Old Testament
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न्यायियों 17:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यहूदा के कुल का एक जवान लेवीय यहूदा के बैतलहम में परदेशी होकर रहता था।
न्यायियों 17:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
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न्यायियों 17:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
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रूत 1:1 (HINIRV) »
जिन दिनों में न्यायी लोग न्याय करते थे* उन दिनों में देश में अकाल पड़ा, तब यहूदा के बैतलहम का एक पुरुष अपनी स्त्री और दोनों पुत्रों को संग लेकर मोआब के देश में परदेशी होकर रहने के लिए चला।

मीका 5:2 (HINIRV) »
हे बैतलहम एप्रात, यदि तू ऐसा छोटा है कि यहूदा के हजारों में गिना नहीं जाता, तो भी तुझ में से मेरे लिये एक पुरुष निकलेगा, जो इस्राएलियों में प्रभुता करनेवाला होगा; और उसका निकलना प्राचीनकाल से, वरन् अनादि काल से होता आया है। (मत्ती 2:6, यूह. 7:42)

मत्ती 2:1 (HINIRV) »
हेरोदेस राजा के दिनों में जब यहूदिया के बैतलहम* में यीशु का जन्म हुआ, तब, पूर्व से कई ज्योतिषी यरूशलेम में आकर पूछने लगे,
न्यायियों 17:7 पर द्रष्टिकोण: एक युवक लेवीय का परदेशी परिस्थितियों में बैतलहम में निवास
मुख्य व्याख्यात्मक बिंदु: इस पदकथा से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर के लोगों के जीवन में अद्भुत विविधता के बावजूद परमेश की योजना में शरणागत और परदेशी बनना एक सामान्य अनुभव हो सकता है। यद्यपि यह व्यक्ति एक ऐसा देश में रहता है जहाँ उसकी जाति या किन्हीं कारणों से विशेष सुरक्षा नहीं मिलती, फिर भी परमेश्वर की सत्कार-योजना और उसके दया-बंधनों के साथ वह जुड़ा रहता है। यह पाठ हमें यह सिखाता है कि भले ही कोईuelles समुदाय से बाहर हो, परमेश्वर उसकी पहचान को भूला नहीं देता और वह अपने काम में उसे भी शामिल करता है।
पाठ-परिप्रेक्ष्य (literary context)
यह भाग न्यायियों के समय की अनियमित सामाजिक-धार्मिक स्थिति का संकेत करता है, जब इज़राइल में नेतृत्त्व और एकतानता कमजोर थी। यहूदा के कुल का एक जवान व्यक्ति लेवीय है, जो परदेशी होकर बैतलहम में रहता है। यह विवरण यह दर्शाता है कि लेवीय समुदाय न्यायियों के समय में भी व्यक्तिगत संघर्ष और अस्थिरता से गुजर रहा था, जबकि बैतलहम जैसी पवित्र नगर में भी लघु-ब्रह्मणों की स्थिरता नहीं थी। यह कहानी केस-स्टडी के रूप में यह दिखाती है कि परमेश्वर का विधान और सामाजिक वास्तविकताएँ कभी-कभी एक दूसरे से टकराती हैं, परंतु ईश्वरीय योजना आगे बढ़ती रहती है।
हिकमत (theological significance)
प्रायः लेवीय के लिए देह-परिश्रम और वंश-उत्पत्ति के कारण अपेक्षित स्थायित्व होता है, पर यहाँ उसका परदेशी जीवन दर्शाता है कि परमेश्वर किसी एक जाति या क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। वह व्यक्ति, जो एक बाहरी स्थान पर रहता है, परमेश्वर की दृष्टि में भी मूल्यवान है। इससे यह सीख मिलती है कि भिन्न-भिन्न सामाजिक पृष्ठभूमि के लोग परमेश्वर के उद्देश्य में भागीदार हो सकते हैं।
पवित्रशास्त्रीय संबंध (Cross-references)
सोच-विचार के प्रश्न (Questions for reflection)
संक्षिप्त निष्कर्ष
न्यायियों 17:7 यह संकेत करता है कि परमेश्वर की योजना किसी खास जाति या स्थान तक सीमित नहीं है; वह हर दशा के व्यक्ति को अपने उद्देश्य में भागीदार बनाता है। एक जवान लेवीय का बैतलहम में परदेशी जीवन यह बताता है कि भक्ति और आस्था की वास्तविकता सामाजिक सीमाओं से परे है। यह संदेश इस समय के पाठकों के लिए भी वही है: परमेश्वर के प्रेम में हर व्यक्ति का स्थान है, भिन्न पृष्ठभूमि होने पर भी।
उद्धृत स्वर-रेखा (Matt. Henry, Barnes, Clarke): इस पद के विश्लेषण में इन कमेंटेटरों के सार को समेट कर सहज रूप में प्रस्तुत किया गया है। यदि आप सीधे उद्धरण चाहते हों, तो Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विवरणों के संक्षेप सार में परिगणन किया गया है—पर यहाँ मौलिक रूप से उनका विचार समाहित करते हुए एक एकीकृत व्याख्या दी गई है।
क्रॉस-रेफरेंसेस के संक्षिप्त स्पष्टीकरण में जो बातें उद्धृत की गई हैं, वे पाठ के भीतर हल्के-फुल्के संदर्भ के रूप में हैं, पूर्ण पाठ नहीं।