Old Testament
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न्यायियों 10:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इस्राएलियों ने यहोवा से कहा, “हमने पाप किया है; इसलिए जो कुछ तेरी दृष्टि में भला हो वही हम से कर; परन्तु अभी हमें छुड़ा।”
न्यायियों 10:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
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न्यायियों 10:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 शमूएल 3:18 (HINIRV) »
तब शमूएल ने उसको रत्ती-रत्ती बातें कह सुनाईं, और कुछ भी न छिपा रखा। वह बोला, “वह तो यहोवा है; जो कुछ वह भला जाने वही करे।”

2 शमूएल 15:26 (HINIRV) »
परन्तु यदि वह मुझसे ऐसा कहे, 'मैं तुझ से प्रसन्न नहीं,' तो भी मैं हाज़िर हूँ, जैसा उसको भाए वैसा ही वह मेरे साथ बर्ताव करे।”

यहोशू 9:25 (HINIRV) »
और अब हम तेरे वश में हैं, जैसा बर्ताव तुझे भला लगे और ठीक लगे, वैसा ही व्यवहार हमारे साथ कर।”
न्यायियों 10:15 पर टिप्पणी — संदर्भ और अर्थ
यहोवा के साथ इस्राएली प्रभुता के संघर्षों में यहोवा से उद्धार के लिए निरंतर पुकार, पाप करने के बाद भी आशा बनाए रखती रही। न्यायियों 10:15 में यह स्पष्ट है कि इस्राएल ने अपने पाप स्वीकार कर लिए, और कह दिया कि यदि भगवान उनके लिए भला हो तो वही करें। यह एक सकारात्मक कबूल है जो प्रायः पाप के परिणामों से बच निकलने के लिए किया गया आह्वान नहीं, बल्कि एक आत्म-सम्वेधन है कि ईश्वर के अधिकार को मानते हुए उसकी कृपा के लिए स्थल बदला जाए।
मुख्य अर्थ
वाक्य का मूल भाव यह है: इस्राएल परमेश्वर के सामने अपनी असफलता स्वीकार कर रहे हैं और उसकी दयालुता पर निर्भर रहने की इच्छा जता रहे हैं। यह यहूदियों के लिए एक पुनर्संयोजन का संकेत है—जो पाप के कारण हुए संकट से उभर कर ईश्वर की सहायता चाहते हैं।
केंद्रीय विषय
संबद्ध उद्धरण और विचार
यह अध्याय अन्य टिप्पणियों से सुदृढ़ संकेत देता है कि पाप के बाद भी ईश्वर को स्मरण करना और उसकी कृपा पर निर्भर होना किस प्रकार जीवित विश्वास की निशानी है।
उद्धार के लिए पुकार की यह रचना निम्न प्रेरणाओं को उजागर करती है:
अनुष्ठानिक-आर्दश तुलना (संदर्भ के साथ संक्षेप)
1) न्यायियों 6–8 के सत्रों में मिद्यान के विरोध के बीच इजरायली यहोवा के चरणों में लौटते हैं, और फिर उद्धार का अनुभव होता है; इससे यह दर्शाता है कि ईश्वर के सामने ईमानदारी से आह्वान करने पर दया मिलती है।
2) दाऊद की नम्र प्रार्थनाएं और यहूदा के प्रभु के प्रति समर्पण भी इसी प्रवृत्ति को पुष्ट करते हैं कि क्रोध के बाद भी परमेश्वर में आशा है।
2–3 छोटा cross-reference सार
- न्यायियों 10:10-16: इस्राएली वापस उद्धार के लिए पुकारते हैं और ईश्वर उनकी गड़बड़ियों के बीच भी उन तक पहुँचते हैं।
- वेद: प्रार्थना और पश्चाताप के कारण परमेश्वर के दयालु हृदय की खुली भूमिका है।
व्यावहारिक विचार
आज के पाठक के लिए यह संदेश है कि परमेश्वर के साथousal के समय सच उद्धार तब आता है जब हम अपने पापों को स्वीकार करें, उनसे मुक्ति के लिए ईश्वर पर निर्भर रहें, और पुनः अपने जीवन को उसकी सुरक्षा के हवाले करें। अपने पापों के कारण होने वाले परिणामों से निपटते समय यह आह्वान चिंतन कराता है कि कैसे हम हर दिन की छोटी-छोटी गलतियों पर भी सचेत रहकर ईश्वर की आशीष चाहते हैं।
संक्षिप्त निष्कर्ष
न्यायियों 10:15 यह स्मरण कराता है कि पाप के बाद भी ईश्वर की कृपा के लिए खुला मार्ग है, यदि हम विनय और आस्था के साथ उसे पुकारें। यह तथ्य कि इस्राएल ने स्वीकृति दी कि वही भला करेगा, चरित्र-परिवर्तन की शुरूआत है और ईश्वर-आशीर्वाद की संभावना को जन्म देती है।
धार्मिक संदर्भ-लघू संकेत
कुल मिलाकर यह verse एक धर्मी जीवन की शुरुआत है जहाँ आंतरिक पश्चाताप और外部 आह्वान एक साथ आते हैं, और ईश्वर की कृपा के बिना उद्धार असम्भव है।