Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 14:1 न्यायियों 14:2 न्यायियों 14:3 न्यायियों 14:4 न्यायियों 14:5 न्यायियों 14:6 न्यायियों 14:7 न्यायियों 14:8 न्यायियों 14:9 न्यायियों 14:10 न्यायियों 14:11 न्यायियों 14:12 न्यायियों 14:13 न्यायियों 14:14 न्यायियों 14:15 न्यायियों 14:16 न्यायियों 14:17 न्यायियों 14:18 न्यायियों 14:19 न्यायियों 14:20



न्यायियों 14:4 — प्रभाव और आशय का संदर्भ
यह पद तब का है जब दानिएल और उसके माता-पिता समझते थे कि दाऊदियों के समय पलिश्ती इस्राएल पर प्रभुत्व जमाए हुए थे। पर यहाँ एक नई दिशा दिखाई देती है: यह बात कि यहोवा की ओर से है, ताकि पलिश्ती के विरुद्ध दाँव ढूँढ़ना संभव हो सके। पुत्री-परिप्रेक्ष्य में यह स्पष्ट है कि परमेश्वर कभी-कभी ऐसी परिस्थितियाँ बनाते हैं जो मानवीय समझ से परे लगती हैं, पर उनका उद्देश्य इस्राएल के बीच उनकी सत्ता और उद्देश्य को उभारना होता है।
immediate setting — संदर्भ की पृष्ठभूमि
यही वह समय था जब यहूदियों के बीच न्यायियों की व्यवस्था चल रही थी। पलिश्ती इस्राएल पर प्रभुत्व थे और इस प्रभुत्व के कारण इस्राएली राजमार्गों और साधारण जीवन में कटु दबाव से गुजरते थे। इन परिस्थितियों में यहोवा की योजना पूरक रूप से काम कर रही थी, भले ही साधारण मनुष्य इसे तुरंत समझ न पाते।
परमेश्वर की योजना और विश्वास
पद बताता है कि घटनाओं के पीछे प्रभु की योजना सक्रिय है—यहूदी जीवन की सच्ची दिशा वही निर्धारित करते हैं, न कि मात्र मानवीय राजनीतिक लाभ। यह दर्शाता है कि विश्वास के अनुसार कठिनाइयाँ और विरोध तब घटित होते हैं जब परमेश्वर के उद्देश्य पूरे होते हैं, भले बाहरी परिदृश्य कैसे भी क्यों न हों।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्रण
संबंधित रखें जाने वाले पाठ
1) न्यायियों 13:5 — बच्चों में पवित्रता और बुलाव की दिशा; 2) व्यवस्था 1:8-9 — परमेश्वर कैसे अपने मार्गों के अनुसार नेतृत्व करते हैं; 3) 1 कोरिन्थियों 1:27 — הלא-चुणी चीज़ें परमेश्वर को महिमा देती हैं।
ये दुवे नीचे के संदर्भों में बताते हैं कि परमेश्वर कैसे असामान्य तरीकों से लोगों को बुलाते हैं और उनकी योजना को आगे बढ़ाते हैं, भले मानव दृष्टिकोण उसे समझ न पाए।
आज के संदर्भ में उपयोग
हम देख सकते हैं कि परिस्थिति चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हो, परमेश्वर की योजना यह रहती है कि उसका उद्देश्य— उसकी महिमा और इस्राएल की स्थिरता— कायम रहे। डर या अराजकता की जगह विश्वास रखें। नये अवसर और रणनीतियाँ परमेश्वर की प्रेरणा से आ सकती हैं, भले वे पहली नजर में असामान्य लगें।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप)
– पराक्रम और योजना पर विचार के लिए: न्यायियों 13:5; व्यवस्थाविक 1:8-9; 1 कुरिन्थियों 1:27
व्याख्या इस प्रकार बताती है कि परमेश्वर के उद्देश्य अक्सर मानव समझ से आगे होते हैं, और इसलिए कठिन परिस्थितियाँ भी भलाई में बदल सकती हैं।
संकलन remark
यह पाठ प्रभु की sovereignty और भक्तों के लिए आश्वासन देता है कि मुश्किल समय में भी परमेश्वर उसका उद्देश्य पूरा कर रहा है। यह हमारी विश्वासी दौड़ में धैर्य, विश्वास, और विवेक की मदद करता है— कि हम भी कभी-कभी अपने हिसाब से नहीं, बल्कि परमेश्वर की योजना के अनुसार चलते हैं।
उद्धरण स्रोतों के लिए: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सीधे शब्द स्वतंत्र रूप से उद्धृत नहीं हैं, पर उनकी सामान्य अन्तर्दृष्टियाँ नीचे के सार में संग्रहीत हैं।