Old Testament
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न्यायियों 17:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जब उसने वे ग्यारह सौ टुकड़े चाँदी अपनी माता को वापस दिए; तब माता ने कहा, “मैं अपनी ओर से अपने बेटे के लिये यह रुपया यहोवा को निश्चय अर्पण करती हूँ ताकि उससे एक मूरत खोदकर, और दूसरी ढालकर बनाई जाए, इसलिए अब मैं उसे तुझको वापस देती हूँ।”
न्यायियों 17:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
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न्यायियों 17:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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निर्गमन 20:4 (HINIRV) »
“तू अपने लिये कोई मूर्ति* खोदकर न बनाना, न किसी कि प्रतिमा बनाना, जो आकाश में, या पृथ्वी पर, या पृथ्वी के जल में है।

निर्गमन 20:23 (HINIRV) »
तुम मेरे साथ किसी को सम्मिलित न करना, अर्थात् अपने लिये चाँदी या सोने से देवताओं को न गढ़ लेना।

लैव्यव्यवस्था 19:4 (HINIRV) »
तुम मूरतों की ओर न फिरना, और देवताओं की प्रतिमाएँ ढालकर न बना लेना; मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ।
य न्यायियों 17:3 — माता-पिता और धन का दुरूह उपयोग
मुख्य interpretive बिंदु: इस पद में दिखती है कि धन-संबंधी निर्णयों के कारण परिवार के रिश्ते जटिल हो जाते हैं, और धर्म की आड़ लेकर निजी हितों के सत्यापन के लिए व्यक्तियों के आचरण कितने मर्मस्पर्शी और चेतावनापूर्ण हैं। यहाँ 1100 रुकावटों के बीच बेटा और माता के बीच एक आर्थिक-धार्मिक संधि दिखाई देती है, जिसमें आस्था-आचरण और उद्देश्य में असमानता उजागर होती है।
साहित्यिक संदर्भ (संदर्भ-चित्तन)
कथा प्रारम्भ में, एक उपन्यासिक-भरे हुए पृष्ठ पर नायकों के नाम-चिह्न बनते हैं: एक बेटा का पथ, एक माता की पवित्र-योजना, और चाँदी की धारणाएँ। न्यायियों के युग में बिथ-जाति और गैर-यातायातधर्मी पथिक बनाम लोक-धारणा के बीच संघर्ष उभरता है। यह भाग एक व्यक्ति की आत्म-आस्थाओं और पितृ-आर्ति के बीच के दायित्वों को कसौटी पर लगाता है।
धर्मशास्त्रीय महत्व
यह पाठ तीन बिन्दुओं को आह्वान करता है: (1) वचन-आचरण और धन का सम्बन्ध—ग़ायब हो रही शुद्धता कहाँ है जब धन के उद्देश्य से भगवान के लिए किए जाने वाले उपहार में भी व्यक्तिगत लाभ की गिनती जुड़ी हो; (2) परिवार-निष्ठा बनाम समाजिक दबाव—माता का निर्णय अभी भी एक धार्मिक सार्वजनिक योजना के रूप में प्रस्तुत है, पर underlying motive क्या है यह विचारणीय है; (3) कार्रवाई की मानवीयता—कथानक हमें दिखाता है कि कैसे अच्छे इरादे भी कभी-कभी गलत परिणामों को जन्म दे सकते हैं यदि मार्गदर्शक तत्त्व स्वस्थ नैतिक नियमों से दूर हो।
अनुमोदित पंथ-परिचय से जुड़ाव
यह कथा अन्य हिस्सों से परस्पर-सम्बन्धित है जहां वासना, धन-उत्पत्ति और पावनता के बीच संघर्ष आता है। परिशुद्धता के साथ देखना चाहिए कि माता की प्रतिज्ञा और बेटे के आचरण का संदिग्ध मिश्रण कैसे नैतिक चेतावनी बनता है—यह समझना कि भले ही धार्मिक अवसरों की भाषा उच्च हो, वास्तविक कदम सत्य-धर्म के अनुरूप होने चाहिए।
आंतरिक स्पष्टीकरण: मुख्य बात
- ग्यारह सौ टुकड़े चाँदी का पुनः देना दर्शाता है कि धन कितनी आसानी से पवित्र उद्देश्य को दूषित कर सकता है।
- माता का उत्तर-उद्देश्य धर्मी उपहार बनाम व्यक्तिगत लाभ—इसका निष्कर्ष: अंततः सामाजिक-आलोकन में यह उलझन आ जाती है कि धार्मिक निधि किस तरह से मानव-प्रेरणा के साथ समाहित होती है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेपित संदर्भ और संक्षिप्त स्पष्टीकरण)
स्व-चिंतन के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह पाठ प्रत्यक्ष रूप से बतौर चेतावनी है कि धन का प्रयोग परमेश्वर के towards के लक्ष्य के अनुरूप होना चाहिए। माता का प्रस्ताव और बेटे का भागीदारी—दोनों मिलकर दिखाते हैं कि धार्मिक-उपहार भी भीतर से जांचे गए प्रेरणा के बिना गलत राह पकड़ सकता है। नैतिकता के लिए यह आवश्यक है कि धन-आचरण को सीधे परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप बनाएं, ताकि आस्था और परिवार दोनों सुरक्षित रहें।
नोट: नीचे उद्धृत तीन विद्वानों के विचारों में संक्षिप्त, क्रिस्ट-योग्य टिप्पणी मिलती है—ध्यान दें कि यहां केवल छोटे-से शब्द-उद्धरण 활용 किए गए हैं:
अनुमोदन उद्धरण (संक्षेप):
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के संक्षिप्त विचारों के साथ, यह हिस्सा दर्शाता है कि धन के उपयोग में धार्मिकता और व्यक्तिगत लाभ के बीच संतुलन कितना नाजुक है और कैसे यह कथा हमें उसी सच से जोड़ती है।