Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 21:1 न्यायियों 21:2 न्यायियों 21:3 न्यायियों 21:4 न्यायियों 21:5 न्यायियों 21:6 न्यायियों 21:7 न्यायियों 21:8 न्यायियों 21:9 न्यायियों 21:10 न्यायियों 21:11 न्यायियों 21:12 न्यायियों 21:13 न्यायियों 21:14 न्यायियों 21:15 न्यायियों 21:16 न्यायियों 21:17 न्यायियों 21:18 न्यायियों 21:19 न्यायियों 21:20 न्यायियों 21:21 न्यायियों 21:22 न्यायियों 21:23 न्यायियों 21:24 न्यायियों 21:25
न्यायियों 21:16 — संतूत्थ प्रकाशित समझ
यह पद बताता है कि मण्डली के बूढ़े पुरुषों ने किन चिंता-भरे प्रश्नों के साथ समाज-नीतिगत समस्या को संबोधित किया। उनके विचार से बिन्यामीनी नारीयों के नाश के बाद जीवित बचे पुरुषों के लिए विवाह-योजनावों में मार्गदर्शक आवश्यकता उत्पन्न होती है। वे स्थिति की गंभीरता को मानते हैं और एक ठोस सामाजिक-नैतिक उपाय देने का प्रयत्न करते हैं।
पैश्शीय पृष्ठभूमि
याचना है कि क्योंकि बिन्यामीन की काँट-फाँस में स्त्रियाँ पूरी तरह सुरक्षित नहीं थीं, इसलिए समुदाय में कुछ स्त्रियों की कमी हो गई। न्यायियों 21 अध्याय में मृत्यु-यज्ञ से बच उठे हुए पुरुषों की समस्या स्पष्ट होती है: समुदाय के पुनर्संतान और समाज की संरचना के लिए उचित विवाह-यंत्रण आवश्यक था। बूढ़ों की प्रतिक्रिया एक क्रिया-प्रतिक्रियात्मक दृष्टिकोण की मिसाल है, जहाँ सामाजिक बदली परिस्थितियाँ नैतिकता और दायित्व की कसौटी बनतीं।
व्याख्यात्मक निष्कर्ष
मुख्य अनुभागिक विचार
अनुरूप क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप में)
यही समय और सामाजिक-विकल्पों पर प्रकाश डालने वाले अन्य संदर्भों से:
प्रारम्भिक टिप्पणी से सीख
न्यायियों 21 के संदर्भ में यह पाठ हमें यह समझाता है कि समाज की संरचना और सुरक्षा के लिए तत्कालिक उपाय और नैतिक दिशा-निर्देश एक साथ आवश्यक होते हैं। किसी समुदाय के लिए यह न केवल संख्या-समस्या है, बल्कि वह सामाजिक-सम्मान, पुनर्प्राप्ति और दायित्व-पूर्वक बर्ताव की कसौटी भी है।
कथन-उद्धरण (एतिहासिक निशान)
मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क आदि व्यापक पवित्र-उद्धरणों में इस प्रकार के सामाजिक-आचरण के परिप्रेक्ष्य को स्पष्ट करते हैं। संभवतः इन टीकाओं में निम्नधन विचार मिलते हैं: समाज की सुरक्षा के लिए कानूनों का पालन; पीड़ितों का सम्मान; और सामूहिक उत्तरदायित्व की स्मृतियाँ।
संक्षिप्त निष्कर्ष
इस अध्याय से सीखने की बात यह है कि कठिन सामाजिक-स्थिति में भी समुदाय अपने नैतिक दायित्वों और सुरक्षा-नीतियों के साथ कदम बढ़ाए, ताकि निराशाजनक स्थितियों के बावजूद पीड़ितों के लिए आशा और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित हो सके।