Old Testament
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न्यायियों 10:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब इस्राएलियों ने फिर यहोवा की दृष्टि में बुरा किया, अर्थात् बाल देवताओं और अश्तोरेत देवियों और अराम, सीदोन, मोआब, अम्मोनियों, और पलिश्तियों के देवताओं की उपासना करने लगे; और यहोवा को त्याग दिया, और उसकी उपासना न की। (भज. 106:36, न्या. 4:1)
न्यायियों 10:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
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न्यायियों 10:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 राजाओं 11:33 (HINIRV) »
इसका कारण यह है कि उन्होंने मुझे त्याग कर सीदोनियों की देवी अश्तोरेत और मोआबियों के देवता कमोश, और अम्मोनियों के देवता मिल्कोम को दण्डवत् की, और मेरे मार्गों पर नहीं चले: और जो मेरी दृष्टि में ठीक है, वह नहीं किया, और मेरी विधियों और नियमों को नहीं माना जैसा कि उसके पिता दाऊद ने किया।

1 राजाओं 11:7 (HINIRV) »
उन दिनों सुलैमान ने यरूशलेम के सामने के पहाड़ पर मोआबियों के कमोश नामक घृणित देवता के लिये और अम्मोनियों के मोलेक नामक घृणित देवता के लिये एक-एक ऊँचा स्थान बनाया।

1 राजाओं 11:5 (HINIRV) »
सुलैमान तो सीदोनियों की अश्तोरेत नामक देवी, और अम्मोनियों के मिल्कोम नामक घृणित देवता के पीछे चला।
न्यायियों 10:6 – एक आत्मघाती मोड़ और ईश्वर की वाचा की पुनः स्मरण
इस पद में इस्राएली इतिहास एक बार फिर नये चरण में आता है, जहां ईश्वर की कृपा के बावजूद उसने फिर पथभ्रष्ट होकर अन्य देवताओं की पूजा आरम्भ कर दी। यह छुटकारे की महान उथल-पुथल के बीच एक चेतावनी है कि आंतरिक विश्वास और आस्थाओं का अस्थिर होना परमेश्वर के साथ संबंध को भीतर से खोखला कर देता है। इस पाठ की शूटिंग सबसे पहले यह स्पष्ट करती है कि चुनौतियाँ केवल बाहरी नुकसान नहीं देतीं, बल्कि हमारे हृदय के विश्वास-स्रोत को भी चुनौती देती हैं।
पद का केंद्रीय पाठ और chapter के संदर्भ में
यह verse से स्पष्ट है कि इस्राएली “फिर यहोवा की दृष्टि में बुरा किया”—यानी वे अपने पिता-ईश्वर के प्रति वफादारी से भटक गए। उन्होंने बाल देवताओं, अश्तोरेत देवियों के साथ-साथ अराम, सीदोन, मोआब, अम्मोनियों और पलिश्तियों के देवताओं की उपासना आरम्भ कर दी, और इससे यहोवा को त्याग दिया। यह क्रमिक अविश्वास का प्रतीक है, जो बहुदेवीय पूजा की ओर ले जाता है और अंततः व्यक्ति-समूह के नैतिक ढाँचे को हिला देता है।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
अन्य साहित्य से संकलित दृष्टिकोण (संयोजनधारा)
हेनरी (Matthew Henry) और बर्न्स (Albert Barnes) के मौलिक प्रवचनों के सार में यह बात उभरती है कि इस्राएली की असंतुष्टि और अन्य देवताओं की स्तुति ने ईश्वर के साथ उनके ठोस संबंध को दुष्प्रभावित किया। क्लार्क (Adam Clarke) भी नैतिक निर्भरता के टूटने को चेतावनी के रूप में देखते हैं कि “यहोवा के साथ संबंध तब तक सुरक्षित रहता है जब तक मन एकाग्र रहने के लिए तैयार रहे।”
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनकी संक्षिप्त व्याख्या
1) भज 106:36 — परमेश्वर की पूजा छोड़कर बहुदेववाद का मार्ग; यह तुलना बताती है कि भजन-संयोजन टूटना किस प्रकार समाज में दुष्कर प्रभाव डालता है।
2) न्या 4:1 — यहोवा के साथ विश्वासघात रूलिंग राजाओं के समय की निरंतर समस्या को दर्शाता है; समुदाय का एकता-बाधक यह परिवर्तन स्पष्ट करता है।
3) अन्य आयाम— न्यायियों 2:11–13— पुराने चरणों में पुनः बहुदेव Worship की प्रवृत्ति का पुनरुत्थान; यह अध्याय इस क्रम को दोहराते हुए बताता है कि अविश्वास कैसे दोहराव से स्थिर हो जाता है।
व्यावहारिक आवेदन
हमारे लिए यह पाठ एक चेतावनी है कि मानसिक और भावनात्मक आकर्षणों से सावधान रहें जो हमें ईश्वर के एकविश्वास से विचलित कर सकते हैं। दैनिक जीवन में—यात्रा, नौकरी, रिश्ते—हमारी नीति, मूल्य और निर्णय ईश्वर-केन्द्रित रहने चाहिए। किसी भी आलोचनात्मक परिस्थिति में, भगवान की ओर लौटना और उनके नियमों के अनुरूप आचरण बनाए रखना अधिक स्थिरता लाता है।
संक्षेप
न्यायियों 10:6 यह दिखाता है कि जब इस्राएलियाँ अपार विश्वासघात और बहुदेवपूजा के जाल में फँसती हैं, तब यहोवा की वाचा और उनकी जीवनशैली क्षीण होती है। यह पाठ सतर्क करता है कि एकता-आत्मा और एक-निष्ठ प्रेम ही परमेश्वर के साथ स्थिर संबंध बनाए रखता है।
मुख्य विचार: आंतरिक एकाग्रता और एकत्व के साथ ईश्वर को ही पूजा देना।