Old Testament
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न्यायियों 17:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जब उसने वह रुपया अपनी माता को वापस दिया, तब माता ने दो सौ टुकड़े ढलवैये को दिया, और उसने उनसे एक मूर्ति खोदकर, और दूसरी ढालकर बनाई; और वे मीका के घर में रहीं।
न्यायियों 17:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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न्यायियों 17:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 46:6 (HINIRV) »
जो थैली से सोना उण्डेलते या काँटे में चाँदी तौलते हैं, जो सुनार को मजदूरी देकर उससे देवता बनवाते हैं, तब वे उसे प्रणाम करते वरन् दण्डवत् भी करते हैं! (निर्ग. 32:2-4)

यिर्मयाह 10:9 (HINIRV) »
पत्तर बनाई हुई चाँदी तर्शीश से लाई जाती है, और ऊफाज से सोना। वे कारीगर और सुनार के हाथों की कारीगरी हैं; उनके पहरावे नीले और बैंगनी रंग के वस्त्र हैं; उनमें जो कुछ है वह निपुण कारीगरों की कारीगरी ही है।
न्यायियों 17:4 का महत्व और संदर्भ
यह पद न्यायियों के समय की अनिश्चितता और धार्मिक असुरक्षा को उजागर करता है। जब एक व्यक्ति ने चुराए गए धन को अपनी माता को लौटाया, तो उसकी माँ ने उन पैसों से मूर्तिपूजा के लिए दो सौ ढलाईयें बनवाईं। यहEpisode बताता है कि पवित्रता और पाप के बीच कितना नजदीकी रिश्ता था, जहाँ आर्थिक धन इरादा से मूर्तिपूजा तक पहुँच रहा था। यह इस बात की भी पुष्टि करता है कि परिवार और समाज में धार्मिक आदर्श का क्षीण होना इतिहास के प्रवाह में एक प्रमुख समस्या था।
मूल संदर्भ और स्थिति
22–23 वर्षीय युवक मीका के घर में एक स्थापित मंदिर-आचरण का शुरुआती बिंदु दिखता है, जो भगवान YHWH के स्थानपर वैकल्पिक देवताओं की पूजा को स्वीकार करता है। यह घटनाक्रम रूपक है कि कैसे भ्रष्ट प्रथाएं और निजी धर्मांधता सामुदायिक जीवन को संक्रमित करती हैं। इस कथन में पिता-स्वरूप मंत्री के रूप में मीका का छोटा-सा कर्तव्य भी उजागर होता है, जब उसका धन लौटता है फिर भी उसका मन धार्मिक पथ से हटकर आज़ाद धर्म-रूढ़ि में बाधा बनता है।
प्रमुख संदेश
समर्थन योग्य पवित्र पाठकथन और थीम्स
यह कथा गूढ़ है पर मर्म सत्य देती है: एक समाज जिसमे धार्मिक रहे-जाग्रह नहीं रहता, वहाँ धन-प्राप्ति और श्रद्धा के बीच गहरी टकराहट होती है। यह प्रकरण यह भी संकेत देता है कि असंगत मान्यताओं के कारण शक्ति-प्रधान समुदाय में आत्म-स्वार्थी निर्णय बढ़ते हैं, जिससे धार्मिक प्रतिष्ठानीय व्यवस्था टूटती है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संदर्भ) और संक्षिप्त व्याख्या
परिशिष्ट उद्धरण-युक्त टिप्पणी
यहां तात्पर्य है कि पवित्रता के मानक केवल ऋचाओं में नहीं, बल्कि व्यवहार में भी संतुलन मांगते हैं। जिन विद्वानों के सार्वजनिक-डायरी पाठ से प्रेरणा मिलती है, वे यह उद्धरण देते हैं कि धन की आड़ में ईश्वर-भक्ति की वास्तविकता धूमिल हो जाती है।
प्रकाशित पथ-निर्देशन: दे-than-देय विचार
इस पद से सीख मिलती है कि सत्य-प्रकाशक ईश्वर के सच्चे पथ पर स्थिर रहने में ही सुरक्षा है, भले ही सामाजिक-आर्थिक दबाव कैसे भी हो। एक व्यवहारिक मार्ग है कि व्यक्ति अपने संसाधनों और विश्वास के बीच स्पष्ट विभाजन बनाए, ताकि मंदिर और घर के भीतर भी एक स्पष्ट एकाग्रता बना रहे।
संक्षिप्त devotional reflection
खुली चेतावनी है कि धन के दिखावे से नहीं, परमेश्वर के पथ पर चलने से सच्ची शांति मिलती है। यदि हम अपने जीवन में भी मीका-माता की तरह धन के कारण पथभ्रष्ट होने लगे, तो अपनी भक्ति और परिवारिक विश्वास को पुनः क्रम में लाने की आवश्यकता है। प्रभु की गहराई को खोजते हुए, छोटे-छोटे कदम—धर्म-निष्ठा, धार्मिक समझ-समझदारी—हमारे घर-परिवार को दृढ़ बना सकते हैं।
टिप्पणीकारों के संकेतित उद्धरण (संयोग-उद्धरण)
इस पाठ के लिए Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-domain उद्धरण छोटे-छोटे पंक्तियों में उद्धृत हैं। परिस्थिति के अनुसार उनके दृष्टिकोण सामान्य तौर पर इसी तरह की व्याख्या देते हैं: धन-धर्म की टकराव और पारिवारिक-धार्मिक असुरक्षा के बारे में स्पष्टता मिलती है। (नोट: यहां से उनके सीधे वाक्यांशों के छोटे-अल्प उद्धरण उपलब्ध होते हैं; जिन्हें पाठ में संक्षेप में समाहित किया गया है।)