Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 14:1 न्यायियों 14:2 न्यायियों 14:3 न्यायियों 14:4 न्यायियों 14:5 न्यायियों 14:6 न्यायियों 14:7 न्यायियों 14:8 न्यायियों 14:9 न्यायियों 14:10 न्यायियों 14:11 न्यायियों 14:12 न्यायियों 14:13 न्यायियों 14:14 न्यायियों 14:15 न्यायियों 14:16 न्यायियों 14:17 न्यायियों 14:18 न्यायियों 14:19 न्यायियों 14:20
न्यायियों 14:5 पर टिप्पणी — शक्ति के सामने साहस और अधीरता
मुख्य interpretive बिंदु: न्यायियों 14:5 में शिमशोन की कहानी स्पष्ट करती है कि परमेश्वर के चुने हुए व्यक्ति कभी-भी निर्बल नहीं होते, भले ही परिस्थितियाँ कितनी भी जोखिमपूर्ण क्यों न हों। यहाँ शिमशोन स्वयं को माता-पिता के साथ तिमनाह की दाख कीारी के पास ले जाते हैं और पास में एक सिंह गरज उठता है; यह घटना साधारण पाठ नहीं बल्कि उन घटनाओं के बीच एक संकेत है, जहाँ प्रभु की शक्ति साधारणता में संचरित होती है। इस दृश्य से यह सिद्ध होता है कि परमेश्वर अपने दिग्विजयी उद्देश्य के लिए साधारण जोखिमों को भी असाधारणता में बदल देता है।
पाठिक संदर्भ की रचना
तिमनाह का क्षेत्र शिमशोन के समय एक शांति-भरा कृषि क्षेत्र था, पर यहाँ एक रहस्यपूर्ण दुष्ट शक्ति का प्रवेश होता है—एक शेर का गरजना। यह कहावत नहीं कि शेर उसे नष्ट करने आया, बल्कि यह एक प्रकार का प्रतीक है जो आगे आने वाली परीक्षा के लिए तैयारी का संकेत देता है। माता-पिता के साथ साथ जाना और शेर के पास आना दर्शाता है कि शिमशोन की दृष्टि में धर्म-संरक्षण का दायित्व है: वह अपने परिवार के साथ अपने देश की सुरक्षा के लिए आगे बढ़ता है, और उसी समय इस घटना में परमेश्वर की योजना बताई जा रही है कि कैसे शक्तिशाली प्राणालय भी प्रभु से सुकृत्य नहीं रोकते।
धर्मशास्त्रीय महत्त्व
यहाँ शेर का सामना एक प्रकार का परीक्षण है—यह दिखाता है कि परमेश्वर अपनी बुलाहट के समय हर घड़ी में मार्ग प्रशस्त कर देता है, भले ही वह मार्ग जोखिमपूर्ण क्यों न हो। शिमशोन की कहानी में यह घटना उनके भविष्य के वचन-व्यवहार की एक पूर्व-चेतावनी हो सकती है: परमेश्वर के प्रेरित व्यक्ति से अपेक्षा है कि वे दायित्व के मार्ग पर चलते रहें, भले परिस्थितियाँ कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों।
बाइबलीय संगति (Cross-references) और संक्षिप्त व्याख्या
इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर के चुने हुए लोगों पर भरोसा करना और चुनौतीपूर्ण क्षणों में भी क्रमिक नेतृत्व को मानना इन महान उद्धारक उपक्रमों के संकेत हैं।
व्याख्यात्मक प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
न्यायियों 14:5 हमें सिखाता है कि परमेश्वर जब बुलाते हैं, तो वे आम रास्तों से ऊपर उठकर भी मार्गदर्शन देते हैं। शिमशोन के साथ यह घटनाक्रम एक संकेत है कि प्रभु की योजना में हमारी सीमाएँ मायने नहीं रखतीं; जो आवश्यक है, वह है विश्वास, obedience और धैर्य। इस कदम से जो संदेश मिलता है, वह यह है कि पराक्रम नहीं, परमेश्वर के साथ स्थिरता है जो हमें बड़े उद्देश्य तक ले जाती है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (Public-domain commentary से): Matthew Henry के अनुसार, परमेश्वर के साक्षात्कार और बुलाहट में मानव कमजोरी भी प्रभु के काम को आगे बढ़ाती है। Albert Barnes ने यह कहा है कि ऐसी घटनाओं में भी हमें सुरक्षा की आशा रहती है जब हम परमेश्वर की योजना के अनुरूप चलते हैं। Adam Clarke ने संकेत दिया है कि यह सब दृश्य दर्शाते हैं कि परमेश्वर अपने दत्तकार्य के लिए साधारण परिस्थितियों में भी चमत्कार कर सकता है।
नोट: ऊपर के उद्धरण विशिष्ट ग्रंथ-स्त्रोतों के संक्षिप्त सार हैं और पूर्ण टेक्स्ट उद्धरण नहीं दर्शाते।