Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 18:1 न्यायियों 18:2 न्यायियों 18:3 न्यायियों 18:4 न्यायियों 18:5 न्यायियों 18:6 न्यायियों 18:7 न्यायियों 18:8 न्यायियों 18:9 न्यायियों 18:10 न्यायियों 18:11 न्यायियों 18:12 न्यायियों 18:13 न्यायियों 18:14 न्यायियों 18:15 न्यायियों 18:16 न्यायियों 18:17 न्यायियों 18:18 न्यायियों 18:19 न्यायियों 18:20 न्यायियों 18:21 न्यायियों 18:22 न्यायियों 18:23 न्यायियों 18:24 न्यायियों 18:25 न्यायियों 18:26 न्यायियों 18:27 न्यायियों 18:28 न्यायियों 18:29 न्यायियों 18:30 न्यायियों 18:31



न्यायियों 18:19 पर टिप्पणी
सीधे शब्दों में अर्थ: उन्होंने उससे कहा, “चुप रह, अपने मुँह को हाथ से बन्दकर, और हम लोगों के संग चलकर, हमारे लिये पिता और पुरोहित बन। तेरे लिये क्या अच्छा है? यह, कि एक ही मनुष्य के घराने का पुरोहित हो, या यह, कि इस्राएलियों के एक गोत्र और कुल का पुरोहित हो?”
पृष्ठभूमी का संक्षेप
यह अध्याय शिश्के ऐकट के दावानिर्माण और डाइन-स्थापना के संदर्भ में आता है। गैडियों के लोग माइक्राव से आये एक खेमे के साथ मिलकर एक नए धार्मिक व्यवस्था के लिए पुरोहित-प्रथा तय कर रहे हैं। यहाँ कलाकार-सम्पदा का वर्णन और परामर्श की शैली स्पष्ट है: धार्मिक अधिकारीत्व को एक एकल घराने के नियंत्रण में रखना चाहते हैं, ताकि सत्ता स्थिर और एकजुट रूप से संचालित हो सके।
interpretive observations
मुख्य बिंदु (थीमिक सूची)
अनुकूल संदर्भ और उनके अर्थ
प्रासंगिक अन्य पदों से विचार:
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह पद हमें दिखाता है कि धार्मिक संरचना की स्थिरता के नाम पर समूह का दबाव कभी-कभी व्यक्तिगत गरिमा और चयन की स्वतंत्रता पर भारी पड़ सकता है। भगवान के सामने केवल एक पुरोहিত-घराने की मांग, सामाजिक-सांस्कृतिक दबावों के कारण आ सकती है। पवित्र हृदय का प्रश्न यह है कि क्या हम एकता के नाम पर अन्याय या नियंत्रण को स्वीकार करें, या हर व्यक्ति के धर्म-संरक्षण और व्यक्तिगत आस्था के अधिकार की रक्षा करें?
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आवश्यक क्रॉस-रेफरेंसेस
व्यावहारिक निष्कर्ष: समुदाय के लिए हितकारी मार्ग वही है जो एकता बनाए रखते हुए हर אדם की आस्था और अधिकार की गरिमा का सम्मान करे। यदि पुरोहितत्व के लिए किसी एक घराने के अधिकार सुरक्षित हों, तो भी नैतिकता और न्याय के मूल्यों का कठोर पालन आवश्यक है।
— बाइबल टीका, हिंदी व्याख्या