यह शांति परमेश्वर की उपस्थिती में है। यह हमारे भीतर अस्थिरता के समय में भी स्थिरता बनाकर रखती है।
2) मत्ती 28:19–20 में शिष्य के मिशन को राष्ट्र-परिस्थितियों तक फैलाने का आदेश है—यह “जैसे पिता ने मुझे भेजा” के कार्य के समान है, जहाँ शिष्य यीशु के नाम पर प्रेरित बनते हैं।
3) रोम 15:13 में विश्वास के द्वारा मिलने वाली आशा और शांति व्यक्त है—जो समुदाय और व्यक्तिगत जीवन में बड़प्पन लाती है।
आज के लिए अनुप्रयोग
यूहन्ना 20:21 हमें बताता है कि ईश्वर के भेजे हुए के रूप में हमारा जीवन एक शान्ति-आधारित मिशन है। कठिन परिस्थितियों में भी शान्ति न खोएँ; विश्वास का आधार यथासंभव दृढ़ रखें। यह शांति हमें एक-दूसरे के प्रति प्यार और सेवाभाव बढ़ाने, साझा मिशन में एकजुट रहने और संसार में उद्धार की खबर पहुँचाने के लिए प्रेरित करती है।
कथा-आधारित सार
पिता की निष्ठा और यीशु की सेवा का चक्र शिष्यों के लिए एक नया जीवन-सूत्र बनाता है: शान्ति का संरक्षण और समाज-उद्धार का मिशन। यह दोनों एक-दूसरे में गुँथे हैं—यदि हम शान्ति प्राप्त करें, तो हम दूसरों को भी भेजने में सक्षम बनते हैं; और यदि हम भेजे जाते हैं, तो शान्ति हमारे भीतर विवेक और धैर्य बढ़ाती है।
मूल उद्धरण (अगर उपलब्ध हो): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से इस पाठ के साक्ष्य-उद्धरणों के संक्षेप में सामान्य विचार प्राप्त होते हैं—परंतु स्पष्ट रूप से किसी पूर्ण पंक्ति को यहाँ नहीं दोहराया गया है।