Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीन्यायियों 10:10 बाइबल पद की व्याख्या
न्यायियों 10:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब इस्राएलियों ने यह कहकर यहोवा की दुहाई दी, “हमने जो अपने परमेश्वर को त्याग कर बाल देवताओं की उपासना की है, यह हमने तेरे विरुद्ध महा पाप किया है।”
न्यायियों 10:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
न्यायियों 10:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

1 शमूएल 12:10 (HINIRV) »
तब उन्होंने यहोवा की दुहाई देकर कहा, 'हमने यहोवा को त्याग कर और बाल देवताओं और अश्तोरेत देवियों की उपासना करके महा पाप किया है; परन्तु अब तू हमको हमारे शत्रुओं के हाथ से छुड़ा तो हम तेरी उपासना करेंगे।'

न्यायियों 3:9 (HINIRV) »
तब इस्राएलियों ने यहोवा की दुहाई दी, और उसने इस्राएलियों के छुटकारे के लिये कालेब के छोटे भाई ओत्नीएल नामक कनजी के पुत्र को ठहराया, और उसने उनको छुड़ाया।

भजन संहिता 106:43 (HINIRV) »
बारम्बार उसने उन्हें छुड़ाया, परन्तु वे उसके विरुद्ध बलवा करते गए, और अपने अधर्म के कारण दबते गए।
न्यायियों 10:10 का मुख्य बिंदु
यह आयत इस बात का स्पष्ट उद्घोष है कि इस्राएली अपने परमेश्वर Yahweh को त्यागकर Baal देवताओं की उपासना करने लगे। यह “महापाप” की स्थिति है, क्योंकि परमेश्वर के साथ साक्षात्कार टूट गया है और लोग फिर उसी पुराने पंथ की तरफ पलटते हैं जो उन्हें पहले भी अस्त-व्यस्त और विपत्ति में डालता रहा है। इस कार्यक्रम से यहुदियों की आत्मिक चपलता और सच्ची प्रतिज्ञाओं की कमी उजागर होती है, तथा नये सिरे से इबरहिमी मान-धर्म के भीतर सीखने की आवश्यकता स्पष्ट होती है।
पाठ-संदर्भ की संगति ( literary context )
न्यायियों के बीच यह समय पथभ्रष्टता—परंपरागत नहीं—का दौर था; हर प्रकार के देव-उपासना ने मोशे के उत्तराधिकारी और उनके समुदाय के भीतर आक्रांत कर दिया। इस verse में, इस्राएली अपने पूर्व के पापों से सीख नहीं लेते बल्कि नई पीढ़ी उन्हीं अंधविश्वासों की तरफ लौटती है। यह कथा किताब के बहाव में एक बार फिर दिखाती है कि इस्राएली परमेश्वर के प्रति विश्वास में निष्क्रिय रहते हैं और परिणामस्वरूप प्रभु की उपस्थिति से दूर हो जाते हैं।
तत्त्वात्मक नाली: पाप और पुनर्प्राप्ति का चक्र
यह पंक्ति बताती है कि परमेश्वर के साथ टूटे रिश्ते के कारण नैतिक दायित्व भी टूट जाते हैं। महापाप का उल्लेख यह दर्शाता है कि वैकल्पिक देवताओं की उपासना से लोगों के नैतिक निर्णयों में ठहराव आता है, और उनके जीवन की दिशा गिरावट की ओर मूढ़ जाती है। विरोधियों के विरुद्ध संघर्ष में यहूदी अक्सर अनुभव करते हैं कि परमेश्वर ही उनकी सहायता है; परन्तु यदि वे उसकी वचनों से अनभिज्ञ रहते हैं, तो स्वार्थी चलते-फिरते रहें।
पवित्र ग्रंथों से सम्बद्ध विचार (cross-references)
इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर के साथ निष्ठा न होना समाज के ढांचे को प्रभावित करता है, और मसीही-उद्धार के संदर्भ में भी विश्वस्त ज्ञान और वचन-पालन की महत्ता को उभारता है।
गंभीर विचार: theological significance
- परमेश्वर के विरुद्ध जाना एक नैतिक अंधकार है; यह केवल धार्मिक बहिष्कार नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में वफादारी की कमी है।
- पाप का महा रूप तब उभरता है जब लोग अपने सच के कारणों से विचलन करते हैं और परमेश्वर के संकेतों को अनसुना कर देते हैं।
- स्मरण रखें: उद्धार और आशीष केवल भरोसे और आज्ञाओं के पालन से मिलती है; त्याग और पुनर्प्राप्ति—यही दूरी घटाने का मार्ग है।
संवादात्मक प्रश्न (reflection)
संक्षिप्त संकलन
न्यायियों 10:10 यह संदेश देता है कि परमेश्वर के विरुद्ध लौटना समाज को अस्थिर बनाता है और व्यक्ति से जीवन-उत्साह घटाता है। इस समय के पाठ से हमें यह सीख मिलती है कि ईश्वर के साथ स्पष्ट प्रतिज्ञा और उसके वचन के अनुसार जीवन जीना अर्थपूर्णता देता है। परमेश्वर की करुणा फिर भी उपस्थित है, परन्तु उसे मान्यता देकर ही उद्धार सम्भव है।
प्रेरक उद्धरण (historical voices)
महात्मा हेनरी (Matthew Henry) ने कहा है कि “यह महापाप तब आता है जब हम प्रभु के बजाय अपने मन के अंधेरे को चुनते हैं।” आल्बर्ट बार्न्स (Albert Barnes) और एडम क्लार्क (Adam Clarke) ने इस प्रकार के अवरोधों को परिभाषित किया कि पाप की दोहरी चोट है—निष्ठा का अभाव और आत्म-संघर्ष की असफलता। (कृपया ध्यान दें: नीचे इन दावों के छोटे उद्धरण केवल संदर्भ हेतु हैं; पूर्ण पाठ नहीं दिए गए हैं।)
उद्धृतियाँ: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के संक्षेप उद्धरण अगर उपलब्ध हों।
यही समेकित सार है: प्रतिज्ञा की दृढ़ता और एकात्मता की खोज—यही परमेश्वर के साथ जीवन की वास्तविकता है।