Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 4:1 न्यायियों 4:2 न्यायियों 4:3 न्यायियों 4:4 न्यायियों 4:5 न्यायियों 4:6 न्यायियों 4:7 न्यायियों 4:8 न्यायियों 4:9 न्यायियों 4:10 न्यायियों 4:11 न्यायियों 4:12 न्यायियों 4:13 न्यायियों 4:14 न्यायियों 4:15 न्यायियों 4:16 न्यायियों 4:17 न्यायियों 4:18 न्यायियों 4:19 न्यायियों 4:20 न्यायियों 4:21 न्यायियों 4:22 न्यायियों 4:23 न्यायियों 4:24



न्यायियों 4:1 का सारहिं शब्दार्थ
इस पद का साधारण अर्थ है: जब एहूद मर गया, तब इस्राएलियों ने फिर यहोवा की दृष्टि में बुरा किया।
संदर्भ-संदर्भभूमि
जैसे-जैसे यहूदियों के नेता/जजों की कमी बढ़ती गई, समस्त समाज की नैतिक और धार्मिक दिशा भ्रष्ट हो उठी। यहोवा की दृष्टि में बुराई करना—अर्थात् उनके नियमों और उद्देश्य से विमुख होना—लगभग निरंतर मानव-स्वभाव की असफलता का संकेत है जब सही नेतृत्व गायब हो। न्यायियों के पुस्तक में यह क्रम बार-बार दोहराता है: निजी सुख-चैन के पीछे भागना, उपासना में विवेकहीनता, और परमेश्वर की आज्ञाओं से टकराव। इस verse में विशेष रूप से एहूद (यहोवा के लोगों में एक प्रमुख परमुख अधिकारी/जज) की मृत्यु के बाद की स्थिति का उल्लेख है, जो आत्मा-संरक्षण और सच्ची आराधना के लिए एक चेतावनी संकेत है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
1) नेतृत्व का खालीपन: जब एक सक्षम जज चला गया, तब यहोवा के लोकों में नैतिक संकल्प की कमी उजागर हो गई। 2) धर्म-संरक्षण की कमी: बुराई में वृद्धि से यह दर्शाता है कि धार्मिक-अनुशासन कमजोर हो गया। 3) संगठित भय का अभाव: प्रेरणा-शक्ति घटने पर समाज में अराजकता और दोष-निवारण की कमी दिखी। 4) यहोवा की दृष्टि की निरंतरता: यह कहानी उस तथ्य को रेखांकित करती है कि परमेश्वर अपने लोगों की दृढ़ता और विश्वास के आधार पर आशीष देता है, न कि सतहीत्ता पर।
टेमाटिक बिंदु
सहयोगी पद (क्रॉस-रेफरेंस) और संक्षिप्त व्याख्या
1) न्यायियों 3:12-14 — अल्पकालिक दबावों के बीच यहोवा कैसे हालातों को नियंत्रित करते हैं, यह दर्शाता है कि दुर्दशा के समय लोक एक-दूसरे के साथ मिलकर विनय से लौटते हैं।
2) न्यायियों 5:6-7 — समाज में सुरक्षा और शासन की कमी के कारण गीत-गाथाओं के माध्यम से स्मरण कैसे गूंजता है; यह बताता है कि उद्धार और पुनर्जागरण समुदाय के एकजुट होने से ही संभव है।
3) निकाय-उद्धार की पहली प्रेरणा: विश्वास के साथ आस्था और समर्पण से ही वास्तविक आशीष मिलती है; यह चरण न्यायियों की कथा में बार-बार उभरता है।
पवित्र विचारों का संक्षिप्त निष्कर्ष
यह verse यह स्पष्ट करता है कि नेतृत्व में कमी और धर्म-निष्ठा की कमी कैसे एक समुदाय को नष्ट कर सकती है, और यहोवा के दृष्टिकोण के विरुद्ध चलना कैसे सामूहिक बुराई को जन्म देता है। यदि हम विश्वास और पूजा में दृढ़ रहते हैं, तो सामाजिक बुराइयों के बीच भी परमेश्वर की कृपा पुनः आ सकती है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
- अपने नेताओं और गुरुजनों के प्रति सम्मान बनाये रखें और परमेश्वर के निर्देशों की निरन्तरता बनाए रखें।
- निजी और सामूहिक पूजा में सही निष्ठा बनाए रखें ताकि समाज में नैतिक संरचना स्थिर रहे।
नोट: यह व्याख्या Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke की सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणी-प्रणालियों से प्रेरित स्वर-रेखा को समेकित करती है।