Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 18:1 न्यायियों 18:2 न्यायियों 18:3 न्यायियों 18:4 न्यायियों 18:5 न्यायियों 18:6 न्यायियों 18:7 न्यायियों 18:8 न्यायियों 18:9 न्यायियों 18:10 न्यायियों 18:11 न्यायियों 18:12 न्यायियों 18:13 न्यायियों 18:14 न्यायियों 18:15 न्यायियों 18:16 न्यायियों 18:17 न्यायियों 18:18 न्यायियों 18:19 न्यायियों 18:20 न्यायियों 18:21 न्यायियों 18:22 न्यायियों 18:23 न्यायियों 18:24 न्यायियों 18:25 न्यायियों 18:26 न्यायियों 18:27 न्यायियों 18:28 न्यायियों 18:29 न्यायियों 18:30 न्यायियों 18:31



न्यायियों 18:27 के साथ संदर्भ-सार
इस पद में लेश के प्रति सात्विक संघर्ष का भाग सामने आता है। जब डाले गए लोगो ने मीक़ा के पदार्थों और पुरोहित को पकड़कर नगर लेश पर आक्रमण किया, तो उन्होंने सब कुछ मिटाकर नगर को आग के हवाले कर दिया। यह घटना न्यायियों के काल की कठोर और त्रुटिपूर्ण घटनाओं में से एक है, जहाँ आस्था और जैविक सम्पत्ति की सुरक्षा के नाम पर हिंसा और दमन दिखाई देता है। कहानी का केंद्र यह है कि इस समय के भीतर ईश्वरीय आदेशों के अनुरोधी और मानवीय स्वार्थों के टकराव कैसे उभरते हैं।
मुख्य अर्थ
यह verse बताती है कि लेश के निवासियों ने मीक़ा के वस्त्र, पदार्थ और पुरोहित को मार कर नगर को जला दिया। यह दिखाता है कि युद्ध और शत्रुता के समय धार्मिक और सामाजिक संस्थान भी सुरक्षित नहीं रहते। साथ ही, यह संकेत करता है कि कुछ शक्तिशाली समूह अपने हितों के लिए परमेश्वर के कार्य की पवित्रता को भी तिरोहित कर देते हैं, ताकि उन्हें प्रतिशोध, धन या नियंत्रण मिल सके।
दो-तीन प्रमुख विषय
सम्बन्धित आयातित पद
यह घटना अन्याय और हिंसा के गलत उपयोग की चेतावनी देती है। - उद्धृत विचारMatthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संकलन-आधारित संकेत: वे इस दृढ़ और दमनकारी घटनाक्रम को मानवीय कमजोरी, गलत निर्णय और धार्मिक पवित्रता के लिए खतरे के रूप में देखते हैं।
केंद्रीय विचार
जगह-जगह के लोग भय और बदले की आग में फंसे थे, पर परमेश्वर के निर्देशों के विपरीत तरीकों से जीत की तलाश करना कभी-कभी समाज को और अधिक विनाश देता है। इस verse के साथ यह स्मरण रहता है कि शांति-पूर्ण समुदाय के लिए नैतिकता, न्याय और दयालुता आवश्यक हैं, न कि हिंसा या सत्ता-लोलुपता।
संदर्भ-क्रॉसिंग
1) न्यायियों के Books में असंतुलन और आंतरिक द्वंद्व की झलक दिखती है। 2) परमेश्वर की योजनाओं के अनुरूप नीति-निर्णय का महत्व। 3) शासन-व्यवस्था और धार्मिक संस्थाओं के बीच तनाव का चित्रण।
इन क्रॉस-रेफरेंसेज़ का संक्षिप्त स्पष्टीकरण: यह दिखाते हैं कि दमनकारी आक्रामकता के समय भी परमेश्वर के उद्देश्य और लोगों के नैतिक दायित्व कैसे टकराते हैं, और कैसे संतुलन चाहिये जिसमें हिंसा नहीं, बल्कि न्याय और दया प्रमुख रहे।
व्यावहारिक अनुभाव
हम देखते हैं कि हिंसा, धन और शक्ति के लिए धर्म का सहारा लेने से परिणाम विनाशकारी होते हैं। अपने जीवन में: दूसरों के साथअन्याय के बजाय औचित्य और कुछ समय के लिए संघर्ष के बावजूद भी शांति, सच्चाई और दयालुता chosen करें; न करें कि राजनीतिक या सामाजिक दबाव नैतिकता पर भारी पड़े।
संक्षिप्त निष्कर्ष
न्यायियों 18:27 हमें याद दिलाता है कि अत्याचार और धार्मिक संस्थाओं के दुरुपयोग का विरोध जरूरी है, परन्तु उसी समय हमें यह भी समझना है कि हिंसा से मुक्त मार्ग ही ईश्वर के योजनाओं के अनुरूप है। एक शांत, न्यायपूर्ण समाज के लिए ईमानदार निर्णय, नैतिकता और करुणा अवश्य रहने चाहिए।