Old Testament
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न्यायियों 10:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
अबीमेलेक के बाद इस्राएल को छुड़ाने के लिये तोला नामक एक इस्साकारी उठा, वह दोदो का पोता और पूआ* का पुत्र था; और एप्रैम के पहाड़ी देश के शामीर नगर में रहता था।
न्यायियों 10:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
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न्यायियों 10:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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न्यायियों 2:16 (HINIRV) »
तो भी यहोवा उनके लिये न्यायी ठहराता था जो उन्हें लूटनेवाले के हाथ से छुड़ाते थे। (प्रेरि. 13:20)

न्यायियों 3:9 (HINIRV) »
तब इस्राएलियों ने यहोवा की दुहाई दी, और उसने इस्राएलियों के छुटकारे के लिये कालेब के छोटे भाई ओत्नीएल नामक कनजी के पुत्र को ठहराया, और उसने उनको छुड़ाया।

न्यायियों 10:1 पर दृष्टि: एक नया उद्धारकर्ता-उठान
यह दृश्य इस्राएल के अवस्था-चक्र की एक नई चाल दिखाता है: एक कठिन समय के बीच एक नया उद्धारकर्ता, तोला नामक एक इस्साकारी, उठ खड़ा होता है। verse में कहा गया है कि अबीमेलेक के बाद उद्धार के लिए वह आया, और वह दोदो का पोता और पूआ का पुत्र था; एप्रैम के पहाड़ी देश के शामीर नगर में रहता था। यह विवरण एक संरचनात्मक और आध्यात्मिक धागा खोलता है—परिचित दासता के वर्षों के बाद परमेश्वर किस प्रकार लोगों के बीच काम करते हैं।
पाठ की प्रविष्टि: अध्याय के भीतर यह स्थान
न्यायियों के अध्याय 10 की कथा में अत्याचार, असहायता और पूनरुत्थान की आशा एक साथ दिखती है। जो लोग प्रभु के विरुद्ध टे्रमित होते हैं, वे अपने लिए नई मदद की प्रतीक्षा करते हैं। इस verse में हम देखते हैं कि परमेश्वर निर्दिष्ट समय पर एक सामान्य व्यक्ति को उठाते हैं—एक व्यक्तित्व जो इतिहास के पन्नों में छोटा हो सकता है, परन्तु ईश्वर की सूझ-बूझ से बड़ा प्रभाव डाल सकता है। तोला नामक यह उद्धारकर्ता-उठान एक संकेत है कि प्रभु अपने लोक के लिए एक नई राह बनाते हैं, भले ही वे प्रेरक नेता कितने भी असाधारण न हों।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
अनुदेश एवं तुलनात्मक पथ
अनुशंसा की जाती है कि इस verse की समझ में नीचे परस्पर सम्बन्धित पाठों को देखना लाभदायक है:
व्यवहारिक अनुप्रयोग
हम ठहराव और असहायता के बीच भी आशा की उम्मीद कैसे रखें? यह verse बताता है कि परमेश्वर कभी वीर-नेताओं के चरित्र-चरित्र पर नहीं, बल्कि उनके भरोसे और ईमान पर निर्भर रहते हैं। यदि हम कदम बढ़ाते हैं, भले हमारे पास सीमित साधन हों, तो परमेश्वर उन्हीं में से कुछ बड़े उद्देश्य निकाल लेते हैं। साथ ही, समुदाय के भीतर एक नई भूमिका की ज़रूरत—यह भी स्पष्ट है कि उद्धार किसी एक व्यक्ति के ऊपर नहीं, बल्कि समुदाय के साझा उत्तरदायित्व पर निर्भर है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
1) न्यायियों 3:15— प्रारम्भिक उद्धारक-उठान की प्रक्रिया/विधि पर विचार; 2) यूहना 1:14-18 के कुछ तत्व, जहाँ परिवार-जन और समुदाय से प्रेरणा मिलती है; 3) यशायाह 40:31— परमेश्वर के समर्थन से उठकर चलना।
ये संदर्भ बताते हैं कि उद्धारिता का मार्ग कितनी बार मानवीय क्षमताओं से परे होता है, और ईश्वर कैसे छोटे माध्यमों के माध्यम से बड़े उद्धार को संभव बनाते हैं।
संक्षेप में निष्कर्ष
न्यायियों 10:1 दृश्य हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर के हिसाब से उद्धार एक क्रमिक चक्र है—एक समय पर एक साधारण व्यक्ति, एक परिवार-रेखा, एक साधारण स्थान—और फिर देवशक्ति से प्रेरित परिवर्तन। यह छोटे से शुरू होकर बड़े परिणामों की ओर संकेत है, जिसने इस्राएल के लिए नई उम्मीद की किरण जलाई। यह संदेश आज भी relevant है: परमेश्वर हमारी असमर्थताओं के बीच भी काम करते हैं, जब हम क्रमिक भरोसे के साथ अपने हिस्से का कदम उठाते हैं।
मैथ्यू हेनरी, ऐल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायगुफ टिप्पणी-रेखाओं से संस्थित विचारों की मौन-चर्चा इस पंक्ति के भीतर मिलती है—कि उद्धार के लिए प्रभु की योजना प्रकृत व्यक्तित्वों से ऊपर है, और समुदाय की एकता से पूर्ण होती है।