Old Testament
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न्यायियों 10:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब यहोवा का क्रोध इस्राएल पर भड़का, और उसने उन्हें पलिश्तियों और अम्मोनियों के अधीन कर दिया,
न्यायियों 10:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
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न्यायियों 10:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
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न्यायियों 2:14 (HINIRV) »
इसलिए यहोवा का कोप इस्राएलियों पर भड़क उठा, और उसने उनको लुटेरों के हाथ में कर दिया जो उन्हें लूटने लगे; और उसने उनको चारों ओर के शत्रुओं के अधीन कर दिया; और वे फिर अपने शत्रुओं के सामने ठहर न सके।

व्यवस्थाविवरण 29:20 (HINIRV) »
यहोवा उसका पाप क्षमा नहीं करेगा, वरन् यहोवा के कोप और जलन का धुआँ उसको छा लेगा, और जितने श्राप इस पुस्तक में लिखे हैं वे सब उस पर आ पड़ेंगे, और यहोवा उसका नाम धरती पर से मिटा देगा। (प्रका. 22:18)

व्यवस्थाविवरण 31:16 (HINIRV) »
तब यहोवा ने मूसा से कहा, “तू तो अपने पुरखाओं के संग सो जाने पर है; और ये लोग उठकर उस देश के पराये देवताओं के पीछे जिनके मध्य वे जाकर रहेंगे व्यभिचारी हो जाएँगे, और मुझे त्याग कर उस वाचा को जो मैंने उनसे बाँधी है तोड़ेंगे।
न्यायियों 10:7 का पाठ-परिचय
इस पद में यहोवा का क्रोध इस्राएल पर भड़क उठता है और वे प्रेरित होकर फिर पलिश्तियों और अम्मोनियों के अधीन हो जाते हैं। यह दृश्य ऐसे समय का है जब इस्राएल के लोग परमेश्वर की आज्ञाओं से विचलित होकर वैसी निष्ठा नहीं दिखाते, जो उनके इतिहास और चवन के साथ संगत है। यह संदेश हमें यह समझाते हैं कि केवल ईश्वर के साथ सम्मिलन और उसकी आज्ञाओं का पालन ही जीवन की सुरक्षा और स्थिरता प्रदान करता है।
पदVerse का पाठ-गत चर्चा
पद 7 में स्पष्ट है कि यहोवा का क्रोध उन पर भड़का, और परिणामस्वरूप उन्होंने इस्राएल को बाहरी शक्तियों के अधीन कर दिया। यह एक बार नहीं, बल्कि लगातार चेतावनी है कि बुराइयों के कारण परमेश्वर उनके समाज-व्यवस्था और सुरक्षा को छोड़ देता है। पलिश्तियों और अम्मोनियों के साथ न्यास इस्राएल के आंतरिक अविश्वास, वैमनस्य और धार्मिक भटकाव के फलस्वरूप आता है।
मुख्य आध्यात्मिक संदेश
अन्य शास्त्रीय दृष्टांत से तुलना
यशायाह और व्यवस्थावली की कुछ स्थितियाँ ऐसी हैं जहाँ लोग समस्या से बचने के लिए पृथक्-प्रकृति के उपाय खोजते हैं, परन्तु परिणाम वही रहते हैं — आत्मिक निर्भरता की कमी। इस संदर्भ में यह स्पष्ट है कि परमेश्वर के साथ टकराव नहीं, बल्कि विश्वास-आचरण का पालन ही सुरक्षा देता है।
यथार्थ अनुप्रयोग
हममें से हर कोई जो संकट या दबाव में है, उसे निम्न बातों पर विचार करना चाहिए:
क्रॉस-रेफरेंस के साथ संयोग
1) नीतियों 28:15-20 — यदि लोक सत्य से दूर हों, तो परमेश्वर उनके साथ वैसी ही प्रतिक्रिया करता है; चेतावनी मिलती है कि धार्मिक-आचरण और सामाजिक न्याय का संगम अनिवार्य है।
2) 2 इतिहास 15:2-4 — जब यहूदा ने परमेश्वर की खोज खो दी, तब विपत्ति ने उसे घेर लिया; परन्तु यदि वे दिल खोलकर लौटते, तो उसकी कृपा पुनः प्राप्त होती है।
3) मत्ती 6:33 — पहले परमेश्वर के राज्य और उसकी righteousness खोजो; अन्य सब चीजें अपने आप मिल जाएंगी।
सार-सारांश
न्यायियों 10:7 यह याद दिलाता है कि समाज के भीतर ईश्वर की आज्ञाओं से विमुखता संकट और निर्भरता की कमी को जन्म देती है। इस धरातल पर हमें अपनी निष्ठा, एकता और आस्था को मजबूत करना चाहिए ताकि बाहरी दबाव भी हमें परमेश्वर के मार्ग से विचलित न कर सके। हमारा उद्देश्य यह हो कि हम स्वयं और समाज दोनों में परमेश्वर की इच्छा को पहले रखें, और लौटें वह स्थान जहाँ से उभर कर सच्ची सुरक्षा मिलती है।
उद्धरण-उद्धृण भाग: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियों से आवश्यक संकेत: उनके विचारों को संक्षेप में मिलाकर एक समेकित व्याख्या प्रस्तुत की गई है; यदि किसी पाठ के सीधे उद्धरण मिलें, तो नीचे दिया गया है: “...” (टिप्पणी-उद्धरण के लिए स्थान).