Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 20:1 यूहन्ना 20:2 यूहन्ना 20:3 यूहन्ना 20:4 यूहन्ना 20:5 यूहन्ना 20:6 यूहन्ना 20:7 यूहन्ना 20:8 यूहन्ना 20:9 यूहन्ना 20:10 यूहन्ना 20:11 यूहन्ना 20:12 यूहन्ना 20:13 यूहन्ना 20:14 यूहन्ना 20:15 यूहन्ना 20:16 यूहन्ना 20:17 यूहन्ना 20:18 यूहन्ना 20:19 यूहन्ना 20:20 यूहन्ना 20:21 यूहन्ना 20:22 यूहन्ना 20:23 यूहन्ना 20:24 यूहन्ना 20:25 यूहन्ना 20:26 यूहन्ना 20:27 यूहन्ना 20:28 यूहन्ना 20:29 यूहन्ना 20:30 यूहन्ना 20:31



यूहन्ना 20:20 का अर्थ
यूहन्ना 20:20 में यीशु के जी उठने के बाद साक्षात्कार की घटनाओं के महत्त्व को सरल शब्दों में समझाते हुए कहा गया है कि यह देखकर चेलों के भीतर आनंद और विश्वास का एक नया प्रकाश हुआ। यीशु ने अपने हाथ और पंजर दिखाकर उन्हें आश्वस्त किया कि वे जीवित हैं और उनकी आशाओं का स्रोत सजीव है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
ईस्टर की रात के बाद की घटनाओं में यह दृश्य चेलों के बीच भय के वातावरण को चिर-स्थिर कर देता है। मरियम और अन्य महिलाओं के संदेश के साथ, यह घटना पहली बार चेलों को यह विश्वास दिलाती है कि यीशु मरे नहीं हैं, वे जीवित हैं। साथ ही यह चेलों के लिए एक दूत-प्रमाण के समान है कि यीशु ने उनकी शंका को दूर कर दिया है और भविष्य के कार्यों के लिए उन्हें निमित्त किया है।
मुख्य interpretive observations
संकेतित थीम्स (छोटा सार)
अनुचित cross-references (संक्षेप में समझाते हुए)
— रोम 6:5-8 से संबंधित विचार: बपतिस्मा के माध्यम से मरे और जी उठे सदस्यत्व की प्रतिमा, जो इस घटना के साथ मेल खाती है कि अब नया जीवन शुरू हुआ है।
— मती 28:16-20 के विद्यानुसार: सभी चेलों को धरोहर बनकर भेजे जाने वाले निर्देश और प्रभु के साथ बराबर उपस्थिति की पुष्टि यह अनुरूप है कि यीशु संसार के लिए भेज रहा है।
— लूका 24:36-49 से जुड़ाव: यीशु के प्रकट होने के समय उनका हाथ-पंजर दिखाकर विश्वास बढ़ता है, और धैर्य के साथ शिष्य मिशन की तैयारी करते हैं।
व्यावहारिक निष्कर्ष
1) विश्वास में पुष्टि मिलने पर बीच की चिंता घटती है और जीवन का उद्देश्य स्पष्ट होता है। 2) दुनियावी भय के बावजूद प्रभु के साथ रहने का अनुभव शांति देता है। 3) पवित्र योजना के लिए ऊर्जा मिलती है—चाहे प्रकाशित संदेश हो या व्यक्तिगत सेवा का कार्य।
मूल संदर्भ में देखें तो यह दृश्य चेलों के लिए एक ठोस प्रमाण और प्रेरणा है कि यीशु जीवित हैं—और उनके हाथ-पंजर इस सत्य के साक्षी हैं।
उद्धृत टिप्पणीकारों के विचार (संक्षेप) और उल्लेख
इस पाठ पर आधुनिक हिंदी टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सामान्य विचारों के आधार पर एक संयुक्त सार प्रस्तुत किया गया है। आवश्यकता अनुसार इन विद्वानों के शब्द-चिह्नों से प्रासंगिक छोटे उद्धरण आवश्यक रूप से उल्लेखित किए जाते हैं:
उद्धरण संकेत: यदि इन सामान्य टिप्पणियों से किसी एक के संक्षिप्त अभिवाक्शन का प्रयोग किया गया हो, तो उसे संदर्भित किया गया है।