न्यायियों 14:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

शिमशोन तिम्‍नाह को गया, और तिम्‍नाह में एक पलिश्ती स्त्री को देखा।

न्यायियों 14:1 पद-दर-पद बाइबल टीका

न्यायियों 14:1 का स्पष्ट अर्थ

इस पद का सीधा आशय है कि श Shimशोन ने तिम्नाह नामक पलिश्ती नगर में एक पलिश्ती महिला को देखा और उससे मिलने का निर्देश मिला। यहाँ पहले कदम में बताना है कि यह घटना शिमशोन की दृष्टि और जोखिम उठाने की प्रवृत्ति को उजागर करती है, जो आगे उसकी जीवनयात्रा के लिए निर्णायक मोड़ बनती है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

न्यायियों के समय इजरायल बारम्बार गिरहबद्धता से नीचे था और परलोकीय कुटुम्बी-राजाओं के बजाय न्यायप्रिय नेताओं की कमी थी। शिमशोन को नश्वर शक्ति दी गई थी, पर उसकी आध्यात्मिक discernment कमजोर रहा। तिम्नाह एक पलिश्ती समुदाय से है, जो उस समय इजरायली शहरों के लिए समस्याओं का कारण बना रहा था। यह मिलन एक नैतिक संकेत भी है कि शिमशोन की सरकार नियंत्रण से बाहर हो रही थी, और व्यक्तिगत इच्छा-शक्ति का दुरुपयोग क्यों असफलता का मार्ग बन सकता है।

मुख्य interpretive observations

  • यात्रा का चक्र: शिमशोन ने एक सार्वजनिक सभ्यता में एक स्त्री से मिलने का विचार किया, जो उसकी निरंतर जोखिम उठाने की प्रवृत्ति का संकेत देता है।
  • संयुक्त असुरक्षा: यह रिश्ते की किताब-सी घटना यह दर्शाती है कि क्यों यह शादी/निष्ठा संबंध असुरक्षित बन सकता है और किस तरह बाहरी लोगों के साथ संबंध नीतिगत अनुशासन का उल्लंघन कर सकते हैं।
  • आंतरिक संघर्ष: तिम्नाह के साथ जुड़ाव एक निजी इच्छा बनाम परमेश्वर की योजना के विचलन को दर्शाता है; यह शिमशोन की सशक्तिकरण-शक्ति के साथ नैतिक जिम्मेदारी की कमी को उजागर करता है।

छोटा थीमैटिक लिस्ट

  • धार्मिक समर्पण बनाम सांसारिक आकर्षण
  • नेतृत्व में जोखिम और दायित्व
  • कठिन निर्णयों में ईश्वर की योजना की अपेक्षा

अन्य प्रासंगिक पठन (Cross-references)

यहाँ तीन संदर्भ दिए जा रहे हैं जो इस अध्याय के थीम से मिलते-जुलते हैं:

  • गिनती 11:4-5 — मिस्र-रेणु और आध्यात्मिक चेतना के विघटन के संकेत; यह बताता है कि यहोवा के लोगों में बाहरी आकर्षण कैसे नकारात्मक प्रभाव छोड़ते हैं।
  • यहोवा 2:10 — निष्ठा के महत्व की प्रतीकात्मक चर्चा और साथी-धारणा के प्रभाव की चेतावनी।
  • नीतियों 14:2 — वचनबद्धता और सामाजिक-धार्मिक पवित्रता के निर्वाह का महत्त्व।

इन संदर्भों से समझ आता है कि बाहरी आकर्षण से निपटना, आचार-व्यवहार की पवित्रता और प्रभु की योजना के अनुरूप निर्णय लेना कितना आवश्यक है।

व्यावहारिक निष्कर्ष

इस पद से एक स्पष्ट पाठ यह है कि जीवन के निर्णयों में ईश्वर की आशीष के अनुरूप चलना चाहिए, न कि निजी आकर्षणों के वश में आकर मार्ग बदलना चाहिए। नियमों की पवित्र सीमा के भीतर जीवन जीना, और दूसरों के साथ संबंधों में परमेश्वर की इच्छाओं को प्रधान रखना बुद्धिमानी है।

उद्धरण नोट: इस पंक्ति के लिए मैथ्यू हेनरी, ऐल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के संकलनों से विशिष्ट वाक्यों का अनुपात नीचे दिया गया है, यदि उपलब्ध हों तो ध्यान से उद्धृत किए गए हैं:

इस हालिया प्रस्तुति में विशेष स्पष्ट उद्धरण नहीं दिए गए हैं; किन्तु समान विचारधारा के अनुसार उनके टिप्पणियों के स्वाभाविक सार का सम्मिश्रण किया गया है ताकि पाठक को ध्वनि तर्क और पवित्र कथा का एक संयुक्त आकलन मिल सके।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

न्यायियों 14:1 समानांतर पद और संबंधित वचन

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फिर वह बाला से पश्चिम की ओर मुड़कर सेईर पहाड़ तक पहुँचा, और यारीम पहाड़ (जो कसालोन भी कहलाता है) उसके उत्तरी ओर से होकर बेतशेमेश को उतर गया, और वहाँ से तिम्‍नाह पर निकला;

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एलोन, तिम्‍नाह, एक्रोन,

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तब परमेश्‍वर के पुत्रों ने मनुष्य की पुत्रियों को देखा, कि वे सुन्दर हैं; और उन्होंने जिस-जिस को चाहा उनसे ब्याह कर लिया।

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