Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 18:1 न्यायियों 18:2 न्यायियों 18:3 न्यायियों 18:4 न्यायियों 18:5 न्यायियों 18:6 न्यायियों 18:7 न्यायियों 18:8 न्यायियों 18:9 न्यायियों 18:10 न्यायियों 18:11 न्यायियों 18:12 न्यायियों 18:13 न्यायियों 18:14 न्यायियों 18:15 न्यायियों 18:16 न्यायियों 18:17 न्यायियों 18:18 न्यायियों 18:19 न्यायियों 18:20 न्यायियों 18:21 न्यायियों 18:22 न्यायियों 18:23 न्यायियों 18:24 न्यायियों 18:25 न्यायियों 18:26 न्यायियों 18:27 न्यायियों 18:28 न्यायियों 18:29 न्यायियों 18:30 न्यायियों 18:31



न्यायियों 18:17 का हिन्दी टीका (HINIRV)
यह वचन उन घटनाओं का भाग है जिनमें माइरोन कीरियम के कारण दानव-विरोधी क्रिया और बिध्वंसी प्रवृत्ति उभरती है। पाँच पुरूष देश के भेद लेने जाते हैं और भयंकर चोरी के क्रम में वे देवी-देवताओं के साथ मूरतों को भी ले जाते हैं, जबकि पुरोहित फाटक पर हथियारबद्ध खड़ा रहता है। यहाँ चरित्रों के नैतिक निर्णय, भय और पथभ्रष्टता का जोखिम स्पष्ट होता है।
पाठ का संक्षिप्त उद्देश्य
इस पद में एक स्थानीय गोलीबारी-घटना का वर्णन है जो धार्मिक मूर्तियों और गृहस्थ देवताओं के प्रति सम्मान-स्वरूप श्रद्धा के स्थान पर चोरी, चालाकी और अन्याय पर आधारित भागीदारी को उजागर करती है। यह दिखाता है कि सामाजिक दबाव, शुद्धता की कमी और ऐतिहासिक मिसालें मिलकर किस तरह बुराई को बढ़ाती हैं, भले ही लोग साहसी दिखें।
पाठ का मूल आशय
कथा बताती है कि पाँच पुरुष दुष्कर्म-युक्त योजना के साथ शहर में प्रवेश करते हैं और प्रचलित देव-प्रतिमाओं को अपने साथ ले जाते हैं। इस क्रिया से दायरे-सीमाओं का उल्लंघन, धर्म-विश्वास की कमजोरी और सत्ता के विरुद्ध अराजक आचरण दिखता है। इसका संकेत यह है कि सामाजिक अनुशासन और धार्मिक चेतना के अभाव में संसारिक लाभ के लिए नैतिक दायित्व तितर-बितर हो जाते हैं।
अन्य बाइबल पाठों के साथ तुलना
मुख्य शिक्षा
ईमानदारी और पवित्रता की कमी से समाज में छल-धोखा और भ्रष्टाचार पनपते हैं। भले ही कुछ लोग साहसी दिखें, पर यदि वे धर्म के दायित्व से दूर चले जाएं, तब उनका साहस भी स्वार्थ और नुकसान का जरिया बन सकता है। सच्चा वीर वही है जो परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप काम करे और दूसरों के लिए भी सत्य, नैतिकता और न्याय का मार्ग चुने।
कठोर अनुप्रयोग
- अपने समूह या समुदाय में किसी प्रकार की चोरी, छल या मूर्तिपूजा-पोषण न करें; यह न सिर्फ व्यक्तिगत पाप है बल्कि आध्यात्मिक क्षति भी है।
- सत्ता और दबदबा के sửत प्रयोग में नैतिक सीमाओं को बनाए रखें; बिना सही मार्गदर्शक के निर्णय लेने से आपराधिक परिणाम आ सकते हैं।
- विश्वास-यात्रा में सत्य तथा पवित्रता की कसौटी पर खरे रहने की प्रेरणा लें; छोटे-छोटे निर्णय भी ईश्वर के उद्देश्य के अनुरूप हों।
क्रॉस-रेफरेंस
इन संदर्भों में दिखती समान बात यह है कि परमेश्वर के प्रतिनिधियों के असत्य और असत्याचार से समाज में अव्यवस्था आती है जिसे दयालु निदान और सुधार से दूर रखना चाहिए।
इस पद के लिए प्रकाशित पूर्व-टीका से एक शाब्दिक संरचना के बजाय हरिभाषिक संदेश को उन्नत करने का आग्रह है। {"Matthew Henry" से: "There is a natural tenderness in God’s mercy."} यह उद्धरण केवल संदर्भ-चिह्न के लिए दिया गया है; हिंदी संस्करण में मूल भाव स्पष्ट है कि परमेश्वर की करुणा और न्याय दोनों साथ-में चलते हैं।
संक्षेप
न्यायियों 18:17 में जो घोर चोरी और मूर्तिपूजा का साथ मिला, वह समाज के नैतिक ढांचे के क्षय का संकेत है। इसका पाठ हमें याद दिलाता है कि सत्य, पवित्रता और ईमानदारी की रक्षा करना परमेश्वर के राज्य की वास्तविकता को बनाए रखने के लिए ज़रूरी है।